गन्ना (Sugarcane)

भूमि: गन्ने की खेती किसी भी तरह की उपजाऊ मिट्टी में की जा सकती है,किन्तु गहरी दोमट मिट्टी में इसकी पैदावार अधिक मात्रा में प्राप्त हो जाती है | इसकी खेती के लिए उचित जल निकासी वाली भूमि की आवश्यकता होती है | क्योकि जल भराव से फसल के ख़राब होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है | सामान्य P.H. मान वाली भूमि गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त होती है | गन्ने के पौधों को शुष्क और आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है | इसके पौधे एक से डेढ़ वर्ष में पैदावार देना आरम्भ करते है | जिस वजह से इसे विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, इन परिस्थितियों में भी पौधे ठीक से विकास करते है | इसकी फसल को सामान्य वर्षा की आवश्यकता होती है, तथा केवल 75 से 120 CM वर्षा ही पर्याप्त होती है | 

तापमान: गन्ने के बीजो को आरम्भ में अंकुरित होने के लिए 20 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है, तथा जब इसके पौधे विकास कर रहे होते है, तब उन्हें 21 से 27 डिग्री तापमान चाहिए होता है | इसके पौधे अधिकतम 35 डिग्री तापमान को ही सहन कर सकते है|

उचित समय:

शीतकालीन बुवाई : इसमें अक्टूबर -नवम्बर में फसल की बुवाई करते हैं |

बसंतकालीन बुवाई : इसमें फरवरी से मार्च तक फसल की बुवाई करते है।

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कद्दू (Pumpkin)

भूमि: कद्दू की खेती को करने के लिए उचित जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी  की आवश्यकता होती है | कद्दू की फसल की अच्छी वृद्धि के लिए गर्म और आद्र दोनों ही जलवायु को उपयुक्त माना जाता है | इसकी फसल में अधिक पानी की आवश्यकता होती है, किन्तु अधिक जलभराव वाली भूमी को इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है | कद्दू की अच्छी फसल के लिए जमीन का P.H. मान 5 से 7 के मध्य होना चाहिए | 

तापमान: तकरीबन 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के तापमान में इसके पौधे अच्छे से विकास करते हैं।

उचित समय: कद्दू की खेती साल में दो बार की जा सकती है। खरीफ में बुवाई का समय जून – जुलाई और जायद में बुवाई का समय जनवरी – फ़रवरी होता है।

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खीरा (Cucumber)

भूमि: खीरे को रेतीली दोमट व भारी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है, लेकिन इसकी खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली बलुई एवं दोमट मिट्टी में अच्छी रहती है। खीरे की खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 6-7 के बीच होना चाहिए। इसकी खेती उच्च तापमान में अच्छी होती है।

तापमान: इसके लिए 25-35 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: टिंडा की खेती साल में दो बार की जा सकती है। इसे फरवरी से मार्च और जून से जुलाई तक इसकी बुवाई कर सकते हैं।

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जई(Jaee)

भूमि : जई सभी प्रकार की कृषि योग्य भूमि में पैदा हो सकती है | यह हर तरह की मिट्टी में उगाई जाती है। अच्छे जल निकास वाली चिकनी रेतली मिट्टी, जिस में जैविक तत्व हों, जई की खेती के लिए उचित मानी जाती है। जई की खेती के लिए 5-6.6 पी एच वाली मिट्टी बढ़िया होती है।

तापमान : जई की बिजाई के लिए मुख्यतया 20-25 डिग्री C तापमान होना चाहिए।

उचित समय : 20 अक्टूबर से 10 नवम्बर के बिच का समय बढ़िया माना जाता है।

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बैंगन (Brinjal)

भूमि: इसकी खेती अच्छे जल निकास युक्त सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है। बैंगन की अच्छी उपज के के लिए, बलुई दोमट से लेकर भारी मिट्टी जिसमें कार्बिनक पदार्थ की पर्याप्त मात्रा हो, उपयुक्त होती है। भूमि का पी.एच मान 5.5-6.0 की बीच होना चाहिए तथा इसमें सिंचाई का उचित प्रबंध होना आवश्यक है। झारखण्ड की उपरवार जमीन बैंगन की खेती के लिए उपयुक्त पायी गई है।

तापमान: इसके लिए 21 से 30° के औसत तापमान की आवश्यकता होती है ।

उचित समय: पहली फसल के लिए अक्तूबर में पनीरी बोयें ताकि जो नवंबर तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये।

दूसरी फसल के लिए नवंबर में पनीरी बोयें ताकि जो फरवरी के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये।

तीसरी फसल के लिए फरवरी मार्च में पनीरी बोयें ताकि जो अप्रैल के आखिर से पहले ही पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये।

चौथी फसल के लिए जुलाई में पनीरी बोयें ताकि जो अगस्त तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये।

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