मिर्ची (Chili)

भूमि: हरी मिर्च की खेती लगभग हर तरह की मिट्टी में की जा सकती है। अच्छी पैदावार के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिस में नमी हो, इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है। मिर्च की अच्छी पैदावार के लिए ज़मीन की पीएच छह-सात के औसत में अनुकूल होती है। इसके अलावा मिर्च की खेती के लिए जीवांशयुक्त दोमट या बलुई मिट्टी उपुयक्त होती है, जिसमें कार्बनिक पदार्थ की मात्रा अधिक हो।

तापमान: इसके लिए 18-40 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: हरी मिर्च की खेती को साल में 3 बार उगाया जा सकता है। हालांकि देश के किसान ज्यादातर खरीब की फसल को महत्व देते है और इस ऋतु मे खेती का आंकड़ों मे रकबा भी काफी है। हरी मिर्च की खेती के लिए वर्षा ऋतु की फसल लेने के लिए सही समय जून-जुलाई का है। दूसरी फसल लेने के लिए सितम्बर-अक्टूबर में बुआई कर देनी चाहिए। वहीं गर्मी के मौसम की फसल के लिए फरवरी-मार्च में बुआई कर दी जानी चाहिए।

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भिण्डी (Ladyfinger)

भूमि: भिंडी की खेती किसान सभी प्रकार की मिट्टी में कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए हल्की दोमट मिट्टी काफी अच्छी मानी जाती है | क्योंकि इस मिट्टी में जल निकास काफी अच्छी तरह हो जाता है | इसके अलावा इसकी खेती के लिए भूमि में कार्बनिक तत्व का होना बेहद ज़रूरी है | इसके साथ ही इसका पी.एच.मान लगभग 6 से 6.8 तक होना चाहिए |

तापमान: इसके लिए 25-30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है। वर्षा वाले मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है।

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करेला (Bitter Gourd)

भूमि: करेले की खेती के लिए किसी खास तरह की मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती है, इसे किसी भी उपजाऊ मिट्टी में आसानी से उगाया जा सकता है, लेकिन बलुई दोमट मिट्टी को इसकी खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है | इसके अलावा भूमि उचित जल निकासी वाली होनी चाहिए | इसकी खेती में 6 से 8 P.H. मान वाली भूमि की आवश्यकता होती है | करेले की खेती में शुष्क और गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है, गर्मियों के मौसम में इसकी पैदावार अच्छी प्राप्त होती है |

तापमान: इसके लिए 25-40 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: भारत में अधिकांश किसान करेले की फसल का उत्पादन एक वर्ष में दो बार करते हैं। सर्दियों के समय में बोये जाने वाले करेले की किस्मों को जनवरी-फरवरी में बुआई कर मई-जून में इसका उत्पादन प्राप्त कर लेते हैं। जबकि गर्मियों के समय में करेले की किस्मों की बुआई जून और जुलाई में करने के पश्चात इसकी उपज दिसंबर तक मिल जाती है।

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धनिया(Coriander)

भूमि: धनिया की सिंचित फसल के लिये अच्छा जल निकास वाली अच्छी दोमट भूमि सबसे अधिक उपयुक्त होती है और असिंचित फसल के लिये काली भारी भूमि अच्छी होती है। धनिया क्षारीय एवं लवणीय भूमि को सहन नही करता है। अच्छे जल निकास एवं उर्वरा शक्ति वाली दोमट या मटियार दोमट भूमि उपयुक्त होती है। मिट्‌टी का पी.एच. 6.5 से 7.5 होना चाहिए।

तापमान: इसके लिए 20-30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: धनिया की फसल रबी मौसम में बोई जाती है । धनिया बोने का सबसे उपयुक्त समय 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर है ।

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पालक(Spinach)

भूमि: पालक औसत मिट्टी में अच्छी तरह से उग सकता है, लेकिन जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टी में यह ज्यादा अच्छे से विकसित होगा। आमतौर पर, पालक उगाते समय मिट्टी का प्रकार और पीएच शायद ही कभी प्रतिबंधी कारक बनते हैं। पालक को मिट्टी की कई किस्मों जो अच्छे जल निकास वाली होती हैं, में उगाया जाता है| पर यह रेतली चिकनी और जलोढ़ मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है। तेजाबी और जल जमाव वाली मिट्टी में पालक की खेती करने से बचाव करें। इसके लिए मिट्टी का pH 6 से 7 होना चाहिए। 

तापमान: इसके लिए 20-30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: उपयुक्त वातावरण में पालक की बुवाई वर्ष भर की जा सकती है। पालक की फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए बुवाई जनवरी-फरवरी, जून-जुलाई और सितम्बर-अक्टूबर में की जा सकती है  पर अगस्त से दिसंबर का समय बिजाई के लिए उचित होता है, जिससे पालक की अच्छी पैदावार प्राप्त होती है।

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