गन्ना (Sugarcane)

भूमि: गन्ने की खेती किसी भी तरह की उपजाऊ मिट्टी में की जा सकती है,किन्तु गहरी दोमट मिट्टी में इसकी पैदावार अधिक मात्रा में प्राप्त हो जाती है | इसकी खेती के लिए उचित जल निकासी वाली भूमि की आवश्यकता होती है | क्योकि जल भराव से फसल के ख़राब होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है | सामान्य P.H. मान वाली भूमि गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त होती है | गन्ने के पौधों को शुष्क और आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है | इसके पौधे एक से डेढ़ वर्ष में पैदावार देना आरम्भ करते है | जिस वजह से इसे विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, इन परिस्थितियों में भी पौधे ठीक से विकास करते है | इसकी फसल को सामान्य वर्षा की आवश्यकता होती है, तथा केवल 75 से 120 CM वर्षा ही पर्याप्त होती है | 

तापमान: गन्ने के बीजो को आरम्भ में अंकुरित होने के लिए 20 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है, तथा जब इसके पौधे विकास कर रहे होते है, तब उन्हें 21 से 27 डिग्री तापमान चाहिए होता है | इसके पौधे अधिकतम 35 डिग्री तापमान को ही सहन कर सकते है|

उचित समय:

शीतकालीन बुवाई : इसमें अक्टूबर -नवम्बर में फसल की बुवाई करते हैं |

बसंतकालीन बुवाई : इसमें फरवरी से मार्च तक फसल की बुवाई करते है।

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Termite(दीमक)

दीमक एक सामाजिक कीट है। दीमक हल्के पीले या भूरे रंग के कोमल कीट होते हैं।  चींटी की जाति का एक छोटा कीड़ा जो समूह में रहता है और कागज़, लकड़ी, पौधों आदि को खा जाता है। इसको सफेद चींटी भी कहा जाता है | दुनिया भर में लगभग 2,750 से अधिक प्रजातियां है, यह उष्णकटिबंधीय व शीतोष्ण क्षेत्रों सबसे ज्यादा पाये जाते है, कुछ प्रजाति ठंडे तापमान के लिए अनुकूलित होते है| दीमक मिट्टी के अन्दर या आस-पास तथा नमी वाले स्थान पर पाये जाते है| इसका अस्तित्व 120 मिलियन से अधिक वर्षों से है | दीमक भोजन में क्या खायेगी यह उसके विभिन्न प्रजातियों पर निर्भर करता है| यह सेल्यूलोज युक्त कार्बनिक पदार्थ को खाते हैं,यह आमतौर पर मृत पौधे, पत्ती, लकड़ी, कूड़े, मिट्टी तथा जानवरों के गोबर को ग्रहण करते है | तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

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Pink Boll Worm (गुलाबी सुंडी)

पिंक बॉलवॉर्म एशिया का मूल निवासी है, लेकिन दुनिया के अधिकांश कपास उगाने वाले क्षेत्रों में एक आक्रामक प्रजाति बन गई है। भारत के कई क्षेत्रों में कपास पर गुलाबी सुंडी एक प्रमुख कीट के रूप में उभर कर आती रही  है। कपास में कपास के सबसे बड़े दुश्मन पिंक बॉल वार्म (Pink Boll worm) यानी गुलाबी सुंडी कीट के आक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है। यह इल्ली कपास के बीजों को खाकर आर्थिक हानि पहुँचाती है। गुलाबी इल्ली का प्रकोप फसल के मध्य तथा देर की अवस्था में होता है। गुलाबी सुंडी की लटें फलीय भागों के अंदर छुपकर तथा प्रकाश से दूर रहकर नुकसान करती हैं जिसके कारण इस कीट से होने वाले नुकसान की पहचान करना कठिन होता है, और फसल को अधिक नुकसान होता है। फसल का सीजन बदलने के बाद किसानों को लगता है कि अब सूंडी का प्रकोप खत्म हो चुका है। लेकिन केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान गुलाबी सूंडी का कीड़ा पूरी तरह नहीं मरता है | यह लकड़ियों और खराब टिंडों में शांत होकर छिप जाता है कीड़ा, सीजन आने पर जागता है | गुलाबी सूंडी का कीड़ा 2 किलोमीटर तक उड़कर जा सकता है। तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

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Mealybug (मिलीबग)

मिलीबाग Pseudococcidae फैमिली का insect है , यह गरम और नमी वाले जलवायु में पाया जाता है । मिलीबग की 200 से भी ज्यादा प्रजातियाँ पायी जाती हैं पर ज़्यादातर एक जैसी ही दिखती हैं । मादा मिलीबग और नर मिलीबग की बनावट में पर्याप्त अंतर पाया जाता है । मादा जहां आकार में बड़ी होती है नर आकार में प्रायः छोटे ही होते हैं । मादा के पंख नही होते जबकि नर के पंख होते हैं , इसके अलावा मादा पैर होने के कारण Move कर सकती है जबकि नर के पैर नही होते हैं । कुछ प्रजातियाँ अंडे देती हैं जबकि कुछ Direct बच्चों को जन्म देती हैं । यह एक बार में सैकड़ों अंडे दे सकती हैं इसीलिए यदि इन पर control नहीं किया गया तो इनकी संख्या बहुत तेज़ी से फैलता है । लक्षण कीटों के समूह से बना सफ़ेद रुई जैसा गुच्छा पत्तियों, तनों, फूलों तथा फलों के निचले हिस्से पर दिखाई देता है। ये बहुत अधिक सक्रिय होते हैं। संक्रमण के कारण पत्तियों का पीला पड़ना तथा मुड़ना, पौधों में अवरुद्ध विकास तथा फलों का समय से पहले गिरना देखा गया है। | तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

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कद्दू (Pumpkin)

भूमि: कद्दू की खेती को करने के लिए उचित जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी  की आवश्यकता होती है | कद्दू की फसल की अच्छी वृद्धि के लिए गर्म और आद्र दोनों ही जलवायु को उपयुक्त माना जाता है | इसकी फसल में अधिक पानी की आवश्यकता होती है, किन्तु अधिक जलभराव वाली भूमी को इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है | कद्दू की अच्छी फसल के लिए जमीन का P.H. मान 5 से 7 के मध्य होना चाहिए | 

तापमान: तकरीबन 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के तापमान में इसके पौधे अच्छे से विकास करते हैं।

उचित समय: कद्दू की खेती साल में दो बार की जा सकती है। खरीफ में बुवाई का समय जून – जुलाई और जायद में बुवाई का समय जनवरी – फ़रवरी होता है।

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