Romanesco Broccoli

blackberryजामुन एक सदाबहार वृक्ष है, जिसका पूर्ण विकसित पौधा 25 से 30 फ़ीट ऊँचा होता है | इसका पौधा एक बार लग जाने के पश्चात 50 से 60 वर्षो तक पैदावार दे देता है | जामुन को जमाली, राजमन, ब्लैकबेरी, और काला जामुन के नामों से भी जानते है | Click Herealoe vera cultivationएलोवेरा की बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए इसकी खेती मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। हर्बल और कास्मेटिक्स में इसकी मांग निरंतर बढ़ती ही जा रही है। इन प्रोडक्टसों में अधिकांशत: एलोवेरा का उपयोग किया जा रहा है। सौंदर्य प्रसाधन के सामान में इसका सर्वाधिक उपयोग होता है।Click Herekhirni plantप्रकृति की अनमोल देन, खिरनी का पौधा एक रहस्यमयी और उपयोगी पौधा है। इस पौधे के विविध प्रकार और इसके विशेषता बनाते हैं इसे अद्भुत वन्यजीवों के लिए भोजन का स्रोत।Click Here
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  • फूल गोभी या रोमनेस्क ब्रोकली
  • रोमनेस्को ब्रोकली क्या है ?
  • रोमनेस्को ब्रोकली के बीज कब लगाएं
  • होम गार्डन में रोमनेस्को को उगाने की सामग्री
  • घर पर रोमनेस्को को उगाने की विधि
  • गमले में रोमनेस्को उगाने के लिए मिट्टी
  • रोमनेस्को के बीजों को सीडलिंग ट्रे में लगाएं
  • रोमनेस्को के पौधे लगाने के लिए ग्रो बैग या गमला
  • रोमनेस्को के लिए पानी
  • गमले में रोमनेस्को उगाने के लिए धूप
  • ग्रो बैग में लगे रोमनेस्को के लिए आर्गेनिक खाद
  • रोमनेस्को ब्रोकली में कीट नियंत्रण
  • रोमनेस्को को हार्वेस्ट कब करें

फूल गोभी या रोमनेस्क ब्रोकली
रोमनेस्को ब्रोकली क्या है ?
रोमनेस्को ब्रोकली के बीज कब लगाएं
होम गार्डन में रोमनेस्को को उगाने की सामग्री
घर पर रोमनेस्को को उगाने की विधि
गमले में रोमनेस्को उगाने के लिए मिट्टी
फूल गोभी या रोमनेस्क ब्रोकली

दुनिया विचित्र चीजों से भरी हुई है, जहाँ हर समय कुछ न कुछ अजीबो गरीब देखने या सुनने को मिलता ही रहता है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी सब्जी के बारे में बताने जा रहें हैं, जो दिखने में सबसे अलग एवं विचित्र है, इस अनोखी दिखने वाली सब्जी का नाम रोमनेस्को ब्रोकली या रोमन फूलगोभी है, इसके खूबसूरत आकार एवं हेल्थ बेनिफिट के कारण भारत एवं अन्य कई देशों में लोग इसे अपने घर पर बड़े शौंक से उगाते हैं। तो आईये जानते हैं कि आप इस खूबसूरत डिजाईन वाली विचित्र रोमनेस्को सब्जी या रोमन फूलगोभी को अपने होम गार्डन में कैसे उगा सकते हैं। रोमनेस्को ब्रोकली के बीजों को कैसे उगाएं, गमले में रोमनेस्को फूलगोभी को उगाने की विधि तथा सब्जी की देखभाल करने का तरीका जानने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें।

रोमनेस्को ब्रोकली क्या है ?

रोमनेस्को को रोमन फूलगोभी या रोमनेस्क ब्रोकली के नाम से भी जाना जाता है, यह अनोखे आकार वाली सब्जी मूल रूप से इटली में उगाई जाती है, लेकिन इसके खूबसूरत आकार एवं हेल्थ बेनिफिट के कारण यह अमेरिका एवं अन्य कई देशों में भी उगाई जाने लगी है। इसके विचित्र दिखने के पीछे की वजह इसके पिरामिड जैंसी आकृति वाले टूटे-फूटे फूल हैं, यह दिखने में जितनी अनोखी होती है, खाने में उतनी ही लाजवाब और स्वादिष्ट भी होती है।

साइंटिफिक स्टडी में पता चला है कि रोमनेस्को फूलगोभी में ये जो दानेदार आकृतियाँ दिखाई देती हैं वास्तव में वो फूल बनना चाहती हैं, लेकिन फूल की जगह बड्स में ट्रांसफॉर्म हो जाती हैं। इस वजह से यह दुनिया की सबसे विचित्र एवं अनोखी सब्जी कहलाती है। रोमनेस्को कोलीफ्लावर आपकी सेहत के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद है, इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन C, विटामिन K, कैरोटिनायड्स एवं डायटरी फाइबर होते हैं।

रोमनेस्को ब्रोकली के बीज कब लगाएं

Lorem a

रोमन ब्रोकली या रोमनेस्को एक ठंडे मौसम वाली सब्जी है, जिसे आप सितम्बर से नवम्बर एवं जनवरी से फरवरी के महीनों में अपने होम गार्डन या टेरेस गार्डन के गमले या ग्रो बैग में बीज की बुवाई कर उगा सकते हैं।

होम गार्डन में रोमनेस्को को उगाने की सामग्री

दुनिया की सबसे विचित्र सब्जी रोमनेस्को को आप अपने होम गार्डन में बड़ी ही सरलता से उगा सकते हैं, इसके लिए बस आपको नीचे लिखी सामग्री की आवश्यकता होगी:

  1. सीडलिंग ट्रे (Seedling Tray)
  2. 24×12 इंच का HDPE ग्रो बैग (24×12 Inch HDPE Grow Bag)
  3. बढ़िया उर्वरता वाली मिट्टी (Good Fertility Soil)
  4. श्रेष्ठ गुणवत्ता रोमनेस्को बीज (Best Quality Romanesco Seeds)
  5. आर्गेनिक फर्टिलाइजर (Organic Fertilizer)
  6. जैविक कीटनाशक (Organic Insecticide)
  7. गार्डनिंग टूल्स (Gardening Tools)

घर पर रोमनेस्को को उगाने की विधि

विचित्र डिजाईन वाली रोमनेस्को को उगाने के लिए विंटर सीजन को सही समय माना जाता है, यह सब्जी 10°C से 30°C तापमान में अच्छी तरह से ग्रोथ करती है और बढ़िया उपज देती है। तो आईये जानते हैं कि इस अनोखी सब्जी को आप आसानी से अपने गार्डन में कैसे उगा सकते हैं:

गमले में रोमनेस्को उगाने के लिए मिट्टी

किसी भी क्रॉप की अच्छी उपज के लिए उच्च उर्वरता वाली मिट्टी का होना बहुत जरूरी होता है, जिसे आप घर पर ही तैयार कर सकते हैं, इसके लिए 50% सामान्य मिट्टी, 30% गोबर खाद, 10% रेत और 10% कोकोपीट को अच्छे से मिलाकर मिश्रण बनायें, फिर इस पॉटिंग माप को सीडलिंग ट्रे और ग्रो बैग में भरें और मिट्टी नम करने के लिए वाटरिंग कैन की मदद से पानी अवश्य दें।

रोमनेस्को के बीजों को सीडलिंग ट्रे में लगाएं
रोमनेस्को के पौधे लगाने के लिए ग्रो बैग या गमला
रोमनेस्को के लिए पानी
गमले में रोमनेस्को उगाने के लिए धूप
ग्रो बैग में लगे रोमनेस्को के लिए आर्गेनिक खाद
रोमनेस्को ब्रोकली में कीट नियंत्रण
रोमनेस्को के बीजों को सीडलिंग ट्रे में लगाएं

सीडलिंग ट्रे में पॉटिंग मिट्टी भरने के बाद आप इसमें 0.5 इंच की गहराई में बीज बोयें एवं नमी के लिए पानी अवश्य दें। सीडलिंग ट्रे में बीज बोने से अंकुरण दर काफी तेज़ हो जाती है और सीड के नष्ट होने की सम्भावना काफी कम रहती है और पौधे को ट्रांसप्लांट करने पर रूट प्रूनिंग के कारण पौधे की ग्रोथ भी काफी अच्छी होती है। सीडलिंग ट्रे में रोमनेस्को के बीज बोने के बाद लगभग 7 से 14 दिनों में सीड जर्मीनेट हो जाते हैं। रोमनेस्को के सीड जर्मीनेशन के लिए आवश्यक तापमान 12°C से 24°C होना जरूरी है।

रोमनेस्को के पौधे लगाने के लिए ग्रो बैग या गमला

सीडलिंग ट्रे में बीजों की बुवाई के बाद लगभग 25 से 30 दिनों में पौधा प्रत्यारोपण के लिए रेडी हो जाता है। आप गमले या ग्रो बैग में रोमानेस्को पौधे को ट्रांसप्लांट कर सकते हैं। रोमनेस्को को लगाने के लिए ग्रो बैग या गमले की गहराई कम से कम 12 इंच की होनी चाहिए, क्योंकि रोमन ब्रोकली या रोमनेस्को की जड़ें काफी गहराई तक जाती हैं। अतः आप इस विचित्र डिजाईन वाली सब्जी रोमनेस्को के लिए 18×12 या 24×12 इंच के ग्रो बैग का यूज कर सकते हैं, इस ग्रो बैग में आप रोमनेस्को के 2 से 4 पौधे लगा सकते हैं।

रोमनेस्को के लिए पानी

ग्रो बैग में पौधे को ट्रांसप्लांट करने के बाद समय पर और जरूरत के हिसाब से पानी दें, क्योंकि जरूरत से ज्यादा पानी पौधे की जड़ों को नष्ट कर सकता हैं। अतः जब पौधे छोटे हों, तो उन्हें दो दिन में एक बार ही पानी देना चाहिए, एवं जब पौधे बड़े हो जायें तब डेली बेसिस पर पौधों को पानी देना जरूरी हो जाता है, लेकिन ध्यान रहे पौधों को पानी हमेशा सुबह या शाम के समय ही दें एवं ओवरवाटरिंग से बचें।

गमले में रोमनेस्को उगाने के लिए धूप

ग्रो बैग में लगे रोमनेस्को प्लांट की ग्रोथ के लिए पूर्ण सूर्य प्रकाश की आवश्यकता होती है, अतः इन पौधों को ऐसी जगह पर लगाएं या गमलों को ऐसी जगह पर रखें, जहाँ इनको रोजाना लगभग 6 से 8 घंटे की धूप प्राप्त हो सके।

ग्रो बैग में लगे रोमनेस्को के लिए आर्गेनिक खाद

रोमनेस्को प्लांट की अच्छी ग्रोथ के लिए ग्रोइंग स्टेज के अनुसार आप पौधे को जैविक खाद दे सकते हैं। रोमन ब्रोकली या रोमनेस्को को ट्रांसप्लांट करने के 4 से 5 दिनों के बाद आप प्लांट ग्रोथ प्रमोटर (PGP) लिक्विड फर्टिलाइजर का प्रयोग करें, इसके बाद प्रत्येक 3 से 4 सप्ताह में प्लांट की ग्रोथ एवं रोमनेस्को के हेड के विकास के लिए आर्गेनिक प्रोम (फास्फोरस रिच आर्गेनिक मेन्योर) एवं सरसों खली के मिश्रण का प्रयोग करें।

रोमनेस्को ब्रोकली में कीट नियंत्रण

रोमन फूलगोभी या रोमनेस्को में एफीड्स एवं अन्य कीटों का प्रकोप हो सकता है, इन कीटों से बचने के लिए आप आर्गेनिक पेस्टिसाइड का प्रयोग कर सकते हैं। पौधे में कीटों या रोगों के शुरुआती लक्षण दिखने पर आप नीम तेल का छिड़काव कर सकते हैं।

रोमनेस्को को हार्वेस्ट कब करें ?
दुनिया की सबसे विचित्र सब्जी रोमनेस्को को आप बीज की बुवाई के बाद से लगभग 75 से 100 दिनों में हार्वेस्ट कर सकते हैं। जब इसका हेड 5 से 7 इंच व्यास का हो जाये, तब आप समझ जाइये कि रोमनेस्को ब्रोकली हार्वेस्टिंग के लिए तैयार है।

लिया गया लेख

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Swiss Chard

  • परिचय :
  • इस्तेमाल :
  • फायदे :
  • किस्में :
  • जलवायु :
  • मिट्टी :
  • खेत की तैयारी :
  • खाद एवं उर्वरक :
  • बुआई :
  • सिंचाई :
  • निराई गुड़ाई :
  • कीट और रोकथाम :
  • कटाई :

परिचय :

स्विस चार्ड चुकंदर के परिवार का सदस्य है जिसको उसके चमकीले और रंगीन तनों के लिए जाना जाता है। इसके तने पीला, गुलाबी, लाल, नारंगी और सफेद रंगो के होते हैं। इसके पत्ते और तने दोनों को कच्चा या पकाके खाया जाता है।

इस्तेमाल :

ताजा स्विस चार्ड को कच्चा सलाद, टॉर्टिला रैप, सूप या ऑमलेट में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके पत्ते और डंठल को आमतौर पर खाना पकाने के लिए उबाला जाता है जिससे इसकी कड़वाहट कम हो जाती है।

फायदे :

इसमें कई पोषक तत्व पाये जाते हैं जिसके कारण यह सेहत के लिए फायदेमंद होता है। विटामिन ए, विटामिन के, विटामिन सी, विटामिन ई, कैल्शियम, मैग्नीशियम, तांबा, जस्ता, सोडियम, फास्फोरस और बहुत कम कैलोरी पाये जाते है। इस सब्जी से कैंसर से लड़ने में मदद, रक्तचाप को कम करने में, मोटापे, मधुमेह, हृदय रोग के खतरे को कम करने में, स्वास्थ्य सुधार करने में, ऊर्जा में वृद्धि और वजन कम करती है।

किस्में :

स्विस चार्ड की अधिक किस्में नहीं हैं लेकिन फोर्ड हुक नामक किस्म की खेती सफलतापूर्वक उत्तरी भारत या दिल्ली के निकट अधिक की जाती है। अन्य किस्मों में ब्राइट येलो, फोर्डहुक, लुकुलस और रूबी आदि है।

जलवायु :

स्विस चार्ड एक पौष्टिक सब्जी है जो ठंडी और गर्म दोनों मौसमों में अच्छी तरह से उपज देती है लेकिन ठंड का मौसम इसकी खेती के लिए सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यह बसंत और पतझड़ के ठंडे तापमान के दौरान आसानी और जल्दी से बढ़ता है। स्विस चार्ड की खेती गर्मियों में भी की जाती है लेकिन गर्मियों में इसका विकास धीरे होता है। 20°-30° सेल्सियस तापमान पर इसके पत्ते अधिक बनते हैं।

मिट्टी :

इसे सभी प्रकार की मिट्टी में उगाई जा सकती है लेकिन दोमट या हल्की बलुई दोमट जिसका pH मान 6.5-7.5 हो और जल-निकास प्रबंध अच्छा हो, इसकी खेती के लिए उपयुक्त होता हैं।

खेत की तैयारी :

स्विस चार्ड की खेती के लिए खेत की मिट्टी के अनुसार उसे तैयार किया जाता है। चिकनी मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 1-2 जुताई और अन्य मिट्टी में जितनी बार में मिट्टी भुरभुरा हो जाये उतनी बार जुताई करनी पड़ती है। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल या ट्रेक्टर से करनी चाहिए जिससे खेत में मौजूद खरपतवार खत्म हो जाये। खेत पानी निकास का प्रबंध अच्छे से कर ले।

खाद एवं उर्वरक :

खेत जुताई करने के बाद मिट्टी में अच्छे से प्रति हेक्टर 10-12 टन गोबर, 120 किलो नाइट्रोजन, 80 किलो फास्फोरस तथा 60 किलो पोटाश मिला दे। अन्तिम जुताई के समय फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा दे और बचे हुए बाकि नाइट्रोजन को 2-3 बार में पत्तियों को तोड़ने के बाद टोप-ड्रेसिंग के रूप में दे।

बुआई :

उत्तरी भारत में सितम्बर-अक्टूबर और पहाड़ी जगहों में मार्च-अप्रैल का महीना बीज बोने के लिए उपयुक्त रहता है। बीज से पौध बनाने के लिए प्रति हैक्टर 4-5 किलो और सीधे बोने के लिये 6-8 किलो काफी होते हैं।

पौधा तैयार करने के लिए बीज को पंक्तियों में बोया जाता है। 2 पंक्तियों के बीच की दुरी 1-2 सेंटीमीटर और 2 बीजो के बीच की दूरी 2-3 मिलीमीटर होनी चाहिए। जब पौधे में 2-4 पत्तियां आ जाये तो उसे क्यारियों में रोप देना चाहिए।

पौधा रोपने के लिए 2 पंक्तियों के बीच की दुरी 30 सेंटीमीटर और 2 पौधों के बीच की दूरी 20-25 सेंटीमीटर होनी चाहिए। पौधों को शाम के वक्त रोपना चाहिए और सिंचाई भी कर दे। जब पौधे को खेत में रोपने के लिए उखाड़े तब उसे पहले ही हल्की सिंचाई कर लें जिससे पौधों की जड़ों को नुकसान ना पहुंचे।

सिंचाई :

पहली सिंचाई बीज और पौधे रोपने के तुरंत बाद कर दे और उसके बाद की सिचाई जरुरत के अनुसार करे। स्विस चार्ड एक पत्तेदार सब्जी है जिस कारण से इसे अधिक पानी की जरूरत होती है। हफते में 1-2 बार सिंचाई कर देनी चाहिए।

निराई गुड़ाई :

सिचाई के बाद खरपतवार उग आते है जो पौधों के विकास को कम कर सकते है इसीलिए हर सिचाई के बाद निराई गुड़ाई करते रहना चाहिए। गुड़ाई करने से मिट्टी का वायु-संचार बना रहता है और अगर कोई पौधा ख़राब हो जाये तो उसे दोबारा भी रोपा जा सकता है।

कीट और रोकथाम :

आमतौर पर इसकी खेती के शुरुआत में उखटा और पौध सड़न की परेशानी देखने को मिलती है जिसके रोकथाम के लिए फफूंदीनाशक दवा बेवस्टीन छिड़का जाता है। इसके अलावा एफिड या चेचा, माहू छोटे कीट की परेशानी देखने को मिलती है जिसके रोकथाम के लिए नुवान, एण्डोसल्फान या मेटासिस्टॉक्स का 1% का घोल बनाकर छिड़का जाता है।

कटाई :
जब पत्ते बड़े और तोड़ने लायक हो जायें तो सबसे पहले बाहर या नीचे के पत्तों को तेज चाकू से काटना चाहिए। कटे हुए पत्तो का बंडल बना ले और उन्हें बाजार में बेच दे। इस पौधे पर कई बार पत्तियां लगती हैं तथा एक हफते में 2-3 बार तुड़ाई हो जाती है। स्विस-चार्ड प्रति पौधा 400 ग्राम तथा प्रति हैक्टर 150-200 क्विंटल उपज दे सकता है।
लिया गया लेख

Beetrootचुकंदर एक ऐसा फल है, जिसका सेवन सब्जी के रूप में पकाकर या बिना पकाये ऐसे भी किया जा सकता है | चुकंदर को मीठी सब्जी भी कह सकते है, क्योकि इसका स्वाद खाने में हल्का मीठा होता है |Click HereAbout MSPएमएसपी कृषि उत्पादन का न्यूनतम मूल्य है, जो किसानो को फसल पर मिलता है भले ही बाजार में फसल के दाम कम हो |इसके पीछे तर्क ये है कि उस फसल की कीमत में उतार चढ़ाव का असर किसानो पर ना हो उन्हें न्यूनतम मूल्य मिलता रहे|Click Hereblackberryजामुन एक सदाबहार वृक्ष है, जिसका पूर्ण विकसित पौधा 25 से 30 फ़ीट ऊँचा होता है | इसका पौधा एक बार लग जाने के पश्चात 50 से 60 वर्षो तक पैदावार दे देता है | जामुन को जमाली, राजमन, ब्लैकबेरी, और काला जामुन के नामों से भी जानते है | Click Here
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Green Onion

  • Green Onion
  • घर पर हरी प्याज कैसे उगाएं
  • हरी प्याज क्या होती है ?
  • हरी प्याज उगाने के लिए मिट्टी
  • हरी प्याज के लिए बेस्ट ग्रो बैग साइज़
  • घर के अंदर हरा प्याज कैसे उगाएं
  • गार्डन में हरी प्याज कैसे उगाएं
  • गमले में हरी प्याज कैसे उगाएं
  • हरी प्याज की कटाई
  • हरी प्याज की देखभाल
  • हरी प्याज को प्रभावित करने वाले रोग और कीट

घर पर हरी प्याज कैसे उगाएं
हरी प्याज क्या होती है ?
हरी प्याज उगाने के लिए मिट्टी
हरी प्याज के लिए बेस्ट ग्रो बैग साइज़
घर के अंदर हरा प्याज कैसे उगाएं
गार्डन में हरी प्याज कैसे उगाएं
घर पर हरी प्याज कैसे उगाएं

हरे प्याज (Green onion) को ​​​​स्कैलियन (scallions) या स्प्रिंग ओनियन (spring onions) के नाम से भी जाना जाता है। स्प्रिंग ओनियन या हरी प्याज होम गार्डनिंग के लिए एक अत्यधिक लोकप्रिय सब्जी है, क्योंकि यह ठंडे मौसम में बहुत अच्छा विकास करती है। हरी प्याज उगाने के लिए जनवरी से फरवरी व जून से जुलाई का समय उचित माना जाता है। यदि आप भी हरी प्याज को अपने घर, गार्डन में उगाना चाहते हैं, तो इस लेख को पूरा पढ़ें, जहाँ पर आप स्प्रिंग ओनियन (hari pyaj) क्या है, गमले में हरी प्याज कैसे लगाएं, प्याज उगाने के लिए बेस्ट साइज़ के ग्रो बैग और पौधे को प्रभावित करने वाले रोग व कीट की जानकारी के बारे में जानेगें।

हरी प्याज क्या होती है ?

हरी प्याज (green onion) जिसे परंपरागत रूप से स्प्रिंग ओनियन के रूप में जाना जाता है, यह हरा प्याज बल्ब का निर्माण नहीं करती है, इसके साथ ही कठोर जड़ों के साथ सफेद डंठल और पत्तेदार साग है।

यह वार्षिक रूप में उगाई जाने वाली बारहमासी सब्जी है। स्वस्थ और पौष्टिक हरी प्याज को नम, थोड़ी अम्लीय (पीएच 5 से 6) और अच्छी जल निकासी वाली सूखी मिट्टी की आवश्यकता होती है। स्प्रिंग ओनियन को सलाद के रूप में या सब्जी के रूप में पकाकर खाया जा सकता है।

हरी प्याज उगाने के लिए मिट्टी

स्प्रिंग ओनियन नम, अच्छी तरह से सूखी मिट्टी के साथ धूप वाले स्थान में अच्छी तरह से विकसित होती है। मिट्टी को थोड़ा अम्लीय होना चाहिए अर्थात मिट्टी का पीएच 5 से 6 होना चाहिए। हालाँकि हरी प्याज 7 पीएच तक की मिट्टी में भी आसानी से उग सकती है। इसके अतिरिक्त, अच्छी पैदावार के लिए खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाकर मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।

हरी प्याज के लिए बेस्ट ग्रो बैग साइज़
आप लगभग किसी भी कंटेनर, गमले या ग्रो बैग में स्प्रिंग ओनियन उगा सकते हैं। क्योंकि इसकी जड़ें काफी उथली होती हैं, और पौधे बहुत अधिक जगह नहीं लेते हैं। हरी प्याज को अच्छी तरह उगाने के लिए निम्न साइज़ के ग्रो बैग का उपयोग किया जा सकता है, जैसे:

  • 24 X 9 इंच (WxH)
  • 12 X 12 इंच (WxH)
  • 15 x 12 इंच (WxH)
  • 3F X 2F X 1F रेक्टेंगुलर ग्रो बैग
  • 36x36x12 इंच रेक्टेंगुलर ग्रो बैग
  • 60x12x12 इंच रेक्टेंगुलर ग्रो बैग

घर के अंदर हरा प्याज कैसे उगाएं

  • आप अक्टूबर से नवंबर के महीने में घर के अंदर हरी प्याज के बीज की बुआई कर सकते हैं, क्योंकि पौधे अत्यधिक ठंडे मौसम के प्रति संवेदनशील होते हैं।
  • प्याज के बीजों को 0.5 से 1 सेंटीमीटर की गहराई में लगाएं।
  • पॉटिंग मिश्रण को नम बनाए रखें और तापमान को 15 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें।
  • लगभग 7 से 14 दिन के अंदर प्याज के बीज अंकुरित होना शुरू हो जायेगें, और लगभग 20 से 30 दिन में प्याज की सीडलिंग ट्रांसप्लांट करने के लिए तैयार हो जाएगी।

गार्डन में हरी प्याज कैसे उगाएं

  • गार्डन में हरी प्याज को ग्रो करने के लिए उस जगह का चुनाव करें, जहाँ पूर्ण सूर्य प्रकाश मिलता हो। यदि गार्डन की मिट्टी चिकनी (clay) है, तो उसमें अच्छी तरह से पर्लाइट या वर्मीकुलाइट मिलाएं, तथा खाद और प्लांट फर्टिलाइजर या जैविक उर्वरक से मिट्टी को समृद्ध करें।
    अब तैयार की गई गार्डन की मिट्टी को समतल करने के बाद उसके ऊपर हरी प्याज (स्प्रिंग ओनियन) के बीज बिखेरें। बीजों को हल्के से मिट्टी से ढक दें। नमी बनाए रखने के लिए, स्प्रे पम्प से पानी दें या फिर बोए गए क्षेत्र को गीली घास से ढक दें।
    लगभग 7 से 14 दिन में बीज अंकुरित हो जाते हैं, और लगभग 3 सप्ताह में 15 सेमी लंबे पौधे होने पर प्रत्यारोपण के लिए तैयार हो जाते हैं। अतः आप इन पौधों को एक दूसरे से लगभग 5 सेमी दूरी पर और दो पंक्तियों के बीच लगभग 15 सेमी दूरी होना चाहिए। लगभग 60 से 70 दिन के बाद हरी प्याज सब्जी तोड़ने के लिए तैयार हो जाती है। हरी प्याज के पौधे को जमीन के पास तने के आधार को पकड़कर हार्वेस्ट कर लिया जाता है।

गमले में हरी प्याज कैसे उगाएं
हरी प्याज की कटाई
हरी प्याज की देखभाल
हरी प्याज को प्रभावित करने वाले रोग और कीट
गमले में हरी प्याज कैसे उगाएं

  • आप अपने घर पर हरी प्याज को ग्रो करने के लिए एक उचित आकार के गमले या ग्रो बैग का चयन करें। इस ग्रो बैग को पूर्ण सूर्य प्रकाश वाले स्थान पर रखें और उच्च गुणवत्ता वाले पॉटिंग मिश्रण से भर दें।

    स्प्रे बोतल या वाटर कैन की मदद से हरी प्याज लगे गमले या ग्रो बैग की मिट्टी को पानी दें। बीज अंकुरित होने तक मिट्टी को अच्छी तरह से नम बनाए रखें, लेकिन मिट्टी को ज्यादा गीला न रखें।

    हरी प्याज के पौधे में पत्ते के विकास को बढ़ावा देने के लिए कुछ हफ्तों के अंतराल से आर्गेनिक फ़र्टिलाइज़र और जैविक खाद देते रहें। 60 से 70 दिन के बाद हरी प्याज हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जायेगी। 8 से 10 सप्ताह में हरी प्याज उत्कृष्ट स्वाद के साथ लगभग 1/2 इंच (1.3 सेमी) मोटाई के साथ 8 से 18 इंच (15 सेमी) ऊंचाई तक पहुंच जाती है।

हरी प्याज की कटाई

  • आपको एक से अधिक बार हरी प्याज हार्वेस्टिंग करने को मिल जाती है। हरी प्याज काटते समय, पौधे के तने को नीचे से कम से कम दो इंच ऊपर से काटें, जिससे कि दुबारा हरी प्याज प्राप्त करने के लिए जड़ को फिर से ग्रो किया जा सके। हरी प्याज लगभग 60 से 70 दिन में हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाती है।

हरी प्याज की देखभाल

  • स्प्रिंग ओनियन के बीज को सड़ने से बचाने के लिए, विशेष रूप से जब वे अंकुरित हो रहे हों, तब अधिक पानी देने से बचें।
  • हरी प्याज नम मिट्टी को पसंद करती है, लेकिन इसकी जड़ें इतनी मजबूत नहीं होती है कि वे मिट्टी की गहराई से पानी को सोख सकें। इसलिए मिट्टी को सूखने से बचाने के लिए नियमित रूप से पानी देना आवश्यक है। अधिक समय तक नमी बनाए रखने के लिए पौधों के चारों ओर मल्चिंग करने पर विचार करें।
  • हरे प्याज़ को ग्रो करना आसान होता है, लेकिन विकास की अवस्था में समय-समय पर नियमित रूप से पानी और उर्वरक देने की आवश्यकता होती है। मिट्टी को नियमित रूप से नम बनाए रखने के लिए पानी दें। यदि मिट्टी तैयार करने के दौरान पोषक तत्वों पर आधारित आर्गेनिक फ़र्टिलाइज़र और खाद की उचित मात्रा को मिलाया जाता है, तब इस स्थिति में मिट्टी में अतिरिक्त उर्वरक डालने की आवश्यकता नहीं होती है।
  • गर्म मौसम और अधिक धूप से हरी प्याज को सुरक्षित रखने के लिए आंशिक छाया प्रदान करनी होती है।
  • यदि हरी प्याज में मोल्ड विकसित हो जाते हैं, तो अन्य स्वस्थ पौधों में फैलने से रोकने के लिए संक्रमित प्याज के पौधे को हटा दें।

हरी प्याज को प्रभावित करने वाले रोग और कीट

    • कभी-कभी हरी प्याज का पौधा डाउनी मिल्ड्यू (Downy mildew) रोग से ग्रस्त हो सकता है। यह समस्या खासकर आर्द्र परिस्थितियों में अधिक प्रभावित करती है। एफिड्स हरी प्याज को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले कीट है। इसके अलावा युवा पौधों पर घोंघे (snail), नेमाटोड और स्लग (slug) के हमले का भी अधिक जोखिम होता है। अतः इन कीटों को नियंत्रित करने के लिए आर्गेनिक पेस्टीसाइड का प्रयोग करें।

लिया गया लेख

About MSPसरकार हर फसल सत्र से पहले CACP यानि (कृषि लागत और प्रक्रिया की सिफ़ारिश पर MSP तय करती है ये एक तरह से किमतों में गिरावट पर किसानो को बचाने वाली बीमा पॉलिसी की तरह काम करती हैClick HereRomanesco Broccoliदुनिया विचित्र चीजों से भरी हुई है, जहाँ हर समय कुछ न कुछ अजीबो गरीब देखने या सुनने को मिलता ही रहता है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी सब्जी के बारे में बताने जा रहें हैं, जो दिखने में सबसे अलग एवं विचित्र है, इस अनोखी दिखने वाली सब्जी का नाम रोमनेस्को ब्रोकली या रोमन फूलगोभी हैClick HereSwiss Chardस्विस चार्ड चुकंदर के परिवार का सदस्य है जिसको उसके चमकीले और रंगीन तनों के लिए जाना जाता है। इसके तने पीला, गुलाबी, लाल, नारंगी और सफेद रंगो के होते हैं। इसके पत्ते और तने दोनों को कच्चा या पकाके खाया जाता है।Click Here
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Lettuce

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  • बुनियादी जानकारी
  • बीज विशिष्टता
  • भूमि की तैयारी एवं मृदा स्वास्थ्य
  • फसल स्प्रे और उर्वरक विशिष्टता
  • निराई एवं सिंचाई
  • कटाई एवं भंडारण
  • रोग

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सलाद पत्ता

बुनियादी जानकारी

सलाद पत्ते को इंग्लिश में Lettuce कहते है आप इसे लेट्टस या लेटस बोल सकते हैं ।यह अक्सर पत्ती की सब्जी के रूप में उगाया जाता है, लेकिन कभी-कभी इसके तने और बीज के लिए भी उगाया जाता है। सलाद पत्ते का उपयोग सलाद के लिए सबसे अधिक किया जाता है, हालांकि यह अन्य प्रकार के भोजन, जैसे सूप, सैंडविच और रैप्स में भी देखा जाता है। यह विटामिन के और क्लोरोफिल का अच्छा स्त्रोत है। लैटस की विभिन्न किस्मों में से गुच्छेदार पत्तों को सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें लोहा, विटामिन ए और सी उचित मात्रा में होते हैं। विश्व में चीन लैटस का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

बीज विशिष्टता

बुवाई का समय : पौधों को आमतौर पर पहले नर्सरी में तैयार किया जाता है। नर्सरी की बुवाई सितंबर से अक्टूबर के महीने में की जाती है और जब फसल रोपाई के लिए तैयार हो जाती है तब वह 5-6 सप्ताह की होती हैं। पहाड़ियों में फरवरी से जून तक रोपाई की जाती है।

दुरी : बीजों का खेत में रोपण करते समय पंक्ति से पंक्ति की दुरी 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे की दुरी  30 सैं.मी. रखें।

बीज की गहराई : बीज को 2-4 सैं .मी. गहराई में बीजना चाहिए।

बुवाई का तरीका : लैटस की बुवाई के लिए पौध रोपण ढंग का प्रयोग किया जाता है।

बीज की मात्रा : एक एकड़ लेटस की खेती के लिए 325 -375 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। चूँकि बीज बहुत बारीक होता है, नर्सरी बेड पर पौधा लगाते हैं। एक ग्राम में लेट्यूस के लगभग 800 बीज होते हैं।

भूमि की तैयारी एवं मृदा स्वास्थ्य

अनुकूल तापमान : लेटस 12 डिग्री सेल्सियस -15 डिग्री सेल्सियस के मासिक औसत तापमान के साथ ठंड बढ़ते मौसम में अच्छी तरह से बढ़ता है। उच्च तापमान पत्तियों में कड़वा स्वाद का कारण बनता है और टिप जलने और सड़ने का कारण हो सकता है। यदि मिट्टी का तापमान 30* C से ऊपर है तो बीज ठीक से अंकुरित नहीं होता है।

भूमि : लेटस की खेती लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, पर यह रेतली दोमट और दानेदार दोमट मिट्टी में अच्छा परिणाम देती है। इसके अलावा मिट्टी में जैविक पदार्थ, नाइट्रोजन और पोटैशियम उच्च मात्रा में होने चाहिए। फसल के अच्छे विकास के लिए मिट्टी का पी एच 6-6.8 तक होना चाहिए। इसकी खेती के लिए पानी ज्यादा रोकने वाली और अम्लीय मिट्टी अच्छी नहीं होती

खेत की तैयारी : लेटस की खेती के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें। पोषक तत्वों का पता करने के लिए मिट्टी की जांच करवाएं। यदि मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी है तो मिट्टी की जांच के आधार पर सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग करें।

फसल स्प्रे और उर्वरक विशिष्टता

खाद एवं रासायनिक उर्वरक : 150-200 क्विंटल / एकड़ खाद को N: P: K (25:25:90) के साथ मिलाकर प्रति एकड़।
रेतीली या रेतीली दोमट मिट्टी: N: P: K (40-50: 75-100: 75-100) प्रति एकड़।
दोमट मिट्टी: -एन: पी: के (25:50:75) प्रति एकड़।

निराई एवं सिंचाई

सिंचाई : उच्च उपज प्राप्त करने और अच्छी गुणवत्ता वाली फसल के लिए बार-बार और हल्की सिंचाई उपयोगी साबित होती है। सिंचाई की विधि-फरो, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई विधि का उपयोग किया जा सकता है। फसल के लिए 8-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई अच्छी होती है।
खरपतवार नियंत्रण : सिंचाई के बाद निराई-गुड़ाई करते हैं तथा घास व खरपतवारों को निकाल देना चाहिए।

कटाई एवं भंडारण

फसल अवधि : हिमखंड लेटस किस्म को विकसित होने में 70-100 दिन लगते हैं।
कटाई : पौध लगाने के लगभग 50-55 दिन बाद आप पहली कटाई कर सकते हैं । इसके लिए बिल्कुल बीच वाले पत्तियों को छोडकर बाहर की पत्तियाँ काट सकते हैं कुछ दिन बाद और पत्तियाँ आ जाएंगी । फसल की कटाई सुबह के समय करनी चाहिए इससे पत्ते ताजे रहेंगे।
कटाई के बाद : कटाई के बाद पत्तों को उनके आकार के अनुसार छंटाई करें। उसके बाद लैटस को बक्सों और डिब्बों में पैक किया जाता है।

सलाद बड़ी नस रोग(lettuce big vein disease)

विवरण : वायरस जो बड़ी शिरा का कारण बनता है वह मिट्टी से होता है और लेट्यूस पौधों में कवक ओ. ब्रासिका द्वारा पेश किया जाता है, जो खुद को लेट्यूस की जड़ों से जोड़ता है। कई कवक के लिए, उच्च मिट्टी की नमी और कम तापमान रोग के प्रसार को बढ़ावा देते हैं। एक बार संक्रमित होने के बाद, मिट्टी कई वर्षों तक कवक को बरकरार रखती है। रोग की गंभीरता हर मौसम में बहुत भिन्न हो सकती है। ठंड के मौसम में बड़ी शिरा रोग अधिक प्रचलित और गंभीर होता है।

जैविक समाधान :
फंगस का सीधे इलाज करना मुश्किल है। सभी संक्रमित पौधों की सामग्री को हटा दें। सभी उपाय जो कमजोर प्रारंभिक जीवन स्तर को दूर करने में मदद करते हैं, सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

रासायनिक समाधान : यदि उपलब्ध हो तो हमेशा जैविक उपचार के साथ निवारक उपायों के साथ एक एकीकृत दृष्टिकोण पर विचार करें। ब्रोमोमेथेन या डैज़ोमेट के घोल पर आधारित फफूंदनाशकों का प्रयोग करें।

bottom rot(नीचे की सड़ांध)

विवरण : रोगज़नक़ लेट्यूस को तापमान की एक विस्तृत श्रृंखला में संक्रमित करता है, लेकिन गर्म (25°C-27°C) नम परिस्थितियों के अनुकूल होता है। राइज़ोक्टोनिया सोलानी एक सामान्य मिट्टी का निवासी है जो कई पौधों की प्रजातियों को संक्रमित कर सकता है। रोगज़नक़ मिट्टी और फसल के मलबे में लेटस फसलों के बीच या वैकल्पिक मेजबानों पर जीवित रहता है। इसे हवाओं या पानी से फैलने वाले बीजाणुओं द्वारा भी खेतों में पेश किया जा सकता है। जीवित मेजबान की अनुपस्थिति में मिट्टी के कार्बनिक पदार्थों को उपनिवेशित करने की क्षमता के कारण कवक मिट्टी में लगभग अनिश्चित काल तक जीवित रहता है।

जैविक समाधान :
सड़ी हुई पत्तियों और पौधों के अवशेषों को तोड़कर जलाकर या दफनाकर नष्ट कर देना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि बीज बोने की सामग्री स्वस्थ है, इसे ५० डिग्री सेल्सियस पर ३० मिनट के लिए पानी से नहलाया जा सकता है।

रासायनिक समाधान : यदि उपलब्ध हो तो हमेशा जैविक उपचार के साथ निवारक उपायों के साथ एक एकीकृत दृष्टिकोण पर विचार करें। इप्रोडायोन या बोस्कलिड के निवारक अनुप्रयोग पौधों और क्यारियों पर या पतले होने के बाद संक्रमण को रोकने में सहायक होते हैं। एज़ोक्सिस्ट्रोबिन युक्त उत्पादों को भी लागू किया जा सकता है, लेकिन लेट्यूस पर बॉटम रोट का रासायनिक उपचार अक्सर अप्रभावी होता है।


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Nano DAP

  • नैनो डीएपी क्या है?
  • डीएपी और नैनो डीएपी में क्या अंतर है?
  • कण आकार
  • उपयोग
  • दक्षता और उठाव
  • पर्यावरणीय प्रभाव
  • नैनो-डीएपी के उपयोग के लाभ
  • नैनो डीएपी के उपयोग के बारे में चिंताएँ
  • अनुशंसित खुराक और प्रयोग की विधियाँ
  • नैनो डीएपी के लिए उपचार के प्रकार
  • नैनो डीएपी के लिए विधियाँ

सभी फसलों के लिए, नैनो डीएपी आसानी से उपलब्ध नाइट्रोजन (एन) और फास्फोरस (पी2ओ5) का एक विश्वसनीय स्रोत है, और यह खड़ी फसलों में नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी के मुद्दों को संबोधित करने में सहायता करता है। नैनो डीएपी फॉर्मूलेशन में फॉस्फोरस (16.0% P 2 O 5 w/v) और नाइट्रोजन (8.0% N w/v) है। नैनो डीएपी (तरल) एक अद्वितीय नैनो उर्वरक है जिसे 2 मार्च, 2023 को एफसीओ (1985) के तहत भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था। यह आदर्श क्षेत्र के तहत 90% से अधिक पोषक तत्व उपयोग दक्षता वाला एक स्वदेशी और गैर-सब्सिडी वाला उर्वरक है। स्थितियाँ। सतह क्षेत्र से आयतन के संदर्भ में नैनो डीएपी का लाभ इसके कणों के आकार में 100 एनएम से कम होने के कारण है। इस विशेष विशेषता के कारण यह आसानी से बीज की सतह, रंध्र और अन्य पौधों के छिद्रों तक पहुँच सकता है। उच्च बीज शक्ति, अधिक क्लोरोफिल, अधिक प्रकाश संश्लेषक दक्षता और उच्च गुणवत्ता वाले बीज पौधे प्रणाली के भीतर उन्नत नैनो डीएपी अवशोषण और प्रसार क्षमता का परिणाम हैं।

नैनो डीएपी क्या है?

डीएपी आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला फॉस्फेट-आधारित उर्वरक है जो अमोनिया को फॉस्फोरिक एसिड के साथ प्रतिक्रिया करके बनाया जाता है, जिसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस होते हैं। नैनो-डीएपी एक नए प्रकार का उर्वरक है जो इन पोषक तत्वों को वितरित करने के लिए नैनो कणों का उपयोग करता है। इसे कृषि के लिए अधिक कुशल, लागत कम करने और अधिक टिकाऊ बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

डीएपी और नैनो डीएपी में क्या अंतर है?

डीएपी (डि-अमोनियम फॉस्फेट)(Di-ammonium Phosphate)और नैनो डीएपी (नैनोटेक्नोलॉजी-आधारित डायअमोनियम फॉस्फेट) दोनों कृषि में उपयोग किए जाने वाले उर्वरक हैं, लेकिन वे अपने कण आकार और संभावित लाभों के मामले में भिन्न हैं।

कण आकार

  • डीएपी : डायमोनियम फॉस्फेट एक पारंपरिक उर्वरक है जिसमें बड़े दाने या कण होते हैं। ये कण आमतौर पर 1-4 मिलीमीटर आकार के होते हैं।
  • नैनो डीएपी : नैनो डीएपी, जैसा कि नाम से पता चलता है, डीएपी का नैनोटेक्नोलॉजी-आधारित संस्करण है। इसमें बहुत छोटे कण होते हैं, आमतौर पर नैनोस्केल पर, जिनका आकार 1-100 नैनोमीटर के क्रम का होता है।

उपयोग

  • डीएपी: पारंपरिक डीएपी समय के साथ अपने पोषक तत्वों (नाइट्रोजन और फास्फोरस) को अपेक्षाकृत धीरे-धीरे जारी करता है क्योंकि कण मिट्टी में टूट जाते हैं। यह पौधों को लंबे समय तक पोषक तत्वों की निरंतर आपूर्ति प्रदान करता है।
  • नैनो डीएपी: नैनो डीएपी को इसके छोटे कण आकार के कारण पोषक तत्व जारी करने के गुणों को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नैनोस्केल कणों का सतह क्षेत्र बड़ा होता है, जो पारंपरिक डीएपी की तुलना में संभावित रूप से तेजी से पोषक तत्व जारी कर सकता है। यह तेजी से पोषक तत्व जारी होने से पौधों की तेजी से वृद्धि और बेहतर पोषक तत्व ग्रहण को बढ़ावा मिल सकता है।

दक्षता और उठाव

  • डीएपी: पारंपरिक डीएपी में पौधों द्वारा पोषक तत्व ग्रहण करने की दर धीमी हो सकती है क्योंकि यह बड़े दानों से पोषक तत्व जारी करने के लिए माइक्रोबियल और मिट्टी प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।
  • नैनो डीएपी: नैनो डीएपी अपने छोटे कण आकार के कारण पौधों द्वारा बेहतर पोषक तत्वों की उपलब्धता और ग्रहण की पेशकश कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से बेहतर फसल की पैदावार और पोषक तत्व उपयोग दक्षता हो सकती है।

पर्यावरणीय प्रभाव

  • डीएपी: पारंपरिक डीएपी पोषक तत्वों के अपवाह और लीचिंग से जुड़ा हो सकता है, जो अगर ठीक से प्रबंधित नहीं किया गया तो जल प्रदूषण में योगदान कर सकता है।
  • नैनो डीएपी: नैनो डीएपी जैसे नैनो-उर्वरक के उपयोग का पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर नैनोकणों का व्यवहार और प्रभाव अभी भी अनुसंधान और चिंता का विषय है।

नैनो-डीएपी के उपयोग के लाभ

  • नैनो-डीएपी के उपयोग के विभिन्न फायदे हैं:

    1. सब्सिडी का बोझ और उर्वरक पर आयात निर्भरता कम हो गई है। अपनी बेहतर उपयोग-दक्षता के कारण, नैनो-डीएपी सरकार को उर्वरक सब्सिडी का बोझ कम करने में मदद कर सकता है। इसका मतलब यह भी है कि उर्वरक आयात पर निर्भरता कम हो जाएगी।
    2. इनपुट लागत में कमी नैनो-डीएपी कृषि इनपुट लागत में कटौती करने में मदद कर सकता है, जिससे किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।
    3. बेहतर कृषि स्थिरता, पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाकर, पानी का उपयोग कम करके और पर्यावरणीय नुकसान में कटौती करके, नैनो-डीएपी कृषि स्थिरता को बढ़ा सकता है।

    कृषि लाभ बढ़ाने के लिए नैनो-डीएपी को अन्य नैनो-उर्वरक जैसे नैनो-यूरिया, नैनो-पोटाश, नैनो-जिंक और नैनो-कॉपर के साथ भी जोड़ा जा सकता है।

नैनो डीएपी के उपयोग के बारे में चिंताएँ

  • हालाँकि नैनो-डीएपी को नियोजित करने के कुछ फायदे हैं, लेकिन कुछ कमियाँ हैं:

    • मिट्टी और फसलों में नैनोकणों की सांद्रता में वृद्धि, नैनो-डीएपी के निरंतर उपयोग के परिणामस्वरूप मिट्टी और फसलों में नैनोकणों की मात्रा में वृद्धि हो सकती है, जिसके पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर अनिश्चित परिणाम हो सकते हैं।
    • स्वास्थ्य जोखिम जब नैनो-आकार के कण अत्यधिक संख्या में मौजूद होते हैं, तो वे किसी के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं। परिणामस्वरूप, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि नैनो-डीएपी का उपयोग करते समय किसान और उपभोक्ता सुरक्षित हों।

अनुशंसित खुराक और प्रयोग की विधियाँ

इष्टतम नैनो डीएपी की खुराक :-

  •  नैनो डीएपी की उचित खुराक कई मापदंडों द्वारा निर्धारित की जाती है:
  1. फसल का प्रकार
  2. मिट्टी की स्थिति
  3. पोषक तत्व आवश्यकताएँ

बीज या जड़ उपचार के रूप में नैनो डीएपी तरल के उपयोग और महत्वपूर्ण विकास चरणों में एक से दो पर्ण स्प्रे के परिणामस्वरूप पारंपरिक डीएपी आवेदन फसलों में 50-75% की कमी हो सकती है।

नैनो डीएपी के लिए उपचार के प्रकार

  • बीज उपचार: इसे बीज की सतह पर एक पतली फिल्म बनाने के लिए आवश्यक मात्रा में पानी में घोलकर 3-5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम (0.03-0.07 औंस/पौंड) बीज पर इस्तेमाल किया जा सकता है। 20-30 मिनट के लिए छोड़ दें; इसे छाया में सुखाकर बोयें।
  • अंकुर/कंद/सेट उपचार: 3-5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में डाला जा सकता है। इसे छाया में सुखा लें और फिर इसकी रोपाई करें.
  • पर्ण स्प्रे: इसका उपयोग अच्छी पर्ण अवस्था में 2-4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में किया जा सकता है। फूल आने से पहले के चरण में एक अतिरिक्त स्प्रे लंबे समय तक और उच्च फास्फोरस की आवश्यकता वाली फसलों पर लगाया जा सकता है। अधिक फास्फोरस की आवश्यकता वाली फसलों में बेहतर प्रतिक्रिया के लिए फूल आने से पहले/कल्ले निकलने के चरण में दूसरा पर्ण स्प्रे लगाएं ।

नैनो डीएपी के लिए विधियाँ
(*नैनो डीएपी बोतल का एक ढक्कन = 25 मिली)

  • नैनो डीएपी (तरल): इसका उपयोग प्रति स्प्रे 250 मिलीलीटर – 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ (0.6 से 1.2 लीटर प्रति हेक्टेयर) किया जा सकता है।
    नैपसेक स्प्रेयर: प्रति 15-16-लीटर (3.9-4.1 गैलन) टैंक में 2-3 कैप (50-75 मिली) (1.6-2.5 औंस) नैनो डीएपी तरल; 8-10 टैंक आम तौर पर 1 एकड़ फसल क्षेत्र को कवर करते हैं।
    बूम/पावर स्प्रेयर:  प्रति 20-25-लीटर (5.2-6.6 गैलन) टैंक में 3-4 कैप (75-100 मिली) (2.5-3.4 औंस) नैनो डीएपी; 4-6 टैंक आम तौर पर 1 एकड़ फसल क्षेत्र को कवर करते हैं।
    ड्रोन:  1 एकड़ क्षेत्र को कवर करने के लिए 10-20 लीटर (2.6-5.2 गैलन) मात्रा के प्रति टैंक में 250 -500 मिलीलीटर (8-16 औंस) नैनो डीएपी तरल।

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