टमाटर (Tomato)

भूमि: टमाटर की खेती अलग-अलग तरह की मिट्टी पर की जा सकती है | इसके लिए रेतीली दोमट से लेकर चिकनी मिट्टी, लाल और काली मिट्टी तक पर खेती की जा सकती है |अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए। यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है। ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें। अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है।

तापमान: इसके अच्छे उत्पादन के लिए 21 से 23 डिग्री सेल्सियस तक तापमान होना चाहिए।

उचित समय: उत्तरी राज्यों में, बसंत के समय टमाटर की पनीरी नवंबर के आखिर में बोयी जाती है और जनवरी के दूसरे पखवाड़े में खेत में लगाई जाती है। पतझड़ के समय पनीरी की बिजाई जुलाई-अगस्त में की जाती है और अगस्त-सितंबर में यह खेत में लगा दी जाती है। पहाड़ी इलाकों में इसकी बिजाई मार्च-अप्रैल में की जाती है और अप्रैल-मई में यह खेत में लगा दी जाती है|

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Thrips (तेला)

आजकल बदलते मौसम में तेला का प्रकोप बढ़ता जा रहा है | तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

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आलू (Potato)

भूमि: आलू की खेती में कार्बनिक तत्वों से भरपूर उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है | इसकी खेती के लिए उचित जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है | सामान्य P.H. मान वाली भूमि में इसकी खेती आसानी से की जा सकती है | समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय जलवायु आलू की फसल के लिए उचित मानी जाती है | भारत में इसकी खेती सर्दियों के मौसम में की जाती है, किन्तु सर्दियों में गिरने वाला पाला इसके पौधों को हानि पहुँचाता है |

तापमान: इसके लिए दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक होनी चाहिए। वहीं कंद बनने के समय 20 से 25 डिग्री सेल्सियस ज्यादा नहीं होनी चाहिए। क्योंकि इससे ज्यादा तापमान होने पर कंदों का विकास रूक जाता है।

उचित समय: 20 सितम्बर से 05 नवम्बर के बीच का समय बढ़िया माना जाता है |

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प्याज (Onion)

भूमि: प्याज की खेती विभिन्न प्रकार की मृदाओं में की जा सकती है,प्याज की खेती के लिए उचित जलनिकास एवं जीवांषयुक्त उपजाऊ दोमट तथा वलूई दोमट भूमिजिसका पी.एच. मान 6.5-7.5 के मध्य हो सर्वोत्तम होती है, प्याज को अधिक क्षारीय या दलदली मृदाओं में नही उगाना चाहिए।

तापमान: इसके अच्छे उत्पादन के लिए 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तक तापमान होना चाहिए।

उचित समय: 15 नवम्बर से 15 दिसम्बर के बीच का समय बढ़िया माना जाता है |

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चावल(Rice)

भूमि: धान की खेती के लिए अधिक जलधारण क्षमता वाली मिटटी जैसे- चिकनी, मटियार या मटियार-दोमट मिटटी प्रायः उपयुक्त होती हैं| धान की खेती के लिए चिकनी काली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती हैं. क्योंकि चिकनी मिट्टी में जल धारण की क्षमता अधिक होती हैं. इस तरह की मिट्टी में एक बार पानी देने के बाद कई दिनों तक पानी भरा रहता है. भारत में इसकी खेती उत्तर से लेकर दक्षिण भारत के ज्यादातर राज्यों में की जा रही है. धान की खेती के लिए जमीन का पी.एच. मान 5.5 से 6.5 तक होना चाहिए. हालांकि इससे कम और ज्यादा पी.एच. वाली जमीनों को उपचारित कर उनमें भी इसकी खेती की जा रही है|

तापमान: धान को उन सभी क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है, जहां 4 से 6 महीनों तक औसत तापमान 21 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक रहता है| फसल की अच्छी बढ़वार के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तथा पकने के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है| रात्रि का तापमान जितना कम रहे, फसल की पैदावार के लिए उतना ही अच्छा है| लेकिन 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरना चाहिए|

उचित समय: इसके लिए मानसून का सीजन प्रारम्भ होने से दो हफ्ते पहले यानि 15-20 जून तक बुवाई कर देनी चाहिए |

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