आजकल बदलते मौसम में तेला का प्रकोप बढ़ता जा रहा है | तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

लक्षण

तेला व चेपा रोग के जिम्मेवार छोटे-छोटे कीट होते हैं जिन्हें ऐफिड व थ्रीपंस नाम दिया गया है। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि तेला के कीट काले रंग के होते हैं तथा चेपा के कीट हरे रंग के होते हैं तो करके इन्हे काला तेला और हरा तेला का नाम दिया जाता है। ये कीट गेहूं की फसल में बालियों पर, चना, ग्वार, सरसों अथवा फलीदार पोधों की फलियों पर होते है। जिस फसल में इनका प्रभाव होता है उस फसल के पत्ते चिपचिपे व तेलिए तथा काले रंग के होने शुरू हो जाते हैं।

जीवन चक्र

इस कीट का प्रजनन सारा साल चलता रहता है। इसकी संख्या गर्मी के मौसम में ज्यादा बढती है। अंडे पत्तियों की निचली सतह पर दिए जाते हैं या पतियों की सतह में घाव बनाकर अंडे दिए जाते है जिससे इन तक किटनासक पहुँच पाना मुस्किल होता है| 8 से 18 दिन के बाद, इन अण्डों से बच्चे निकलते है। इनके जीवन चक्र की कड़ी इस प्रकार से है

अंडा->लार्वा की प्रथमावस्था,->पूर्णविकसित लार्वा->प्यूपा की प्रथमावस्था->प्यूपा की अंतिम अवस्था->सिर का पार्श्व भाग->वयस्क थाइसेनोप्टेरा

इससे होने वाले नुकसान

ये फसल को दो तरह से नुकसान पहुंचाते हैं।

एक तो रस चूसने की वजह से, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है।

दूसरा पत्तियों पर चिपचिपा पदार्थ छोडऩे की वजह से, जिस पर काली फफूंद उग जाती है। जो कि पौधे के भोजन बनाने की प्रक्रिया में बाधा डालती है। यह कीट पत्ता मरोडिय़ा रोग फैलाने में भी सहायक है। जिनसे पौधे की बढ़वार रुक जाती है | दूसरा ये फलियों में से रस चूसते है जिससे दाना कमजोर होता है और उत्पादन कम होता है।

इसकी रोकथाम के उपाय

घरेलु उपचार के रूप में :

  1. गौ मूत्र को 5 से 10 गुना पानी मिलाकर छिढ़काव करें |
  2. 2 लीटर लस्सी को 30 लीटर पानी में मिलाकर छिढ़काव करें |
  3. नीम के तेल का छिढ़काव करें |

रासायनिक विधि से इसका उपचार करने के लिए 500 मिलीलीटर एंडोसल्फान 35 ईसी, चार सौ मिलीलटर मैलाथियान 50 ईसी, या फिर कंफीडोर का प्रयोग 250 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। इमिडाक्लोरोफाइड की 100 मिली लीटर की कीटनाशक दवा का छिड़काव पानी के साथ करें। दवा के छिड़काव में 150 से 200 लीटर पानी का प्रयोग करना चाहिए।

सावधानियां

  1. तेज हवा या बारिश के टाइम स्प्रे न करें|
  2. आँखों की सुरक्षा करें |
  3. स्प्रे के बाद अपना हाथ, पैर और चेहरा अच्छी तरह से धोएं |
  4. बच्चों की पहुच से दूर रखें |