गाजर (Carrot)

भूमि: गाजर की जड़ों के अच्छे विकास के लिए गहरी, नर्म और चिकनी मिट्टी की जरूरत होती है। बहुत ज्यादा भारी और ज्यादा नर्म मिट्टी गाजरों की फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती । अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 5.5 से 7 होनी चाहिए। (अच्छी पैदावार के लिए 6.5 पी एच लाभदायक होती है) |

तापमान: गाजर की बिजाई के लिए मुख्यतया 10-25 डिग्री C तापमान होना चाहिए |

उचित समय: अक्टूबर में बिजाई का समय बढ़िया माना जाता है |

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White Flies (सफ़ेद मक्खी)

आजकल कपास, ग्वार इत्यादी में सफ़ेद मक्खी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है | तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

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ज्वार (Sorghum)

भूमि: ज्वार विश्व की एक मोटे अनाज वाली महत्वपूर्ण फसल है| ज्वार की फसल को किसी भी प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है | किन्तु अधिक मात्रा में उत्पादन प्राप्त करने के लिए खेती उचित जल निकासी वाली चिकनी मिट्टी में करे | इसकी खेती में भूमि का P.H. मान 5 से 7 के मध्य होना चाहिए | इसकी खेती खरीफ की फसल के साथ की जाती है | उस दौरान गर्मी का मौसम होता है, गर्मियों के मौसम में उचित मात्रा में सिंचाई कर अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है |

तापमान: ज्वार की बिजाई के लिए मुख्यतया 25-30 डिग्री C तापमान होना चाहिए |

उचित समय: 1 अप्रैल से 30 अप्रैल के बिच का समय बढ़िया माना जाता है |

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Locust (टिड्डी)

आजकल कपास, ग्वार इत्यादी में टिड्डी आने का खतरा बना रहता है | तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

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तोरिया/लाही (Toriya)

भूमि: तोरिया लगभग सभी प्रकार की कृषि योग्य भूमि में पैदा हो सकती है | लाही की खेती के लिए उचित जल निकासी वाली हल्की रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. इसके अलावा इसे और भी कई तरह की भूमि में उगा सकते हैं |

तापमान: सरसों की बिजाई के लिए मुख्यतया 25-35 डिग्री C तापमान होना चाहिए |

उचित समय: 1 सितम्बर से 30 सितम्बर के बिच का समय बढ़िया माना जाता है |

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