लौकी (Bottle Gourd)

भूमि: देश में लौकी की खेती को किसी भी क्षेत्र में सफलतापूर्वक की जा सकती है। इसकी खेती उचित जल निकासी वाली जगह पर किसी भी तरह की भूमि में की जा सकती है। किन्तु उचित जल धारण क्षमता वाली जीवाश्म युक्त हल्की दोमट भूमि इसकी सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गयी है। लौकी की खेती में भूमि का पी.एच मान 6 से 7 के मध्य होना चाहिए।

तापमान: लौकी की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु की जरुरत होती है। बीज अंकुरण के लिए 30 से 35 डिग्री सेन्टीग्रेड और पौधों की बढ़वार के लिए 32 से 38 डिग्री सेन्टीग्रेड तापमान सबसे अच्छी होता है।

उचित समय: जायद, खरीफ, रबी सीजन में लौकी की फसल ली जाती है। जायद की बुवाई मध्य जनवरी, खरीफ मध्य जून से प्रथम जुलाई तक और रबी सितंबर अंत से अक्टूबर के पहले सप्ताह तक लौकी की खेती की जाती है|

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पत्तागोभी (Cabbage)

भूमि: गोभी की खेती के लिये सभी प्रकार की अच्छे जल निकास वाली भूमि उपयुक्त होती है, परंतु हल्की एवं दोमट मिट्टी जिसका जल निकास अच्छा हो तथा पी. एच. 5.5 से 6.8 हो अधिक उपयुक्त होती है | अम्लीय भूमि में गोभी की खेती अच्छी नही होती हैं |

तापमान: इसके अच्छे उत्पादन के लिए 12 से 30 डिग्री सेल्सियस तक तापमान होना चाहिए।

उचित समय: पत्ता गोभी की अगेती खेती के लिए अगस्त के अंतिम सप्ताह सितम्बर मध्य तक नर्सरी में बीज की बुवाई कर देनी चाहिए| मध्यम एवं पछेती किस्मों लिए 15 सितम्बर से अक्टूबर अंत तक बीज की बुवाई कर देनी चाहिए| बीज की बुवाई यदि समय पर की जाती है तो इसका सीधा प्रभाव उपज पर देखने को मिलता है|

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फूलगोभी(Cauliflower)

भूमि: फूलगोभी की खेती दोमट मिट्टी पर अच्छे से की जाती है | हालांकि उच्च नमी धारण क्षमता वाली मिट्टी को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि पानी की कमी से पौधे के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है | बरसात के मौसम में, तेजी से सूखने वाली मिट्टी को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि कटाई का कार्य आसानी से किया जा सके | वहीं यह उच्च अम्लता के प्रति संवेदनशील होती है | इसकी खेती से अधिकतम उत्पादन के लिए मिट्टी की पीएच 5.5 से 6.0  होना चाहिए |

तापमान: इसके अच्छे उत्पादन के लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तक तापमान होना चाहिए।

उचित समय: फूल गोभी की खेती आप बरसात के बाद सितंबर से अक्टूबर तक कर सकते हैं। फूलगोभी की अगेती खेती के लिए आप नर्सरी की तैयारी सितंबर में कर लें। पिछेती खेती के लिए आप नवंबर तक कर सकते हैं।

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मटर (Pea)

भूमि: मटर  की खेती विभिन्न प्रकार की मृदाओं में की जा सकती है, फिर भी गंगा के मैदानी भागों की गहरी दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी रहती है। इसकी खेती के लिए मटियार दोमट और दोमट भूमि सबसे उपयुक्त होती है। जिसका पीएच मान 6-7.5 होना चाहिए। इसकी खेती के लिए अम्लीय भूमि सब्जी वाली मटर की खेती के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं मानी जाती है।

तापमान: इसके अच्छे उत्पादन के लिए 10 से 25 डिग्री सेल्सियस तक तापमान होना चाहिए।

उचित समय: मटर की बुआई मध्य अक्तूबर से नवम्बर तक की जाती है जो खरीफ की फसल की कटाई पर निर्भर करती है। फिर भी बुआई का उपयुक्त समय अक्तूबर के आखिरी सफ्ताह से नवम्बर का प्रथम सप्ताह है।

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Lumpy Skin Disease(गाँठदार त्वचा रोग)

भारत में पिछले एक महीने के दौरान लंपी स्किन डिजीज की वजह से काफी ज्यादा पालतू पशुओं की मौत हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर गायें हैं। ये जानलेवा वायरस से गुजरात, राजस्थान और पंजाब समेत अन्य राज्यों में मवेशियों की जान ले रहा है। लंपी वायरस की वजह से अकेले गुजरात में रोज करीब एक लाख लीटर दूध का प्रोडक्शन घट गया है। तो आइये जानते है इसके  लक्षण, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

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