खीरा (Cucumber)

भूमि: खीरे को रेतीली दोमट व भारी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है, लेकिन इसकी खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली बलुई एवं दोमट मिट्टी में अच्छी रहती है। खीरे की खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 6-7 के बीच होना चाहिए। इसकी खेती उच्च तापमान में अच्छी होती है।

तापमान: इसके लिए 25-35 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: टिंडा की खेती साल में दो बार की जा सकती है। इसे फरवरी से मार्च और जून से जुलाई तक इसकी बुवाई कर सकते हैं।

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जई(Jaee)

भूमि : जई सभी प्रकार की कृषि योग्य भूमि में पैदा हो सकती है | यह हर तरह की मिट्टी में उगाई जाती है। अच्छे जल निकास वाली चिकनी रेतली मिट्टी, जिस में जैविक तत्व हों, जई की खेती के लिए उचित मानी जाती है। जई की खेती के लिए 5-6.6 पी एच वाली मिट्टी बढ़िया होती है।

तापमान : जई की बिजाई के लिए मुख्यतया 20-25 डिग्री C तापमान होना चाहिए।

उचित समय : 20 अक्टूबर से 10 नवम्बर के बिच का समय बढ़िया माना जाता है।

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बैंगन (Brinjal)

भूमि: इसकी खेती अच्छे जल निकास युक्त सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है। बैंगन की अच्छी उपज के के लिए, बलुई दोमट से लेकर भारी मिट्टी जिसमें कार्बिनक पदार्थ की पर्याप्त मात्रा हो, उपयुक्त होती है। भूमि का पी.एच मान 5.5-6.0 की बीच होना चाहिए तथा इसमें सिंचाई का उचित प्रबंध होना आवश्यक है। झारखण्ड की उपरवार जमीन बैंगन की खेती के लिए उपयुक्त पायी गई है।

तापमान: इसके लिए 21 से 30° के औसत तापमान की आवश्यकता होती है ।

उचित समय: पहली फसल के लिए अक्तूबर में पनीरी बोयें ताकि जो नवंबर तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये।

दूसरी फसल के लिए नवंबर में पनीरी बोयें ताकि जो फरवरी के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये।

तीसरी फसल के लिए फरवरी मार्च में पनीरी बोयें ताकि जो अप्रैल के आखिर से पहले ही पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये।

चौथी फसल के लिए जुलाई में पनीरी बोयें ताकि जो अगस्त तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये।

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खरबूज (Melon)

भूमि: खरबूजे की खेती के लिए हल्की रेतीली बलुई दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है। इसकी खेती के लिए भूमि उचित जल निकास वाली होनी चाहिए, क्योकि जलभराव की स्थिति में इसके पौधों पर अधिक रोग देखने को मिल जाते है। इसकी खेती में भूमि का पी.एच मान 6 से 7 के मध्य होना चाहिए। जायद के मौसम को खरबूजे की फसल के लिए अच्छा माना जाता है। इस दौरान पौधों को पर्याप्त मात्रा में गर्म और आद्र जलवायु मिल जाती है।

तापमान: बीजों के अंकुरण के लिए 22-25 डिग्री सेटीग्रेड तापमान अच्छा रहता है। पौधों के विकास के लिए 35 से 40 डिग्री तापमान जरूरी होता है।

उचित समय: फ़रवरी  मध्य के आसपास का समय खरबूजे की बिजाई के लिए ज्यादा उचित समझा जाता है।

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तरबूज (Watermelon)

भूमि: तरबूजे की खेती के लिए अधिक तापमान वाली जलवायु सबसे अच्छी मानी जाती है। अधिक तापमान से फलों की वृद्धि अधिक होती है। अब बात करें इसकी खेती के लिए मिट्टी की तो रेतीली और रेतीली दोमट भूमि इसके लिए सबसे अच्छी रहती है। वहीं मिट्टी का पी. एच. मान 5.5-7.0 के बीच होना चाहिए। बता दें कि इसकी खेती अनुपजाऊ या बंजर भूमि में भी की जा सकती है।

तापमान: बीजों के अंकुरण के लिए 22-25 डिग्री सेटीग्रेड तापमान अच्छा रहता है।

उचित समय: सामान्य रूप से जनवरी  से मार्च के में इसकी बुवाई की जाती है परन्तु फ़रवरी  मध्य के आसपास समय ज्यादा उचित समझा जाता है।

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