आजकल कपास, ग्वार इत्यादी में सफ़ेद मक्खी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है | तो आइये जानते है इसके लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-
लक्षण
किसान भाइयों जैसा कि आप देख रहे होंगे की बारिश के बाद तापमान लगातार बढ़ा हुआ है। यह मौसम सफेद-मक्खी के लिए बहुत अनुकूल है हमारी कपास (या नरमा) अब सफेद-मक्खी के प्रभाव में आ सकती है। सफ़ेद मक्खी को अंग्रेजी में वाइट फ्लाई के नाम से जाना जाता है। सफेद मक्खी छोटा सा तेज उडऩे वाला पीले शरीर और सफेद पंख का कीड़ा है। छोटा एवं हल्के होने के कारण ये कीट हवा द्वारा एक से दूसरे स्थान तक आसानी से चले जाते हैं। इस कीट के शिशु और प्रौढ़ दोनो ही पत्तियों की निचली सतह पर रहकर रस चूसते हैं। प्रौढ़ 1-1.5 मि.मी. लम्बे, सफेद पंखों व पीले शरीर वाले होते हैं। जबकि शिशु हल्के पीले, चपटे होते हैं।
जीवन चक्र
इस कीट का प्रजनन सारा साल चलता रहता है। इस कीट की प्रौढ़ मादा अपने जीवन काल में सौ से सवासौ अंडे देती है। अंडे पत्तियों की निचली सतह पर दिए जाते हैं पाँच से छ: दिन के बाद, इन अण्डों से बच्चे निकलते है। अंडे का आकार इंच का तीसवां हिस्सा ही होता है, ये अंडे रस चूसने का सही स्थान ढूंढने के लिए ही नाममात्र को चलते है, फ़िर एक ही जगह पड़े पड़े रस चूसते रहते हैं। पॉँच छ: दिन की इस प्रक्रिया के बाद ये अंडे स्यूडो प्यूपा में तब्दील हो जाते हैं। एक सप्ताह में ही स्यूडो प्यूपा प्रौढ़ के रूप में विकसित हो जाते है। इनका प्रौढिय जीवन आमतौर पर बीस इक्कीस दिन का होता है|
इससे होने वाले नुकसान
ये फसल को दो तरह से नुकसान पहुंचाते हैं।
एक तो रस चूसने की वजह से, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है। दूसरा पत्तियों पर चिपचिपा पदार्थ छोडऩे की वजह से, जिस पर काली फफूंद उग जाती है। जो कि पौधे के भोजन बनाने की प्रक्रिया में बाधा डालती है। यह कीट कपास में मरोडिय़ा रोग फैलाने में भी सहायक है। इसका प्रकोप अगस्त-सितंबर मास में ज्यादा होता है। जिनसे पौधे की बढ़वार रुक जाती है और इसका असर उत्पादन पर पड़ता है।
इसकी रोकथाम के उपाय
घरेलु उपचार के रूप में इसकी रोकथाम के लिए मुश्क कपूर 100 ग्राम को हल्के गर्म पानी में घोलकर और फिर 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड में स्प्रे करें। इसके इलावा इसकी रोकथाम के लिए आप हींग 100 ग्राम जो कि गोंद के रूप में हो, उसे गर्म पानी में घोलकर, फिर 100-130 लीटर पानी में मिलाकर भी प्रति एकड़ में स्प्रे कर सकते हैं। इन विधियों के द्वारा सफेद मक्खी की रोकथाम की जा सकती है। इसके अलावा एक लीटर नीम के तेल को 200 लीटर पानी में मिलाकर इसका छिड़काव करे तो सफेद मक्खी के प्रकोप को समाप्त किया जा सकता है।
रासायनिक विधि से इसका उपचार करने के लिए 80 ग्राम प्रति एकड़ की दर से फ्लोनिकामिड उलाला नामक दवाई या सुमीटोमो केमिकल का “लेनो” 500 ML प्रति एकड़ के हिसाब से 1500 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें | ज्यादा अच्छे रिजल्ट के लिए 2 स्प्रे 15 दिनों के अन्तराल पर करें |
सावधानियां
- तेज हवा या बारिश के टाइम स्प्रे न करें|
- आँखों की सुरक्षा करें |
- स्प्रे के बाद अपना हाथ, पैर और चेहरा अच्छी तरह से धोएं |
- बच्चों की पहुच से दूर रखें |

