आलू (Potato)

भूमि: आलू की खेती में कार्बनिक तत्वों से भरपूर उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है | इसकी खेती के लिए उचित जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है | सामान्य P.H. मान वाली भूमि में इसकी खेती आसानी से की जा सकती है | समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय जलवायु आलू की फसल के लिए उचित मानी जाती है | भारत में इसकी खेती सर्दियों के मौसम में की जाती है, किन्तु सर्दियों में गिरने वाला पाला इसके पौधों को हानि पहुँचाता है |

तापमान: इसके लिए दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक होनी चाहिए। वहीं कंद बनने के समय 20 से 25 डिग्री सेल्सियस ज्यादा नहीं होनी चाहिए। क्योंकि इससे ज्यादा तापमान होने पर कंदों का विकास रूक जाता है।

उचित समय: 20 सितम्बर से 05 नवम्बर के बीच का समय बढ़िया माना जाता है |

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प्याज (Onion)

भूमि: प्याज की खेती विभिन्न प्रकार की मृदाओं में की जा सकती है,प्याज की खेती के लिए उचित जलनिकास एवं जीवांषयुक्त उपजाऊ दोमट तथा वलूई दोमट भूमिजिसका पी.एच. मान 6.5-7.5 के मध्य हो सर्वोत्तम होती है, प्याज को अधिक क्षारीय या दलदली मृदाओं में नही उगाना चाहिए।

तापमान: इसके अच्छे उत्पादन के लिए 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तक तापमान होना चाहिए।

उचित समय: 15 नवम्बर से 15 दिसम्बर के बीच का समय बढ़िया माना जाता है |

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चावल(Rice)

भूमि: धान की खेती के लिए अधिक जलधारण क्षमता वाली मिटटी जैसे- चिकनी, मटियार या मटियार-दोमट मिटटी प्रायः उपयुक्त होती हैं| धान की खेती के लिए चिकनी काली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती हैं. क्योंकि चिकनी मिट्टी में जल धारण की क्षमता अधिक होती हैं. इस तरह की मिट्टी में एक बार पानी देने के बाद कई दिनों तक पानी भरा रहता है. भारत में इसकी खेती उत्तर से लेकर दक्षिण भारत के ज्यादातर राज्यों में की जा रही है. धान की खेती के लिए जमीन का पी.एच. मान 5.5 से 6.5 तक होना चाहिए. हालांकि इससे कम और ज्यादा पी.एच. वाली जमीनों को उपचारित कर उनमें भी इसकी खेती की जा रही है|

तापमान: धान को उन सभी क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है, जहां 4 से 6 महीनों तक औसत तापमान 21 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक रहता है| फसल की अच्छी बढ़वार के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तथा पकने के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है| रात्रि का तापमान जितना कम रहे, फसल की पैदावार के लिए उतना ही अच्छा है| लेकिन 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरना चाहिए|

उचित समय: इसके लिए मानसून का सीजन प्रारम्भ होने से दो हफ्ते पहले यानि 15-20 जून तक बुवाई कर देनी चाहिए |

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गाजर (Carrot)

भूमि: गाजर की जड़ों के अच्छे विकास के लिए गहरी, नर्म और चिकनी मिट्टी की जरूरत होती है। बहुत ज्यादा भारी और ज्यादा नर्म मिट्टी गाजरों की फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती । अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 5.5 से 7 होनी चाहिए। (अच्छी पैदावार के लिए 6.5 पी एच लाभदायक होती है) |

तापमान: गाजर की बिजाई के लिए मुख्यतया 10-25 डिग्री C तापमान होना चाहिए |

उचित समय: अक्टूबर में बिजाई का समय बढ़िया माना जाता है |

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White Flies (सफ़ेद मक्खी)

आजकल कपास, ग्वार इत्यादी में सफ़ेद मक्खी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है | तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

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