धनिया(Coriander)

भूमि: धनिया की सिंचित फसल के लिये अच्छा जल निकास वाली अच्छी दोमट भूमि सबसे अधिक उपयुक्त होती है और असिंचित फसल के लिये काली भारी भूमि अच्छी होती है। धनिया क्षारीय एवं लवणीय भूमि को सहन नही करता है। अच्छे जल निकास एवं उर्वरा शक्ति वाली दोमट या मटियार दोमट भूमि उपयुक्त होती है। मिट्‌टी का पी.एच. 6.5 से 7.5 होना चाहिए।

तापमान: इसके लिए 20-30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: धनिया की फसल रबी मौसम में बोई जाती है । धनिया बोने का सबसे उपयुक्त समय 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर है ।

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पालक(Spinach)

भूमि: पालक औसत मिट्टी में अच्छी तरह से उग सकता है, लेकिन जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टी में यह ज्यादा अच्छे से विकसित होगा। आमतौर पर, पालक उगाते समय मिट्टी का प्रकार और पीएच शायद ही कभी प्रतिबंधी कारक बनते हैं। पालक को मिट्टी की कई किस्मों जो अच्छे जल निकास वाली होती हैं, में उगाया जाता है| पर यह रेतली चिकनी और जलोढ़ मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है। तेजाबी और जल जमाव वाली मिट्टी में पालक की खेती करने से बचाव करें। इसके लिए मिट्टी का pH 6 से 7 होना चाहिए। 

तापमान: इसके लिए 20-30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: उपयुक्त वातावरण में पालक की बुवाई वर्ष भर की जा सकती है। पालक की फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए बुवाई जनवरी-फरवरी, जून-जुलाई और सितम्बर-अक्टूबर में की जा सकती है  पर अगस्त से दिसंबर का समय बिजाई के लिए उचित होता है, जिससे पालक की अच्छी पैदावार प्राप्त होती है।

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टिंडा (Apple Gourd)

भूमि: इसकी खेती कई प्रकार की भूमि में कर सकते हैं, लेकिन बलुई दोमट या दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है | फसल की अधिक उपज और गुणवत्ता के लिए भूमि का पी.एच.मान 6.0-7.0 के बीच होना चाहिए |  टिंडे की खेती नदी तटों की मिट्टी में भी की जा सकती है | अच्छी जलधारण क्षमता वाली जीवांशयुक्त हल्की दोमट भूमि इसकी खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। 

तापमान: इसके लिए 10-30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: टिंडा की खेती साल में दो बार की जा सकती है। इसे फरवरी से मार्च और जून से जुलाई तक इसकी बुवाई कर सकते हैं।

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लौकी (Bottle Gourd)

भूमि: देश में लौकी की खेती को किसी भी क्षेत्र में सफलतापूर्वक की जा सकती है। इसकी खेती उचित जल निकासी वाली जगह पर किसी भी तरह की भूमि में की जा सकती है। किन्तु उचित जल धारण क्षमता वाली जीवाश्म युक्त हल्की दोमट भूमि इसकी सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गयी है। लौकी की खेती में भूमि का पी.एच मान 6 से 7 के मध्य होना चाहिए।

तापमान: लौकी की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु की जरुरत होती है। बीज अंकुरण के लिए 30 से 35 डिग्री सेन्टीग्रेड और पौधों की बढ़वार के लिए 32 से 38 डिग्री सेन्टीग्रेड तापमान सबसे अच्छी होता है।

उचित समय: जायद, खरीफ, रबी सीजन में लौकी की फसल ली जाती है। जायद की बुवाई मध्य जनवरी, खरीफ मध्य जून से प्रथम जुलाई तक और रबी सितंबर अंत से अक्टूबर के पहले सप्ताह तक लौकी की खेती की जाती है|

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पत्तागोभी (Cabbage)

भूमि: गोभी की खेती के लिये सभी प्रकार की अच्छे जल निकास वाली भूमि उपयुक्त होती है, परंतु हल्की एवं दोमट मिट्टी जिसका जल निकास अच्छा हो तथा पी. एच. 5.5 से 6.8 हो अधिक उपयुक्त होती है | अम्लीय भूमि में गोभी की खेती अच्छी नही होती हैं |

तापमान: इसके अच्छे उत्पादन के लिए 12 से 30 डिग्री सेल्सियस तक तापमान होना चाहिए।

उचित समय: पत्ता गोभी की अगेती खेती के लिए अगस्त के अंतिम सप्ताह सितम्बर मध्य तक नर्सरी में बीज की बुवाई कर देनी चाहिए| मध्यम एवं पछेती किस्मों लिए 15 सितम्बर से अक्टूबर अंत तक बीज की बुवाई कर देनी चाहिए| बीज की बुवाई यदि समय पर की जाती है तो इसका सीधा प्रभाव उपज पर देखने को मिलता है|

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