राष्ट्रीय हरित भारत मिशन या ग्रीन इंडिया मिशन 

Table Of Content

  • हरित भारत मिशन या ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) क्या है ?
  • हरित भारत मिशन या ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) के लक्ष्य और उद्देश्य
  • हरित भारत मिशन (जीआईएम) का कार्यान्वयन
  • हरित भारत मिशन (जीआईएम) की विशेषताएं
  • ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) की चिंताएं और चुनौतियां

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हरित भारत मिशन या ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) क्या है ?

  • हरित भारत मिशन या ग्रीन इंडिया (GIM) मिशन स्पष्ट रूप से परिभाषित लक्ष्यों, पैमानों, कार्यान्वयन समय और मील के पत्थर के साथ-साथ मात्रात्मक परिणाम और सेवा स्तरों वाली एक परियोजना है, जो सामान्यतः एक “मिशन मोड” परियोजना होती है।
  • इस पहल का उद्देश्य पांच मिलियन हेक्टेयर वन और वृक्षों के आवरण में सुधार करना है। मिशन हरियाली के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है और कार्बन पृथक्करण उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • जीआईएम (GIM) कई पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं पर भी ध्यान केंद्रित करता है और ईंधन, चारा, लकड़ी और गैर-लकड़ी वन उत्पादों, विशेष रूप से जैव विविधता, पानी, बायोमास आदि जैसी सेवाएं प्रदान करता है।
  • जीआईएम (GIM) वनों पर निर्भर परिवारों की आजीविका में भी वृद्धि करेगा जो उन परिदृश्यों के बाहरी इलाके में रहते हैं जहां यह मिशन होता है।

हरित भारत मिशन या ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) के लक्ष्य और उद्देश्य

  • मध्यम रूप से घने, खुले जंगलों, अवक्रमित घास के मैदानों और आर्द्रभूमि (5 मिलियन हेक्टेयर) सहित वन कवर गुणवत्ता के साथ-साथ वन / गैर-वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में सुधार करना।
  • शहरी-परिधीय भूमि वन और वृक्ष आवरण (0.20 मिलियन हेक्टेयर) में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना।
  • कृषि वानिकी और सामाजिक वानिकी (3 मिलियन हेक्टेयर) के तहत सीमांत कृषि भूमि और अन्य गैर-वन स्थलों पर वृक्ष और वन आवरण में सुधार की जांच करना।
  • सार्वजनिक वन/गैर वन भूमि के सामुदायिक संस्थानों का प्रबंधन करना।
  • लगभग 30 लाख परिवारों के जंगलों में और उसके आसपास वन आजीविका में विविधता लाना।
  • क्षतिग्रस्त खुले जंगलों को बहाल करने के लिए, घास के मैदानों का पुनर्गठन, आर्द्रभूमि की बहाली।
  • 2020 तक CO2 के वार्षिक पृथक्करण में 50 से 60 मिलियन टन तक सुधार करना।

हरित भारत मिशन (जीआईएम) का कार्यान्वयन

  • ग्रीन इंडिया मिशन में व्यापक हरियाली की परिकल्पना की गई है, जिसका लक्ष्य विशेष रूप से जैव विविधता, पानी, बायोमास, मैंग्रोव संरक्षण, आर्द्रभूमि और कार्बन कैप्चर के साथ सह-लाभ के रूप में प्रमुख आवास सहित पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करना है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
  • राज्य स्तर पर मिशन का मार्गदर्शन करने के लिए राज्य वन विकास एजेंसी कार्यरत है।
  • जिला स्तर पर क्रियान्वयन वन विकास अभिकरण द्वारा किया जाता है।
  • ग्राम स्तर पर योजना और कार्यान्वयन के लिए ग्राम सभा और विभिन्न समितियाँ प्रमुख संस्थाएँ हैं।
  • शहरी क्षेत्रों में नगर पालिका/नगर निगमों से जुड़ी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) जैसी वार्ड स्तरीय समितियां मिशन के तहत योजना और कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करती हैं।
  • 1 लाख कुशल स्थानीय समुदाय के युवाओं को विकसित करने की क्षमता जो समुदाय आधारित वन संरक्षण में सहायता प्रदान करेंगे। वे समुदाय और वन विभाग जैसी कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच एक सेतु का काम करेंगे।

हरित भारत मिशन (जीआईएम) की विशेषताएं

  • इसका उद्देश्य वन-विकास और इसकी परिधि में बेहतर सहयोग के लिए अतिरिक्त योजनाओं और कार्यक्रमों के साथ समग्र और स्थायी आधार पर अभिसरण करना भी है।
  • पर्यावरण सुरक्षा में योगदान देने वाले एक सहक्रियात्मक दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए प्रतिपूरक वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority – CAMPA) के प्रबंधन और योजना प्राधिकरण के साथ GIM के लिए अभिसरण दिशानिर्देश तैयार किया गया है।
  • इस मिशन ने एक एकीकृत क्रॉस-सेक्टोरल रणनीति अपनाई है क्योंकि सार्वजनिक और निजी दोनों भूमि पर योजना बनाने, निर्णय लेने, कार्यान्वयन और निगरानी में स्थानीय अधिकारियों के लिए इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • इसलिए लक्ष्य एक विकेन्द्रीकृत भागीदारी रणनीति पर केंद्रित है जिसमें जमीनी समूहों और समुदायों को लैंडस्केप डिजाइन, निर्णय लेने, निष्पादन और निगरानी में शामिल किया गया है।
  • प्रारंभिक वर्ष 2011-12 के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष से 50 करोड़ रुपये अलग रखे गए थे। यह राशि 21 राज्यों के लिए 708 गांवों से जुड़े 71 परिदृश्यों के लिए जारी की गई थी। 
  • प्रारंभिक चरण की गतिविधियों में सूक्ष्म नियोजन, प्रवेश बिंदु गतिविधियाँ, नर्सरी विकास, परिदृश्य पहचान जागरूकता और आउटरीच शामिल थे।

ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) की चिंताएं और चुनौतियां

  • दिसंबर 2018 में प्रकाशित अपनी 30वीं रिपोर्ट, ‘द डिलीवरी ऑफ द नेशनल क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान’ में, लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने कहा की मिशन के लिए पर्याप्त वित्त की कमी थी, जिसके परिणामस्वरूप GIM अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में आशानुरूप सफलता नहीं पा सका।
  • स्थानों पर वृक्षों का अनुचित रोपण सूखा पैदा कर सकता है और जैव विविधता को बाधित कर सकता है।
  • वनों द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न पर्यावरणीय सेवाएं हैं जैसे मिट्टी के कटाव की रोकथाम, जैव विविधता को बढ़ावा देना, निर्वाह आदि। मिशन द्वारा इन सबपर बुरा प्रभाव पद सकता है। 
  • अधिकांश वृक्षारोपण में कोई निवासी जीव नहीं है।
  • मिशन के वनीकरण को केवल मिट्टी और मौसम संबंधी स्थितियों को ध्यान में रखे बिना पेड़ों की मात्रा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
  • नीलगिरी जैसे पेड़ लगाए गए हैं जो पर्यावरण संबंधी चिंताओं के अनुरूप नहीं हैं।

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घर में उगने वाली सब्जियां और उनके तरिकेआप अपने होम गार्डन या टेरिस गार्डन के गमलों में आगे बताई गई सब्जियां आसानी से लगा सकते हैं।
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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनाइस योजना को वर्ष 2015 में खेती के लिये पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, सिंचाई के तहत खेती योग्य क्षेत्र का विस्तार करने, जल उपयोग दक्षता में सुधार करने तथा सतत् जल संरक्षण प्रथाओं को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया था…Click Hereमेरा पानी मेरी विरासत योजनाहरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी के द्वारा लॉन्च की गयी है । इस योजना के अंतर्गत हरियाणा के डार्क जोन में शामिल क्षेत्रों में धान की खेती छोड़ने तथा धान के स्थान पर अन्य विकल्पित फसलों की बुआई करने वाले किसानों को 7 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन धनराशि राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी…Click Here
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हरियाणा मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना

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  • मुख्य बातें
  • योजना के बारे मे
  • ग्राहक देखभाल फ़ोन नंबर
  • योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभ
  • पात्रता
  • पात्रता
  • लाभ लेने की प्रक्रिया
  • आधिकारिक वेबसाइट

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मुख्य बातें

 

  • हरियाणा सरकार अंत्योदय परिवार से सम्बन्ध रखने वाले डेयरी संचालकों को मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना के तहत निम्नलिखित लाभ प्रदान करेगी :-
    • 10/- रूपये प्रति लीटर अधिक की प्रोत्साहन राशि।
    • मिल्क यूनियन में दूध बेचने पर मिलेगा लाभ।
    • मिल्क यूनियन के प्रति लीटर दूध के दाम से 10/- रूपये प्रति लीटर लाभार्थियों को अधिक देय।

योजना के बारे मे

  • करनाल में एक रैली को सम्बोधित करते हुवे हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी और भारत के गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने अंत्योदय परिवारों के लिए नयी योजनाओं के संचालन की घोषणा की।
  • हरियाणा प्रदेश के पशुपालकों और डेरी संचालकों को लाभ पहुँचाने और उनको दूध की सही कीमत प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा “मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना” की शुरुआत की जाएगी।
  • जैसा की नाम से ही ज्ञात हो रहा यह योजना केवल हरियाणा के अंत्योदय परिवार को लाभ पहुँचाने के लिए शुरू की जाएगी।
  • मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना में ऋण ले कर मिनी दुग्ध डेयरी खोलने पर दूध बेचने पर वास्तविक मूल्य पर प्रोत्साहन दिया जायेगा।
  • दूध के वास्तविक मूल्य पर प्रोत्साहन राशि केवल तभी देय होगी जब लाभार्थी अपनी डेयरी के दूध को मिल्क यूनियन को बेचेगा।
  • मिल्क यूनियन में दूध बेचने पर लाभार्थी को हरियाणा मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना के तहत दूध के वास्तविक मूल्य पर 10/- रूपये प्रति लीटर अधिक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
  • यानि अंत्योदय परिवार के डेयरी संचालकों को अब दुध अपनी डेयरी का दूध वास्तविक दूध के मूल्य से अधिक दाम पर बेच सकते है।
  • हरियाणा मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता योजना में दी जाने वाले 10/- रूपये प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि लाभार्थी को केवल 1 वर्ष के लिए ही देय होगी।
  • योजना में प्रोत्साहन राशि का लाभ लेने के लिए लाभार्थी को अपनी डेयरी के दूध को मिल्क यूनियन में बेचना अनिवार्य होगा।
  • दूध के वास्तविक मूल्य पर प्रोत्साहन राशि का लाभ केवल अंत्योदय परिवार से सम्बन्ध रखने वाला व्यक्ति ही ले सकता है।
  • फिलहाल सरकार द्वारा मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना की घोषणा मात्रा की गयी है।
  • जल्दी ही योजना के आधिकारिक दिशानिर्देश, आवेदन की प्रक्रिया व अन्य पात्रता जारी की जाएँगी।
  • जैसे ही हमें हरियाणा मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त होगी हम यहाँ अपडेट कर देंगे।

ग्राहक देखभाल फ़ोन नंबर

  • हरियाणा मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना का संपर्क विवरण जल्दी ही जारी किया जायेगा।
योजना का अवलोकन
योजना का नाम हरियाणा मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना।
आरंभ वर्ष 2023.
लाभ 10/- रूपये प्रति लीटर अधिक दूध का मूल्य दिया जायेगा।
लाभार्थी अंत्योदय परिवार के डेयरी संचालक।
नोडल विभाग पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा।
आवेदन का तरीका आवेदन पत्र द्वारा।

योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभ

 

  • हरियाणा सरकार अंत्योदय परिवार से सम्बन्ध रखने वाले डेयरी संचालकों को मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना के तहत निम्नलिखित लाभ प्रदान करेगी :-
    • 10/- रूपये प्रति लीटर अधिक की प्रोत्साहन राशि।
    • मिल्क यूनियन में दूध बेचने पर मिलेगा लाभ।
    • मिल्क यूनियन के प्रति लीटर दूध के दाम से 10/- रूपये प्रति लीटर लाभार्थियों को अधिक देय।

पात्रता

  • हरियाणा मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना में लाभ लेने हेतु आवेदकों के लिए हरियाणा सरकार ने निम्नलिखित पात्रता की शर्तें निर्धारित की है :-
    • आवेदक हरियाणा का निवासी होना चाहिए।
    • आवेदक ने ऋण ले कर मिनी दुग्ध डेयरी की शुरुआत की हो।
    • आवेदक अंत्योदय परिवार से सम्बन्ध रखता हो।
    • आवेदक मिल्क यूनियन में दूध बेचने का इच्छुक हो।

लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • हरियाणा सरकार की मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना में आवेदन करते समय लाभार्थी को निम्नलिखित दस्तावेज़ों की आवश्यकता होगी :-
    • परिवार पहचान पत्र।
    • अंत्योदय कार्ड।
    • आधार कार्ड।
    • मोबाइल नम्बर।
    • आय प्रमाण पत्र।
    • मिल्क यूनियन में पंजीकरण संख्या।

लाभ लेने की प्रक्रिया

  • दिनांक 02-11-2023 को हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी और भारत के गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना शुरू करने की घोषणा की थी।
  • मिली जानकारी के अनुसार अभी ये स्पष्ट नहीं है की योजना में आवेदन ऑनलाइन आवेदन पत्र के माध्यम से स्वीकार्य किये जायेंगे या ऑफलाइन आवेदन पत्र के माध्यम से।
  • जल्दी ही हरियाणा सरकार द्वारा योजना के आधिकारिक दिशानिर्देश जारी किये जायेंगे।
  • उन्ही दिशानिर्देश में मुख्यमंत्री अंत्योदय दुग्ध उत्पादन सहकारिता प्रोत्साहन योजना के आवेदन की प्रक्रिया भी स्पष्ट की जाएगी।
  • जैसे ही हमें योजना के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी हम इस पेज को अपडेट कर देंगे।

आधिकारिक वेबसाइट
पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा।
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फसल अवशेष प्रबंधनयोजना की पहली शर्त यही होगी कि लाभार्थी को हरियाणा का होना चाहिए. लाभार्थी हरियाणा का होने के बाद वह मेरी फसल, मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण(registration on meri fasal mera byora portal) करेगा. पंजीकरण करने के बाद लाभार्थी का आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण भरना होगा.Click Here राष्ट्रीय हरित भारत मिशन या ग्रीन इंडिया मिशन हरित भारत मिशन या ग्रीन इंडिया (GIM) मिशन स्पष्ट रूप से परिभाषित लक्ष्यों, पैमानों, कार्यान्वयन समय और मील के पत्थर के साथ-साथ मात्रात्मक परिणाम और सेवा स्तरों वाली एक परियोजना है, जो सामान्यतः एक “मिशन मोड” परियोजना होती है…Click Hereमुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजनाबागवानी फसलों में प्रतिकूल मौसम व प्राकृतिक आपदाओं के कारण से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए हरियाणा सरकार द्वारा मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत किसानों को प्रति एकड प्रीमीयम राशि 2.5 प्रतिशत सब्जियों मसालों के लिए 750 रूपये …Click Here
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फसल अवशेष प्रबंधन

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  • फसल अवशेष प्रबंधन
  • प्रोत्साहन राशि
  • प्रबंधन प्रशिक्षण
  • हरियाणा का धुआं ही घोटता है दिल्ली-यूपी का दम ?

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फसल अवशेष प्रबंधन
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प्रबंधन प्रशिक्षण
हरियाणा का धुआं ही घोटता है दिल्ली-यूपी का दम ?
फसल अवशेष प्रबंधन

फसलों की कटाई के बाद कई किसान खेतों में बचे अवशेषों में किसान आग लगा देते हैं पराली के इसी धुएं में लोगों की सांस फूलने लगती है कार्बन के कण वाला यहीं धुआं स्मॉग के रूप में हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, दिल्ली को अपनी जद में ले लेता है अब उसी पराली से निपटने के लिए हरियाणा सरकार किसानों को प्रोत्साहन धनराशि देगी । हरियाणा सरकार ने यह कवायद फसल अवशेष प्रबंधन स्कीम के अंतर्गत सीटू व एक्स सीटू मैनेजमेंट के तहत की है ।

प्रोत्साहन राशि

योजना की पहली शर्त यही होगी कि लाभार्थी को हरियाणा का होना चाहिए लाभार्थी हरियाणा का होने के बाद वह मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण(registration on meri fasal mera byora portal) करेगा । पंजीकरण करने के बाद लाभार्थी का आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण भरना होगा । इसके बाद अन्य शर्ते पूरी करनी होंगी ।  किसान के खाते में प्रति एकड़ एक हजार रुपये पहुंच जाएंगे इसके अलावा किसान पराली बेचकर भी मुनाफा कमा सकेंगे ।

प्रबंधन प्रशिक्षण

अधिकारियों के अनुसार सीटू व एक्स सीटू मैनेजमेंट (In Situ Management) बेहद सिंपल है इसे आसानी से सीखा जा सकता है । इसमें किसानों को बेलर मशीनों से पराली की गांठें बनाना सिखाया जाएगा  बाद में इसे बेचने के लिए मार्किट भी होगा  इसकी जानकारी अधिकारी देंगे । एक विशेष बात यह है कि धान के बचे फान या ठूंठों कक कृषि मशीन से दबाना भी सिखाया जाएगा । ठूंठ यदि जमीन में दब जाएगा तो वह खाद्य के रूप में भी काम आएगा इससे जमीन की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ जाएगी ।

हरियाणा का धुआं ही घोटता है दिल्ली-यूपी का दम ?

अधिकारियों के अनुसार सीटू व एक्स सीटू मैनेजमेंट (In Situ Management) बेहद सिंपल है इसे आसानी से सीखा जा सकता है । इसमें किसानों को बेलर मशीनों से पराली की गांठें बनाना सिखाया जाएगा  बाद में इसे बेचने के लिए मार्किट भी होगा  इसकी जानकारी अधिकारी देंगे । एक विशेष बात यह है कि धान के बचे फान या ठूंठों कक कृषि मशीन से दबाना भी सिखाया जाएगा । ठूंठ यदि जमीन में दब जाएगा तो वह खाद्य के रूप में भी काम आएगा इससे जमीन की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ जाएगी ।

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मिर्च के पौधेमिर्च की खेती विविध प्रकार की मिट्टियों मे जिसमे की कार्बनिक पदार्थ पर्याप्त हो एवं जल निकास की उचित सुविधा हो, मे सफलतापूर्वक की जा सकती है। मिर्च की फसल जलभराव वाली स्थिति सहन नही कर पाती है। यद्यपि मिर्च को pH 6.5—8.00 वाली मिट्टी मे भी (वर्टीसोल्स) मे भी उगाया जा सकता है….Click Here कपास की फसल में लगने वाले विभिन्न प्रकार के कीट एवं उनका प्रबंधनकपास संपूर्ण भारत के किसानों के लिए एक नकदी फसल मानी जाती है। इसकी खेती केवल भारत में ही नहीं बल्कि पुरे विश्वभर में की जाती है, लेकिन कपास के उत्पादन में भारत का स्थान सबसे पहले आता है…Click Hereसेब के लिए कटाई के बाद का प्रबंधनसेब की कटाई के बाद की तकनीक में तरीकों और प्रथाओं की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है जिसका उद्देश्य कटाई के बाद सेब की गुणवत्ता, स्वाद और शेल्फ जीवन को बनाए रखना है….Click Here
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गन्ना उत्पादन की नई तकनीक अपनाने पर पांच हजार तक का अनुदान

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  • परिचय
  • प्रोत्साहन राशि
  • ट्रैस मलचिंग
  • बीज नर्सरी लगाने पर
  • इस स्कीम का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज

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परिचय
प्रोत्साहन राशि
ट्रैस मलचिंग
बीज नर्सरी लगाने पर
परिचय

गन्ना, सदियों से भारतीय उपमहाद्वीप में एक मुख्य फसल के रूप में उगाया जाता रहा है। इसकी खेती 110 से अधिक देशों में होती है। ब्राजील व भारत मिलकर विश्व के कुल गन्ना उत्पादन का 50 प्रतिशत उत्पादन करते हैं। भारत का गन्ना उत्पादन की दृष्टि से विश्व में दूसरा स्थान है। हमारे देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गुणात्मक सुधार लाने में गन्ने की प्रमुख भूमिका है। चीनी एवं कपास उद्योग के बाद कृषि आधारित दूसरा सबसे बड़ा उद्योग चीनी ही है। गन्ना एवं चीनी उद्योग ने केवल 60 लाख किसानों व उनके परिवारों को रोजगार प्रदान करते हैं, बल्कि उनकी आर्थिक समृद्धि व खुशहाली के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में भी मददगार है। इसके अतिरिक्त चीनी मीलों से रोजगार भी उपलब्ध होता है। देश में वर्ष 2015 -16 में 49.1 लाख हे. क्षेत्र से 69.4 टन/हे. उत्पादकता के साथ 3414.2 लाख टन गन्ने का उत्पादन किया गया। यद्यपि गन्ना की उत्पादन क्षमता 474 टन/हे. आंकी गई है। स्पष्ट है कि उन्नत तकनीक एवं प्रजातियों को अपनाकर गन्ना उत्पादकता में आशातीत वृद्धि की जा सकती है। इससे गन्ना आधारित चीनी उद्योग तथा गन्ना कृषक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो सकते हैं। गन्ने की उपज में अस्थिरता, बढ़ती उत्पादन लागत, लाभांश में कमी एवं उत्पदकता में गिरावट गन्ना कृषकों के समक्ष प्रमुख चुनौती के मुद्दे बन गए हैं।

नवीनतम कृषि अनुसन्धान के फलस्वरूप विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु दशाओं के अनुकूल गन्ने की उन्नत प्रजातियों का विकास किया गया है। इसके अतिरिक्त गन्ना आधारित  फसल विविधकरण, उत्पादन तकनीक, श्रमिक लागत में कमी करने के लिए अधिक दक्षता वाले कृषि यंत्रों का विकास, एकिकृत  फसल सुरक्षा आदि के समन्वित प्रयोग से कृषकों की वर्तमान आय को आगामी पांच वर्षों में दोगुना कर पाना संभव है।

प्रोत्साहन राशि

टेक्नोलॉजी मिशन ऑन शुगर केन स्कीम के तहत नई तकनीकी का प्रयोग कर गन्ने की फसल लगाने वाले किसानों को 500 से पांच हजार रुपये तक अनुदान राशि दी जाएगी योजना का लाभ लेने के लिए 31 अक्टूबर तक किसानों को आवेदन करना होगा। विभाग ने यह योजना गन्ने के क्षेत्र को बढ़ाने के लिए लागू की है।

जानकारी के अनुसार इस विधि में किसान को अपने खेत में चार फीट लाइन से लाइन की दूरी में गन्ने की बिजाई और गन्ने के बीच में दूसरी फसल गेहूं, सरसों, चना व सब्जियां उगानी होगी। इस विधि से बिजाई करने वाले किसान को प्रति एकड़ 3600 रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी। दूसरी ओर कोई किसान चार फुट लाइन से लाइन की दूरी में गन्ने की बिजाई करेगा और इसमें अन्य फसलें नहीं उगाएगा तो उसे प्रति एकड़ 3 हजार रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी।

ट्रैस मलचिंग

 इसके अलावा गन्ने से उतरने वाली पत्ती को न जलाने वाले किसानों को भी 500 रुपये प्रति एकड़ अनुदान राशि उपलब्ध करवाई जाएगी। ट्रैस मलचिंग विधि के तहत किसानों को गन्ने से उतरने वाली पत्ती को जलाना नहीं होगा, उसे खेत में ही बिछाना है। पती गल जाने के बाद भूमि की उपजाऊ शक्ति और फसल की पैदावार भी बढ़ेगी।

बीज नर्सरी लगाने पर

इस स्कीम के तहत बीज नर्सरी लगाने के लिए विभाग 5000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान सहायता राशि किसानों को देगा। किसानों द्वारा बीज नर्सरी के लिए प्रयोग में लाया गया गन्ने का बीज मोइस्ट होट एयर तथा फफूंदीनाशक से उपचारित किया जाना आवश्यक है। किसानों द्वारा उक्त नर्सरी के लिए गन्ने की बिजाई क्षेत्र के कृषि वैज्ञानिक या सहायक गन्ना विकास अधिकारी की उपस्थिति में की जाएगी। विभाग की तरफ से 800 एकड़ में गन्ना उगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस स्कीम का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज
इस स्कीम का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज

किसानों को इस स्कीम का लाभ लेने के लिए सबसे पहले किसी भी अटल सेवा केंद्र पर जाकर एग्री हरियाणा डॉट जीओवी डॉट इन पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना होगा। इसमें कृषि सामग्री का बिल, किराये पर ली हुई मशीन का बिल, दवाइयों का बिल, आधार कार्ड व बैंक अकाउंट कॉपी की प्रति अपलोड करनी होगी।

सहायक गन्ना विकास अधिकारी डॉ. कुलदीप शर्मा ने बताया कि टेक्नोलॉजी मिशन ऑन शुगरकैन स्कीम के तहत किसानों को 500 से लेकर 5000 रुपये तक अनुदान राशि दी जाएगी। किसान पहले आओ, पहले पाओ के तहत इसका लाभ उठाएं। नई तकनीक अपना के किसान ज्यादा उपज तो ले ही सकते है। इसके अलावा गन्ने को कीड़े व बीमारियों से भी बचा कर उन पर होने वाले खर्च को कम करके पैसे बचा सकते है।

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विभिन्न मशीनीकरण योजनाओं के तहत आवेदन आमंत्रित – वित्तीय वर्ष 2023-24

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  • Haryana: 32 तरह के कृषि यंत्रों पर मिलेगा 50 प्रतिशत तक का अनुदान, लेनी होगी फसल अवशेष ने जलाने की शपथ
  • विस्तार 
  • इन मशीनों पर मिलेगा अनुदान
  • विभिन्न मशीनीकरण चार्ट
  • आधिकारिक वेबसाइट

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Haryana: 32 तरह के कृषि यंत्रों पर मिलेगा 50 प्रतिशत तक का अनुदान, लेनी होगी फसल अवशेष ने जलाने की शपथ
विस्तार 
इन मशीनों पर मिलेगा अनुदान
Haryana: 32 तरह के कृषि यंत्रों पर मिलेगा 50 प्रतिशत तक का अनुदान, लेनी होगी फसल अवशेष ने जलाने की शपथ

किसानों को एक घोषणा पत्र देना होगा जिसमें किसान को बताना होगा कि पिछले तीन वर्षों से मशीन पर अनुदान नहीं लिया है इसके साथ फसल अवशेष न जलाने की शपथ भी लेनी होगी। शपथ लेने वालों को ही इस योजना का लाभ मिलेगा।

विस्तार 

किसानों को कृषि यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। कृषि यंत्रों को लेकर आवेदन करने के लिए विभाग ने पोर्टल खोल दिया है। इस योजना के तहत आने वाले लाभार्थियों का चयन ऑनलाइन ड्रॉ के माध्यम से जिलास्तरीय कार्यकारिणी समिति द्वारा किया जाएगा।

विभिन्न स्कीमों के तहत कृषि यंत्रों व मशीनों पर अनुदान के लिए योजना किसानों के लिए शुरू हो गई है। किसानों को www.agriharyana.gov.in पर आवेदन करना होगा आवेदन की अंतिम तिथि 15 जनवरी |किसानों को कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। कृषि यंत्रों को लेकर आवेदन करने के लिए विभाग ने पोर्टल खोल दिया है।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जिले में विभिन्न स्कीमों के तहत किसानों को इसका फायदा मिलेगा इन योजना के तहत 32 प्रकार के कृषि यंत्रों व मशीनों पर 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा पहले केवल करीब 5 मशीनों पर अनुदान मिलता था। योजना में ड्रॉ के माध्यम से किसानों का चयन होगा। चयनित किसानों को ही इस योजना का लाभ मिलेगा।
 कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जिले में विभिन्न स्कीमों के तहत किसानों को इसका फायदा मिलेगा।

इन मशीनों पर मिलेगा अनुदान

विभिन्न प्रकार के 32 कृषि यंत्रों/मशीनों जैसे पावर विडर, मल्टी टूल बार, ट्रैक्टर चालित साईलेज पैकिंग मशीन, बैटरी व ट्रैक्टर चालित खाद छिड़काव यंत्र टूस्टर मालित जइग्रालिक प्रैस स्ट्रा बेलर एमबी पाऊ, समायजर, मल्टी कॉप बेड प्लास्टर, धान रोपाई मशीन, ट्रैक्टर चालित मशीन ग्रेन क्लीनर कम पेडर, ट्रैक्टर चालित रीपर, मिलेट मशीन, मक्का थ्रेसर (ट्रैक्टर चालित), मक्का शेलर न्यूमेटिक प्लाट मशीन, ऑयल एक्सपेलर पैसे, शुगरकेन कटर मोबाइल कॉटन थ्रेडर (ट्रैक्टर चलित), लोडर/डोजर, काऊ डंक बैरिकट मशीन, पैड़ी मोबाईल ड्रायर लेजर लैंड लेवलर कॉटन सीड ड्रिल, ट्रेक्टर मउटिड स्प्रे पंप पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है।

 
विभिन्न मशीनीकरण चार्ट
आधिकारिक वेबसाइट
विभिन्न मशीनीकरण चार्ट

क्र.सं कार्यान्वयन का नाम
1Battery/Electric/Solar Operated Power Weeder बैटरी/इलेक्ट्रिक/सौर संचालित पावर वीडर
2 Ride on Self Propelled Multi tool bar प्रोपेल्ड मल्टी टूल बार
3 Self propelled High Clerance Boom Sprayer स्व चालित हाई क्लीयरेंस बूम स्प्रेयर
4 High capacity Chaffcutter with loader/Chaff Cutter लोडर/भूसा कटर के साथ उच्च क्षमता वाला चारा काटने वाला यंत्र
5 Tractor operated silage packing machine/Tractor operated silage Baler(1400-1500kg/hr) ट्रैक्टर चालित सिलेज पैकिंग मशीन/ट्रैक्टर चालित सिलेज बेलर (1400-1500 किग्रा/घंटा)
6 Battery Operated Fertilizer Broadcaster बैटरी चालित उर्वरक प्रसारक
7 Briquette making machine (500-1000 Kg/hr capacity)/ Biomass pelleting machine ब्रिकेट बनाने की मशीन (500-1000 किलोग्राम/घंटा क्षमता)/बायोमास पेलेटिंग मशीन
8 Tractor Operated Fertilizer Broadcaster ट्रैक्टर चालित उर्वरक प्रसारक
9 Tractor operated Hydraulic press straw baler ट्रैक्टर चालित हाइड्रोलिक प्रेस स्ट्रॉ बेलर
10 M.B plough M.B plough
11 Sub Soiler सब सोइलर
12 Multi crop bed planter/Raised Bed Planter मल्टी क्रॉप बेड प्लान्टर/रेज्ड बेड प्लान्टर
13 Self propelled Rice transplanter (4row) स्व चालित चावल ट्रांसप्लांटर (4पंक्ति)
14 Tractor operated winnowing machine gram cleaner cum grader/ Winnowing Fan ट्रैक्टर चालित विनोइंग मशीन ग्राम क्लीनर सह ग्रेडर/ विनोइंग फैन
15 Tractor mounted reaper cum binder ट्रैक्टर पर लगा हुआ रीपर कम बाइंडर
16 Millet Machine/ Millet Mill बाजरा मशीन/बाजरा मिल
17 Maize Thresher (Tractor operated)/ Maize Sheller मक्का थ्रेशर (ट्रैक्टर चालित)/मक्का शेलर
18 Pneumatic Planter Machine (Tractor operated) वायवीय प्लांटर मशीन (ट्रैक्टर संचालित)
19 Oil Expeller तेल निकालने वाला
20 Maize Dehusker (Tractor Operated)/ Maize Sheller मक्का डिहस्कर (ट्रैक्टर चालित)/मक्का शेलर
21 Sugarcane Thresh Cutter गन्ना थ्रेश कटर
22 Mobile/Cotton Shreader (Tractor Operated) मोबाइल/कॉटन श्रेडर (ट्रैक्टर चालित)
23 Loader/Dozer/backhoe (Tractor operated) लोडर/डोजर/बेकहो (ट्रैक्टर चालित)
24 Cow Dung Briquetting machine गाय के गोबर से ब्रिकेटिंग मशीन
25 Cow dung dewatering machine गाय के गोबर से पानी निकालने की मशीन
26 Paddy Mobile Drier धान मोबाइल ड्रायर
27 Laser Land Leveler लेजर लैंड लेवलर
28 Cotton Seed Drill/7tyne कपास बीज ड्रिल/7tyne
29 Tractor Mounted Sprayer ट्रैक्टर पर लगे स्प्रेयर
30 Rotavator रोटावेटर
31 Potato Planter आलू बोने वाला
32 Tractor Operated Power Weeder ट्रैक्टर चालित पावर वीडर

आधिकारिक वेबसाइट
https://agriharyana.gov.in/mechschemes
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