Haryana Power Spray Pump Subsidy Yojana

 

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हरियाणा सरकार द्वारा किसानों के लिए हरियाणा स्प्रे पंप सब्सिडी स्कीम चलाई जा रही है| इस स्कीम के तहत किसानों को पावर स्प्रे पंप खरीदने पर अनुदान राशि दी जा रही है| हरियाणा सरकार द्वारा राज्य के किसानों को बैटरी से चलने वाले स्प्रे पंप पर ₹3000 की अनुदान राशि दी जाएगी| राज्य का जो भी इच्छुक किसान इस योजना का लाभ लेना चाहता है वह ऑनलाइन आवेदन कर सकता है| हरियाणा स्प्रे पंप सब्सिडी स्कीम के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिए गए हैं|

हरियाणा पावर स्प्रे पंप सब्सिडी स्कीम

हरियाणा सरकार द्वारा राज्य की किसानों के लिए समय-समय पर कई तरह की सब्सिडी स्कीम चलाई जाती हैं उनमें से एक स्कीम है स्प्रे पंप सब्सिडी स्कीम| इस स्कीम के तहत राज्य के किसानों को बैटरी से चलने वाला स्प्रे पंप खरीदने के लिए सब्सिडी राशि दी जाती है| इस योजना का लाभ राज्य के सभी छोटे एवं सीमांत किसान ले सकते हैं| हरियाणा सरकार द्वारा कृषि स्प्रे पंप योजना के तहत 50% सब्सिडी किसानों को दी जाएगी| किसान को अंतिम तिथि से पहले पहले आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से हरियाणा स्प्रे पंप सब्सिडी स्कीम के तहत पंजीकरण करवाना होगा|

हरियाणा पावर स्प्रे पंप सब्सिडी स्कीम विवरण

योजना का नाम पावर स्प्रे पंप सब्सिडी स्कीम
किसने शुरू की हरियाणा सरकार
लाभार्थी राज्य के किसान
उद्देश्य स्प्रे पंप के लिए अनुदान राशि देना
लाभ ₹3000
आवेदन शुरू तिथि ———-
आवेदन अंतिम तिथि ———-
आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन
आधिकारिक वेबसाइट agriharyana.gov.in

हरियाणा पावर स्प्रे पंप सब्सिडी स्कीम का उद्देश्य

हरियाणा सरकार द्वारा पावर स्प्रे पंप सब्सिडी योजना शुरू करने का मुख्य उद्देश्य राज्य की किसानों को स्वयं चलित स्प्रे पंप खरीदने पर अनुदान राशि प्रदान करना है| हरियाणा सरकार द्वारा आज के समय में आधुनिक तकनीक के साथ राज्य के छोटे व सीमांत किसानों को जोड़ना है ताकि किसान समय की बचत वह आए में वृद्धि कर पाए| इस योजना के तहत किसान बैटरी वाला स्प्रे पंप खरीद सकते हैं जिसके लिए हरियाणा सरकार उन्हें ₹3000 की सब्सिडी राशि प्रदान करेगी| इस योजना का लाभ प्राप्त कर किसान आधुनिक तकनीक का उपयोग कर कृषि कार्य में आसानी ला सकते हैं|

हरियाणा पावर स्प्रे पंप सब्सिडी स्कीम लाभ एवं विशेषताएं

  • इस योजना के तहत किसानों द्वारा स्प्रे पंप खरीदने पर सब्सिडी राशि दी जाएगी|
  • इस योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी राशि स्प्रे पंप की खरीद पर 50% या ₹3000 की दी जाएगी|
  • इस योजना का लाभ राज्य के सभी छोटे एवं सीमांत किसान ले सकते हैं|
  • इस योजना के तहत मिलने वाली अनुदान राशि सीधे लाभार्थी किसान के बैंक खाते में भेजी जाएगी|
  • पावर स्प्रे पंप का उपयोग कर किसान अपने समय की बचत कर पाएंगे|

हरियाणा पावर स्प्रे पंप सब्सिडी योजना पात्रता

  • हरियाणा राज्य के स्थाई निवासी किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं|
  • राज्य के सभी छोटे एवं सीमांत किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं|
  • किसान द्वारा पहले इस योजना के तहत लाभ न लिया हो|

हरियाणा पावर स्प्रे पंप सब्सिडी योजना दस्तावेज

  • परिवार पहचान पत्र
  • आधार कार्ड
  • बैंक खाता संख्या
  • भूमि संबंधी दस्तावेज

हरियाणा पावर स्प्रे पंप सब्सिडी योजना आवेदन प्रक्रिया

  • सबसे पहले Agryhryana की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं|
  • होम पेज पर Former Corner के ऑप्शन पर क्लिक करें|
  • अब Apply For Agriculture Schemes के ऑप्शन पर क्लिक करें|

 

  • अब आपके सामने सभी स्कीम्स आ जाएगी|
  • अब आप पावर स्प्रे पंप सेट के ऑप्शन पर क्लिक करेंगे|
  • अब आपके सामने रजिस्ट्रेशन फॉर्म आएगा|
  • फार्म में मांगी की जानकारी दर्ज करें|
  • अब आपसे एक दस्तावेजों को अपलोड करें|
  • अब सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक कर दें|
  • इस प्रकार से आप हरियाणा स्प्रे पंप सब्सिडी स्कीम के तहत आवेदन कर सकते हैं|

लिया गया स्रोत

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हरियाणा किसानों का फसल ऋण पर ब्याज और पेनल्टी माफ
Haryana Kisan Rin Byaj Mafi: हरियाणा के मुख्यमंत्री बतौर वित्त मंत्री द्वारा 23 फरवरी 2024 को दूसरे कार्यकाल का अंतिम बजट 2024-25 पेश किया गया| यह बजट एक लाख 89000 का होगा| इस अंतरिम बजट में सरकार द्वारा लोगों को बड़ी राहत देते हुए कोई टैक्स नहीं लगाया गया| इस साल का बजट 11% अधिक पेश किया गया है पिछले बजट के मुकाबले| मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी द्वारा बजट पेश करते हुए राज्य के सभी किसानों की कृषि ऋण पर ब्याज माफ करने का ऐलान किया गया| इसके साथ ही अगर किसी किसान पर कोई पेनल्टी लगी है तो उसे भी माफ किया जाएगा|

सरकार ने उन किसानों का ब्याज माफ करने का निर्णय लिया है जिन्होंने 30 सितंबर 2023 को अपना ऋण स्वीकृत किया है और 31 सितंबर से पहले ऋण राशि जमा कर देंगे। 31 मई 2024. संपूर्ण ऋण माफी प्रक्रिया और पात्रता जानने के लिए आवेदक लेख को ध्यान से पढ़ सकते हैं।

हरियाणा किसान ऋण ब्याज माफी 2024

हरियाणा सरकार राज्य के किसानों के विकास और कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू करती है। अब 5 लाख गांव और गरीब किसानों को मासिक ऋण के ब्याज से राहत मिलेगी और कृषि कार्यों के लिए उनके बैंक खाते में राशि प्राप्त होगी। जो किसान समय पर किश्तें नहीं भर पाए, स्टेटमेंट लेने से चूक गए या फसल के कारण बकाया राशि नहीं चुका पाए, ऐसे परिवारों को इसका लाभ मिलेगा और उनका कर्ज माफ कर दिया जाएगा।
राज्य सरकार ने हरियाणा के किसानों के लिए बजट को मंजूरी दे दी है और सभी गरीब और पिछड़े किसानों को आर्थिक रूप से समर्थन दिया जाएगा। हरियाणा किसान ऋण माफी 2024 के संबंध में अधिक जानकारी जानने के लिए आवेदक लेख पढ़ सकते हैं। नीचे पात्रता और ऋण माफी प्रक्रिया की जाँच करें।
योजना का नाम हरियाणा किसान ऋण ब्याज माफी
किसने शुरू की मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी खट्टर
लाभार्थी राज्य के किसान
उद्देश्य किसानों के कृषि ऋण पर लगे ब्याज और पेनल्टी को माफ करना
लाभान्वित किसान 5.47 लाख किसान
आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन
आधिकारिक वेबसाइट जल्द

हरियाणा किसान ऋण ब्याज माफी योजना का उद्देश्य

राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी द्वारा राज्य की किसानों को बड़ी राहत देते हुए कृषि ऋण लगे ब्याज पर छूट प्रदान की जाएगी| इसके साथ ही किसान पर लगी कोई भी पेनल्टी को भी माफ किया जाएगा| राज्य सरकार द्वारा किसानों को कृषि ऋण पर लगे ब्याज को माफ कर उन्हें कर्ज मुक्त करना है| ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान ऋण पर लगे ब्याज का भुगतान न कर केवल ऋण का भुगतान कर ऋण मुक्त हो पाए| क्योंकि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण किसान ऋण पर लगे ब्याज का भुगतान नहीं कर पाते हैं| जिसे उन्हें कई पेनल्टी का सामना करना पड़ता है|

हरियाणा किसान ऋण ब्याज माफी योजना लाभ एवं विशेषताएं

  • इस योजना के तहत केवल उन्हीं किसानों का ऋण पर ब्याज और पेनल्टी माफ किया जाएगा जिन्होंने सितंबर 2023 तक के लिए ऋण लिया है|
  • इस योजना के तहत किसान लिए गए कर्ज को 31 मई 2024 तक जमा करवा सकते हैं| उसके बाद किसान नए सिरे से ब्याज ले सकते है|
  • किसान ऋण ब्याज माफी योजना के तहत 5.47 लाख किसानों के कर्ज का ब्याज और पेनल्टी माफ किया जाएगा|
  • हरियाणा किसान फसल ऋण ब्याज माफी से राज्य के किसानों को कर्ज से मुक्ति मिलेगी|

हरियाणा किसान ऋण ब्याज माफी योजना पात्रता

  • हरियाणा राज्य की मूल निवासी किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होंगे|
  • केवल वही किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होंगे जिन्होंने 30 दिसंबर 2023 तक के लिए ऋण लिया है|
  • बिना किसी भेदभाव के राज्य के सभी जाति वर्ग के किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं|
  • राज्य की ऐसे किसान जो सरकारी सेवा में कार्यरत हैं या सरकारी पेंशन लेते हैं वह इस योजना का लाभ नहीं ले सकते|

हरियाणा किसान ऋण ब्याज माफी योजना दस्तावेज

  • परिवार पहचान पत्र
  • आधार कार्ड
  • निवास प्रमाण पत्र
  • ऋण संबंधी दस्तावेज
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • फसल पंजीकरण संख्या

हरियाणा किसान ऋण ब्याज माफी योजना आवेदन कैसे करें

  • अगर आप हरियाणा राज्य के निवासी हैं और आपने सितंबर 2023 तक के लिए ऋण ले रखा है तो नीचे बताइए प्रक्रिया अनुसार कर्ज माफी के लिए 31 में 2024 तक आवेदन कर सकते हैं:
    • सबसे पहले आपको बैंक शाखा में जाना है जहां से अपने कृषि ऋण लिया है|
    • वहां आपको हरियाणा किसान ऋण ब्याज माफी के लिए आवेदन फार्म प्राप्त करना है|
    • अब आपको आवेदन फार्म में मांगी की जानकारी दर्ज करनी है|
    • अब आपको फॉर्म के साथ आवश्यक दस्तावेजों को सलंग्न करना है|
    • अब आपको आवेदन फार्म के साथ 30 सितंबर 2023 तक के लिए दिए गए कर्ज की राशि को जमा करना है|
    • इस प्रकार से आप किसान ऋण ब्याज मासी योजना का लाभ ले सकते हैं|
    • अगर किसान पर किसी प्रकार की कोई पेनल्टी होगी तो उसे भी माफ किया जाएगा|

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Haryana Tractor Subsidy Scheme 2024

 

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हरियाणा सरकार का उद्देश्य राज्य के लघु-मध्यम किसानों (एससी किसानों) की आय को बढ़ाना है, Haryana Tractor Subsidy 2024 Yojana के माध्यम से 45 एच.पी या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टरों पर 01 लाख रूपये का अनुदान दिया जाएगा । कृषि और किसान कल्याण विभाग, पंचकुला, 2024-25 वर्ष के दौरान हरियाणा ट्रेक्टर सब्सिडी योजना के तहत प्रथम चरण में  सभी जिलों में अनुसूचित जाति के किसानों को नया ट्रैक्टर (45 एचपी या उससे से अधिक) के लिए लाख रुपये तक की सहायता प्रदान करेगा। बादमे सभी कैटेगरी के किसानों को दिया जाएगा ऑनलाइन फॉर्म भरने का लिंक निचे दिया गया है।

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी योजना 2024 के लिए जो उमीदवार योग्य हैं, 26 फरवरी, 2024 से ऑनलाइन फॉर्म भरना शुरू कर सकते हैं। ट्रैक्टर सब्सिडी के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 11 मार्च, 2024 है। अन्य सभी जानकारी निचे दी गयी है। हम इस पोस्ट में Haryana Tractor Subsidy Yojana 2024 के बारे में विस्तार से जानेंगे पूरी जानकारी के लिए पोस्ट अंत तक पढ़े|

 

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी योजना 2024

योजना का नाम हरियाणा ट्रैक्टर अनुदान योजना 2024
किसने शुरू की हरियाणा सरकार
लाभार्थी राज्य के अनुसूचित जाति के किसान
उद्देश्य ट्रैक्टर खरीदने पर अनुदान राशि प्रदान करना
आवेदन शुरू तिथि 26 फरवरी 2024
आवेदन अंतिम तिथि 11 मार्च 2024
लाभ एक लाख रुपए
आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन
आधिकारिक वेबसाइट agriharyana.gov.in

ऑनलाइन फॉर्म शुल्क

फॉर्म फीस रु. 0/-
शुल्क भुगतान मोड Online

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी योजना 2024 का उद्देश्य

हरियाणा सरकार द्वारा ट्रैक्टर सब्सिडी योजना शुरू करने का मुख्य उद्देश्य राज्य के अनुसूचित जाति के किसानों को ट्रैक्टर खरीदने के लिए आर्थिक सहायता राशि प्रदान करना है| आज के समय में ट्रैक्टर के बिना खेती करना काफी मुश्किल है| अनुसूचित जाति के बहुत से ऐसे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर किसान है जिनके पास खुद का ट्रैक्टर ना होने के बाद भी खेती करते हैं जिससे उन्हें काफी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है| इसलिए हरियाणा सरकार द्वारा ऐसे किसानों को इस योजना के तहत आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जा रही है ताकि वह आज की आधुनिक तकनीकी के साथ खेती कर सकें|

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी योजना लाभ एवं विशेषताएं

  • इस योजना के तहत किसान 45 HP व अधिक क्षमता के ट्रैक्टर की खरीद पर 1 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं|
  • इस योजना के तहत लाभार्थियों का चयन संबंधित उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय कार्यकारी समिति द्वारा किया जाएगा|
  • चयन उपरांत किसान भारत सरकार द्वारा अधिकृत निर्माता से मूल भाव कर अपनी पसंद के निर्माता से खरीद कर सकते हैं|
  • राज्य के केवल अनुसूचित जाति की किसान ही इस योजना का लाभ ले सकते हैं|
  • इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होगा|
  • हरियाणा सरकार द्वारा ट्रैक्टर खरीदने पर एक लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी|

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी योजना पात्रता

  • केवल हरियाणा का मूल निवासी किसान इस योजना का लाभ ले सकता है|
  • राज्य की केवल अनुसूचित जाति की किस की योजना का लाभ ले सकते हैं|
  • किसान का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण होना अनिवार्य है|

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी योजना दस्तावेज

  • परिवार पहचान पत्र
  • मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण संख्या
  • बैंक पासबुक
  • अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र
  • शपथ पत्र
  • पैन कार्ड
  • आधार कार्ड

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी योजना आवेदन कैसे करें

  • सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट agriharyana.gov.in पर जाएं|
  • होम पेज पर Former Corner में दिए Appy For Agriculture Schemes के ऑप्शन पर क्लिक करें|

 

  • अब आपके सामने सभी स्कीम्स आ जाएगी|
  • अब आपको अनुसूचित जाति श्रेणी के किसानों किसानों के समूह को सब्सिडी पर उपकरण मशीनरी प्रदान करने की योजना के सामने View के ऑप्शन पर क्लिक करना है|
  • अब आपके सामने एक नया पेज आएगा|
  • इसमें Click Here To Registration के ऑप्शन पर क्लिक करना है|
  • अब आपके सामने रजिस्ट्रेशन फॉर्म आ जाएगा|
  • फार्म में मांगी गई जानकारी दर्ज करनी है|
  • अब आपको आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करना है|
  • अब सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक कर देना है|
  • इस प्रकार से आप हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी स्कीम के तहत आवेदन कर सकते हैं|

महत्वपूर्ण लिंक

आधिकारिक अधिसूचना अधिसूचना
ऑनलाइन फॉर्म अप्लाई करें ऑनलाइन लिंक
कृषि हरियाणा आधिकारिक वेबसाइट Agri Haryana


FAQ(Frequently Asked Questions
)

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी स्कीम 2024 कब शुरू होगी?

26 फ़रवरी 2024

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी स्कीम 2024 अंतिम तिथि?

11 मार्च 2024

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी स्कीम के तहत कितने अनुदान राशि मिलती है?

1 लाख रुपए

हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी योजना का लाभ किन किसानों को मिलेगा?

राज्य के अनुसूचित जाति के किसानों को

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Brucellosis

 

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ब्रुसेलोसिस रोग का कारण

 

ब्रुसेल्लोसिस गाय, भैंस, भेड़, बकरी, शुकर एवं कुत्तों में फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी हैं। ये एक प्राणीरूजा अथवा जीव जनति (Zoonotic) बीमारी है जो पशुओं से मनुष्यों एवं मनुष्यों से पशुओं में फैलती है। इस बीमारी से ग्रस्त पशु 7-9 महीने के गर्भकाल मैं गर्भपात हो जाता है। ये रोग पशुशाला में बड़े पैमाने पर फैलता है तथा पशुओं में गर्भपात हो जाता है जिससे भारी आर्थिक हानि होती है। ये बीमारी मनुष्य के स्वास्थ्य एवं आर्थिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बमारी है। विश्व स्तर पर लगभग 5 लाख मनुष्य हर साल इस रोग से ग्रस्त हो जाते हैं।

ब्रुसेलोसिस रोग का कारण

गाय भैंस में ये रोग ब्रूसेल्ला एबोरटस नामक जीवाणु द्वारा होता है। ये जीवाणू गाभिन पशु के बच्चेदानी में रहता है तथा अंतिम तिमाही में गर्भपात करता है। एक बार संक्रमित हो जाने पर पशु जीवन काल तक इस जीवाणू को अपने दूध तथा गर्भाश्य के स्त्राव में निकालता है।

संक्रमण का मार्ग

पशुओं में ब्रुसेल्लोसिस रोग संक्रमित पदार्थ के खाने से, जननांगों के स्त्राव के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्षण सम्पर्क से, योनि स्त्राव से संक्रमित चारे के प्रयोग से तथा संक्रमित वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान द्वारा फैलता है। मनुष्यों में ब्रूसेल्लोसिस रोग सबसे ज्यादा रोगग्रस्त पशु के कच्चे दूध पीने से फैलता है। कई बार गर्भपात होने पर पशु चिकित्सक या पशु पालक असावधानी पूर्व जेर या गर्भाश्य के स्त्राव को छूते है। जससे ब्रुसेल्लोसिस रोग का जीवाणु त्वचा के किसी कटाव या घाव से शरीर में प्रवेश कर जाता है।

संचरण के प्रकार –

(१) रोगी पशु का कच्चा दूध पीने से

(२) रोगी पशु के दूध से बने पदार्थो जैसे क्रीम एवं मक्खन खाने से

(३) गर्भपात हुए पशु के जेर मरे हुए बच्चे एवं बीमार गाय या भैंस के गर्भ से निकले तरल के संपर्क में आने से

(४) जीवाणु युक्त चारा खाने एवं जीवाणु युक्त पानी पीने से

(५)कृत्रिम गर्भाधान में जीवाणु युक्त वीर्य का इस्तेमाल करने से

(६) रोगी सांड के गाय और भैस से मिलाप करने से

लक्षण

पशुओं में गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में गर्भपात होना इस रोग का प्रमुख लक्षण है। पशुओं में जेर का रूकना एवं गर्भाशय की सूजन एवं नर पशुओं में अंडकोष की सूजन इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं। पैरों के जोड़ों पर सूजन आ जाती है जिसे हाइग्रोमा कहते हैं। मनुष्य को इस रोग में तेज बुखार आता है जो बार बार उतरता और चढ़ता रहता है तथा जोड़ों और कमर में दर्द भी होता रहता है।

पशुओं में लक्षण –

(१) पशु का तीसरी तिमाही (६-८ महीने) में गर्भपात हो जाता है |

(२) मरा हुआ बच्चा या समय से पहले ही कमजोर बच्चा पैदा होता है|

(३) दूध की पैदावार कम हो जाती है |

(४) पशु बाँझ हो जाता है |

(५) नर पशु में बृषणों में सूजन हो जाती है, और प्रजनन सकती कम हो जाती है |

(६) सूअर में गर्भपात के साथ जोड़ो और बृषणों में सूजन पाई जाती है|

(७) भेड़, बकरियों में भी गर्भपात हो जाता है |

मनुष्यों में लक्षण –

1) बुखार का रोज बढ़ना और घटना इस बीमारी का मुख्य लक्षण है|

(२) थकान और कमजोरी

(३) रात को पसीना आना और<strong> </strong>शरीर में कंपकपी होना

(४) भूख न लगना और वज़न घटना

(५) पीठ दर्द एवं जोड़ो का दर्द होना

(६) बृषणों में सूजन एवं रीढ़ की हड्डी में सूजन भी मुख्य लक्षणों में से एक है |

निदान

इस रोग का निदान अंतिम तिमाही में गर्भपात का इतिहास, रोगी पशु के योनि स्त्राव / दूध / रक्त / जेर की जांच एवं रोगी मनुष्य के वीर्य / रक्त की जांच करके की जाती है। गर्भपात के बाद चमड़े जैसा जेर का निकलना इस रोग की खास पहचान है।

(१) सीरम की जाँच के द्वारा

(२) पशुओं में मिल्क रिंग टेस्ट के द्वारा

(३) पोषक माध्यम और प्रायोगिक पशु के द्वारा रोगाणु के पृथक्करण द्वारा

(४) आण्विक टेस्ट के द्वारा (उदाहरण – पी. सी. आर.) |

प्रबंधन

  • पशुओं में ब्रूसैल्लौसिस की कोई सफल प्रमाणित चिकित्सा नहीं है। मनुष्यों में एंटीबायोटिक दवाओं के सहारे कुछ हद तक इस रोग के चिकित्सा में सफलता पायी गयी है।
  • स्वस्थ्य गाय भैसो के बच्चों (बछड़े/बछड़ियों एवं कटड़े/कटड़ियों) में 4-8 माह की आयु में ब्रुसेल्ला एस-19 वैक्सीन से टीकाकरण करवाना चाहिए।
  • नए खरीदे गए पशुओं को ब्रुसेल्ला संक्रमण की जांच किये बिना अन्य स्वस्थ्य पशुओं के साथ कभी नहीं रखना चाहिए।
  • अगर किसी पशु को गर्भकाल के तीसरी तिमाही में गर्भपात हुआ हो तो उसे तुरंत फार्म के बाकी पशुओं से अलग कर दिया जाना चाहिए। उसके स्त्राव द्वारा अन्य पशुओं में सक्रमण फैल जाता है।
  • गर्भाशय से उत्पन्न मृत नवजात एवं जैर को चूने के साथ मिलाकर गहरे जमीन के अन्दर दबा देना चाहिए जिससे जंगली पशु एवं पक्षी उसे फैला न सके।
  • अगर पशु का गर्भपात हुआ है इस स्थान को फेनाइल द्वारा विसंक्रमित करना चाहिए।
  • रोगी मादा पशु के कच्चे दूध को स्वस्थ्य नवजात पशुओं एवं मनुष्यों को नहीं पिलाना चाहिए।
  • मादा पशु के बचाव के लिए 6-9 माह के मादा बच्चों को इस बीमारी के विरूद्ध टीकाकरण करवाना चाहिए। नर पशु या सांड का टीकाकरण कभी नहीं कराना चाहिए।
  • अगर पशु को गर्भपात हुआ है तो खून की जांच अवश्य करानी चाहिए।
  • ब्याने वाले पशुओं में गर्भपात होने पर पशुपालकों को उनके संक्रमित स्त्राव, मलमूत्र आदि के सम्पर्क से बचाना चाहिए  क्योंकि इससे उनमें भी संक्रमण हो सकता है।
  • आसपास की धूल, मिट्टी, भूसा चारा आदि को जला देना चाहिए तथा आसपास के स्थान को भी जीवाणुरहित करना चाहिए।

पशु चिकित्सक के लिए आवश्यक निर्देश

  • अगर गर्भपात तीसरी तिमाही का है तो पशुचिकित्सक को सावधान हो जाना चाहिए। 30 प्रतिशत मौकों पर ये ब्रुसेल्लोसिस होती है।
  • दोनो हाथ में बिना स्लिव या गाइनाकोलोजिकल दस्ताने पहने (योनि द्वार में हाथ डालना चाहिए)
  • जेर निकालते समय नाक व मुंह पर मास्क या रूमाल जरूर बांधना चाहिए।
  • जेर निकालने के बाद हाथ मुंह अच्छी तरह एंटीसेप्टिक घोल से धोना चाहिए।
  • अगर स्वयं को लम्बे समय तक बुखार हो, अंडकोष में सूजन हो तो ब्रुसेल्ला टेस्ट अवश्य कराना चाहिए।

मानव में रोग का कारण

  • मनुष्यों में ब्रूसेल्लोसिस रोग सबसे ज्यादा रोगग्रस्त पशु के कच्चा दूध पीने से फैलता है. कई बार गर्भपात होने पर पशु चिकित्सक या पशुपालक असावधानी पूर्व जेर या गर्भाशय के स्त्राव को छूते हैं, जिससे ब्रुसेल्लोसिस रोग का जीवाणु त्वचा के किसी कटाव या घाव से भी शरीर में प्रवेश कर जाता है.

ब्रूसेल्लोसिस रोग की जांच

  • इस रोग का निदान रोगी पशु के योनि स्त्राव/दूध/रक्त/जेर की जाँच एवं रोगी मनुष्य के वीर्य/रक्त की जाँच करके की जा सकती है.

उपचार व रोकथाम :

  • यदि पशु में गर्भपात के लक्षण शुरू हो गए हो तो उसमें इसे ठीक कर पाना कठिन होता है| अत: पशु पालकों को उन कारणों से दूर रहना चाहिए जिनसे गर्भपात होने की सम्भावना होती है| गर्भपात की रोकथाम के लिए हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए :-
    1. गौशाला सदैव साफ सुथरी रखनी चाहिए तथा उसमें बीच-बीच में कीटाणु नाशक दवा का छिड़काव करना चाहिए|
    2. गाभिन पशु की देखभाल का पूरा ध्यान रखना चाहिए तथा उसे चिकने फर्श पर नहीं बांधना चाहिए|
    3. गाभिन पशु की खुराक का पूरा ध्यान रखना चाहिए तथा उसे सन्तुलित आहार देना चाहिए|
    4. मद में आए पशु का सदैव प्रशिक्षित कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन द्वारा ही गर्भधान करना चाहिए|
    5. गर्भपात की सम्भावना होने पर शीघ्र पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए|
    6. यदि किसी पशु में गर्भपात हो गया हो तो उसकी सूचना नजदीकी पशु चिकित्सालय में देनी चाहिए ताकि इसके कारण का सही पता चल सके| गिरे हुए बच्चे तथा जेर को गड्ढे में दबा देना चाहिए तथा गौशाला को ठीक प्रकार से किटाणुनाशक दवा से साफ करना चाहिए|

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Avian influenza

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चर्चा में क्यों ?

हाल ही में वर्ल्ड ऑर्गनाइज़ेशन फॉर एनिमल हेल्‍थ (World Organization for Animal Health-OIE) ने घोषणा की है कि भारत बर्ड फ्लू के नाम से पहचाने जाने वाले खतरनाक एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian Influenza) यानि H5N1 वायरस से मुक्त हो गया है।

प्रमुख बिंदु

  • यह घोषणा कुछ समय पहले झारखंड, बिहार और ओडिशा में इस बीमारी के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिये किये गए उपायों का एक परिणाम है।
  • यह स्थिति केवल तब तक जारी रहेगी जब तक एवियन इन्फ्लूएंजा के एक और प्रकोप की सूचना जारी नहीं कर दी जाती है। इससे पहले वर्ष 2017 में भी भारत को इस बीमारी से मुक्त घोषित किया गया था।
  • यह घोषणा न केवल पोल्ट्री उद्योग के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि इसलिये भी अहम् है क्योंकि मनुष्य के भी इस बीमारी से संक्रमित होने की संभावना रहती है। हालाँकि इस बिमारी के रोगजनक मानव-से-मानव में संचरित होने में सक्षम नहीं होते है, यह केवल जानवरों से मनुष्यों में ही फ़ैल सकते हैं।

 

एवियन इन्फ्लूएंजा के बारे में

  • एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian influenza-AI) एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो खाद्य-उत्पादन करने वाले पक्षियों (मुर्गियों, टर्की, बटेर, गिनी फाउल, आदि) सहित पालतू पक्षियों और जंगली पक्षियों की कई प्रजातियों को प्रभावित करती है।
  • यह विषाणु जिसे इन्फ्लूएंजा ए (Influenza- A) या टाइप ए (Type- A) विषाणु कहते है, सामान्यतः पक्षियों में पाया जाता है, लेकिन कभी-कभी यह मानव सहित अन्य कई स्तनधारियों को भी संक्रमित कर सकता है। जब यह मानव को संक्रमित करता है तो इसे इन्फ्लूएंजा (श्लेष्मिक ज्वर) कहा जाता है।

विषाणु

    • ‘विषाणु’ एक सूक्ष्मजीव है, जो जीवित कोशिकाओं के भीतर ही अपना विकास एवं प्रजनन करता है।
    • ‘विषाणु’ खुद को जीवित रखने एवं अपनी प्रतिकृति तैयार करने हेतु जीवित कोशिकाओं पर आक्रमण करते हैं तथा उनकी रासायनिक मशीनरी का उपयोग करते हैं।
    • ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं- DNA वायरस व RNA वायरस।
    • विषाणुओं के वर्गीकरण में ‘इन्फ्लूएंजा विषाणु’ RNA प्रकार के विषाणु होते हैं तथा ये ‘ऑर्थोमिक्सोविरिदे’ (Orthomyxoviridae) वर्ग से संबंधित होते हैं। इन्फ्लूएंजा विषाणु के तीन वर्ग निम्नलिखित हैं:-
    1. इन्फ्लूएंजा विषाणु A: यह एक संक्रामक बीमारी है। ‘जंगली जलीय पशु-पक्षी’ इसके प्राकृतिक धारक होते हैं। मानव में संचरित होने पर यह काफी घातक सिद्ध हो सकती है।
    2. इन्फ्लूएंजा विषाणु B: यह विशेष रूप से मनुष्यों को प्रभावित करता है तथा इन्फ्लुएन्ज़ा-ए से कम सामान्य तथा कम घातक होता है।
    3. इन्फ्लूएंजा विषाणु C: यह सामान्यतः मनुष्यों, कुत्तों एवं सूअरों को प्रभावित करता है। यह अन्य इन्फ्लूएंजा प्रकारों से कम सामान्य होता है तथा आमतौर पर केवल बच्चों में हल्के रोग का कारण बनता है।
    • इन्फ्लूएंजा A वायरस को दो प्रकार के प्रोटीन HA (Hemagglutinin) और NA (Neuraminidase) के आधार पर उप-प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
      • उदाहरण के लिये, एक वायरस जिसमें HA 7 प्रोटीन और NA 9 प्रोटीन पाया जाता है, उसे उप-प्रकार H7N9 के रूप में नामित किया जाता है।
      • एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के उप-प्रकार में A(H5N1), A(H7N9), और A(H9N2) शामिल हैं।
      • HPAI A (H5N1) वायरस मुख्य रूप से पक्षियों में होता है और उनके बीच अत्यधिक संक्रामक भी है।
      • HPAI एशियन H5N1 मुर्गी पालन के लिये विशेष रूप से घातक है।
    • एवियन इन्फ्लूएंजा के प्रकोप से पोल्ट्री उद्योग को (विशेष रूप से) विनाशकारी परिणामों का सामना करना पड़ता हैं।

निवारण (Prevention):

  • बीमारी के प्रकोप से बचाने के लिये सख्त जैव-सुरक्षा (Biosecurity) उपाय अपनाने और अच्छी स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता होती है।

उन्मूलन (Eradication):

  • यदि जानवरों में इसके संक्रमण का पता चलता है, तो वायरस से संक्रमित और संपर्क वाले जानवरों को चुनकर अलग करने की नीति का अनुपालन किया जाना चाहिये ताकि वायरस के तेज़ी से प्रसार को नियंत्रित किया जा सकें और इसे नष्ट करने के प्रभावी उपाय अपनाए जा सकें।

वर्ल्ड ऑर्गनाइज़ेशन फॉर एनिमल हेल्‍थ

  • यह दुनिया भर में पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हेतु उत्तरदाई एक अंतर सरकारी संगठन (Iintergovernmental Organisation) है।
  • इसे विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organizatio-(WTO) द्वारा संदर्भित संगठन (Reference Organisation) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • वर्ष 2018 में कुल 182 देश इसके सदस्य थे।
  • इसका मुख्यालय पेरिस, फ्राँस में है।

स्रोत : लिया गया लेख

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