farmer honor conference(kisan samman sammelan)

 “पीएम किसान की 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की 17वीं किस्त जारी की”

“पीएम किसान सम्मान निधि दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना बनकर उभरी है”“मुझे खुशी है कि पीएम किसान सम्मान निधि में सही लाभार्थी तक पहुंचने के लिए प्रौद्योगिकी का सही इस्तेमाल किया गया है”“मेरा सपना है कि दुनिया भर में हर खाने की मेज पर भारत का कोई न कोई खाद्यान्न या खाद्य उत्पाद हो”“माताओं और बहनों के बिना खेती की कल्पना करना असंभव है”“बनास डेयरी के आने के बाद बनारस के कई दूध उत्पादकों की आय में 5 लाख रुपये तक की वृद्धि हुई है”“काशी ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि यह हेरिटेज (विरासत) शहर शहरी विकास की नई इबारत भी लिख सकता है”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वाराणसी, उत्तर प्रदेश में किसान सम्मान सम्मेलन को संबोधित किया और लगभग 9.26 करोड़ लाभार्थी किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 17वीं किस्त जारी की, जिसकी राशि 20,000 करोड़ रुपये से अधिक है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की 30,000 से अधिक महिलाओं को कृषि सखी के रूप में प्रमाण पत्र भी प्रदान किए। इस कार्यक्रम से देशभर के किसान तकनीक के माध्यम से जुड़े थे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने संसदीय चुनाव जीतने के बाद पहली बार संसदीय क्षेत्र में आने पर काशी के लोगों को बधाई दी। उन्होंने लगातार तीसरी बार उन्हें चुनने के लिए लोगों का आभार जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “अब तो लगता है कि मां गंगा ने भी मुझे अपना लिया है और मैं काशी के लिए स्थानीय हो गया हूं।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि 18वीं लोकसभा के लिए हाल ही में संपन्न हुए आम चुनाव भारत के लोकतंत्र की विशालता, क्षमताओं, व्यापकता और जड़ों का प्रतीक हैं और हमारा देश इसे दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है। इन चुनावों में 64 करोड़ से अधिक लोगों के मतदान किए जाने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कहीं और नहीं होते हैं, जिसमें नागरिकों की इतनी बड़ी भागीदारी होती है। इटली में जी-7 शिखर सम्मेलन में अपनी हालिया यात्रा को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में मतदाताओं की संख्या सभी जी-7 देशों के मतदाताओं की संख्या से डेढ़ गुना अधिक है, तथा यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों के मतदाताओं की संख्या से ढाई गुना अधिक है। प्रधानमंत्री मोदी ने 31 करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं की भारी भागीदारी पर प्रकाश डाला और कहा कि यह दुनिया में किसी एक देश में महिला मतदाताओं की सबसे अधिक संख्या है। उन्होंने कहा कि यह संख्या अमेरिका की पूरी आबादी के आसपास है। श्री मोदी ने कहा, “भारत के लोकतंत्र की ताकत और सुंदरता न केवल पूरी दुनिया को आकर्षित करती है, बल्कि अपना प्रभाव भी छोड़ती है।” प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लोकतंत्र के उत्सव में भाग लेने और इसे एक बड़ी सफलता बनाने के लिए वाराणसी के लोगों को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, “वाराणसी के लोगों ने न केवल एक सांसद, बल्कि खुद प्रधानमंत्री को भी चुना है।”

प्रधानमंत्री ने चुनावी जनादेश को ‘अभूतपूर्व’ बताते हुए कहा कि इससे तीसरी बार निर्वाचित सरकार का चुनाव हुआ है और यह दुनिया के लोकतंत्रों में एक दुर्लभ उपलब्धि है। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत में ऐसी हैट्रिक 60 साल पहले हुई थी। भारत जैसे देश में, जहां युवाओं की आकांक्षाएं इतनी ऊंची हों, अगर कोई सरकार 10 साल के शासन के बाद फिर से सत्ता में आती है, तो यह बहुत बड़ी जीत होती है, बहुत बड़ा विश्वास होता है। और, आपका यह विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुझे ऊर्जा देता है।”

प्रधानमंत्री ने दोहराया कि वे किसानों, नारी शक्ति, युवाओं और गरीबों को विकसित भारत के स्तंभों के रूप में अहमियत देते हैं और याद दिलाया कि सरकार बनने के बाद उसका पहला फैसला किसानों और गरीब परिवारों से जुड़ा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम आवास योजना के तहत 3 करोड़ अतिरिक्त परिवारों या पीएम किसान सम्मान निधि की किस्तों से जुड़े इन फैसलों से करोड़ों लोगों को मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित और प्रौद्योगिकी के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े किसानों का अभिवादन किया। उन्होंने बताया कि करोड़ों किसानों के खाते में 20,000 करोड़ रुपये जमा हो गए हैं। उन्होंने कृषि सखी पहल के बारे में भी बात की, जो 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहल लाभार्थी महिलाओं के लिए आय का गरिमापूर्ण स्रोत सुनिश्चित करेगा और भरोसा दिलाएगा।

प्रधानमंत्री ने करोड़ों किसानों के बैंक खातों में 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक के हस्तांतरण का उल्लेख करते हुए कहा, “पीएम किसान सम्मान निधि दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना के रूप में उभरी है।” इस धनराशि में से अकेले वाराणसी के परिवारों को 700 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने पात्र लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने में प्रौद्योगिकी के उपयोग की सराहना की और विकसित भारत संकल्प यात्रा का भी श्रेय दिया, जिसके कारण 1 करोड़ से अधिक किसानों ने पीएम किसान योजना के तहत खुद को पंजीकृत कराया। उन्होंने कहा कि पहुंच बढ़ाने के लिए नियमों और विनियमों को सरल बनाया गया है। श्री मोदी ने कहा, “जब इरादे और विश्वास सही हों तो किसान कल्याण से संबंधित कार्य तेजी से होते हैं।”

21वीं सदी में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने और दालों और तिलहनों में आत्मनिर्भरता की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने एक प्रमुख कृषि-निर्यातक देश बनने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार मिल रहा है और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (एक जिला एक उत्पाद) योजना तथा हर जिले में निर्यात केंद्रों के माध्यम से निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कृषि में भी जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट के मंत्र पर जोर देते हुए कहा, “मेरा सपना है कि दुनिया भर में हर खाने की मेज पर कम से कम एक भारतीय खाद्य उत्पाद अवश्य हो।” उन्होंने यह भी कहा कि किसान समृद्धि केंद्रों के माध्यम से मोटे अनाज, हर्बल उत्पादों और प्राकृतिक खेती को समर्थन देने के लिए एक विशाल नेटवर्क बनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कृषि में महिलाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी को देखते हुए उनके महत्व और समर्थन को रेखांकित किया और उनके योगदान को बढ़ाने के लिए कृषि के दायरे का विस्तार करने का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि सखी कार्यक्रम ड्रोन दीदी कार्यक्रम की तरह ही इस दिशा में एक कदम है। आशा कार्यकर्ताओं और बैंक सखियों के रूप में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र अब कृषि सखियों के रूप में उनकी क्षमताओं को देखेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि सखियों के रूप में स्वयं सहायता समूहों को 30,000 से अधिक प्रमाण पत्र प्रदान करने का उल्लेख किया और बताया कि वर्तमान में 11 राज्यों में चल रही यह योजना देश भर के हजारों स्वयं सहायता समूहों से जुड़ेगी और 3 करोड़ लखपति दीदियों को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रधानमंत्री ने काशी और पूर्वांचल के किसानों के प्रति केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और साथ ही, बनास डेयरी संकुल, पेरिशेबल कार्गो सेंटर और इंटीग्रेटेड पैकेजिंग हाउस का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “बनास डेयरी ने बनारस और उसके आसपास के किसानों और पशुपालकों की किस्मत बदल दी है। आज ये डेयरी हर दिन करीब 3 लाख लीटर दूध इकट्ठा कर रही है। अकेले बनारस के 14 हजार से ज्यादा पशुपालक परिवार इस डेयरी से पंजीकृत हैं। अब बनास डेयरी अगले डेढ़ साल में काशी के 16 हजार और पशुपालकों को जोड़ने जा रही है। बनास डेयरी के आने के बाद बनारस के कई दुग्ध उत्पादकों की आय में 5 लाख रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है।”

मछली पालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने पीएम मत्स्य संपदा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड के लाभों का उल्लेख किया। उन्होंने वाराणसी में मछली पालन से जुड़े लोगों की सहायता के लिए चंदौली में लगभग 70 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक मछली बाजार के निर्माण की भी जानकारी दी।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना वाराणसी में खूब फल-फूल रही है। उन्होंने बताया कि इस योजना में करीब 40 हज़ार स्थानीय लोगों ने पंजीकरण कराया है और 2,500 घरों में सोलर पैनल लग चुके हैं और 3,000 घरों पर काम चल रहा है। इससे लाभार्थी परिवारों को शून्य बिजली बिल और अतिरिक्त आय का दोहरा लाभ मिल रहा है।

वाराणसी और उसके निकटवर्ती गांवों में कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में पिछले 10 वर्षों में किए गए कार्यों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने वाराणसी में देश की पहली सिटी रोपवे परियोजना के अंतिम चरण में पहुंचने, गाजीपुर, आजमगढ़ और जौनपुर शहरों को जोड़ने वाली रिंग रोड, फुलवरिया और चौकाघाट में फ्लाईओवर के निर्माण का काम पूरा होने, काशी, वाराणसी और कैंट रेलवे स्टेशनों को नया रूप देने, बाबतपुर हवाई अड्डे से हवाई यातायात और व्यापार को आसान बनाने, गंगा घाटों के किनारे विकास, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में नई सुविधाएं, शहर के पुनर्निर्मित कुंड और वाराणसी में विभिन्न स्थानों पर विकसित की जा रही नई प्रणालियों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी में खेलों से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास और नए स्टेडियम से युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

ज्ञान की राजधानी के रूप में काशी की प्रतिष्ठा को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने इस प्राचीन शहर की प्रशंसा की और कहा कि यह एक ऐसा शहर बन गया है, जिसने पूरी दुनिया को सिखाया कि कैसे एक विरासत शहर शहरी विकास की नई कहानी लिख सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “काशी में चहुंओर विकास के साथ-साथ विरासत का मंत्र भी नजर आता है। और, इस विकास का लाभ सिर्फ काशी को ही नहीं हो रहा है। पूरे पूर्वांचल से जो परिवार अपने काम-काज के लिए, अपनी जरूरतों के लिए काशी आते हैं, उनको भी इन सारे कार्यों से बहुत मदद मिल रही है।” श्री मोदी ने कहा, “बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से काशी के विकास की ये नई गाथा निरंतर जारी रहेगी।”

इस अवसर पर, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य एवं श्री ब्रजेश पाठक तथा उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रीगण के साथ-साथ कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम किसान निधि की 17वीं किस्त जारी करने की अपनी पहली फाइल पर हस्ताक्षर किए, जो किसान कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसी प्रतिबद्धता को जारी रखते हुए प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत लगभग 9.26 करोड़ लाभार्थी किसानों को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की 17वीं किस्त जारी की। अब तक, पीएम-किसान के तहत 11 करोड़ से अधिक पात्र किसान परिवारों को 3.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ मिल चुका है।

प्रधानमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की 30,000 से अधिक महिलाओं को कृषि सखी के रूप में प्रमाण पत्र भी प्रदान किए। कृषि सखी कन्वर्जेंस कार्यक्रम (केएससीपी) का उद्देश्य कृषि सखी के रूप में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के माध्यम से ग्रामीण भारत को बदलना है, जिसमें कृषि सखियों को पैरा-एक्सटेंशन वर्कर के रूप में प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करना शामिल है। यह प्रमाणन पाठ्यक्रम ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम के उद्देश्यों के अनुरूप भी है।


पूरा भाषण पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Read More

Farmer Producer Organization

Table of Contents

कच्चा आढ़तिया एसोसिएशन, सिरसा दुकान नंबर, फर्म का नाम एवं दुरभाष निर्देशिकाClick Hereसमुद्री जीवो से मोती की खेतीसमुद्री जीवों से मोती की खेती करते हैं जिसे सीप मोती कहते हैं | ये समुद्री जीव सीप होता है जिस से सीप के मोती की खेती करते हैं|Click Hereलाल चंदन लाल चंदन एक खूबसूरत पौधा है जो अपनी महकती हुई सुगंध और लाल रंग के लिए प्रसिद्ध है। यह एक छोटा पेड़ होता है जिसकी पत्तियाँ छोटी होती हैं और पूरे साल हरा-भूरा रहता है। लाल चंदन के फूलों का उपयोग धूप, इत्र और पूजा-अर्चना में किया जाता हैClick Hereअश्वगंधा भारत में अश्वगंधा अथवा असगंध जिसका वानस्पतिक नाम वीथानीयां सोमनीफेरा है, यह एक महत्वपूर्ण औषधीय फसल के साथ-साथ नकदी फसल भी है। यह पौधा ठंडे प्रदेशों को छोड़कर अन्य सभी भागों में पाया जाता है…Click Here

फ़ार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइज़ेशन :

FPOs, किसान-सदस्यों द्वारा नियंत्रित स्वैच्छिक संगठन हैं, FPOs के सदस्य इसकी नीतियों के निर्माण और निर्णयन में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
FPOs की सदस्यता लिंग, सामाजिक, नस्लीय, राजनीतिक या धार्मिक भेदभाव के बिना उन सभी लोगों के लिये खुली होती है जो इसकी सेवाओं का उपयोग करने में सक्षम हैं और सदस्यता की ज़िम्मेदारी को स्वीकार करने के लिये तैयार हैं।
FPOs के संचालक अपने किसान-सदस्यों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, प्रबंधकों एवं कर्मचारियों को शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करते हैं ताकि वे अपने FPOs के विकास में प्रभावी योगदान दे सकें।
गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कुछ अन्य राज्यों में FPOs ने उत्साहजनक परिणाम दिखाए हैं और इनके माध्यम से किसान अपनी उपज से बेहतर आय प्राप्त करने में सफल रहे हैं।
उदाहरण के लिये राजस्थान के पाली ज़िले में आदिवासी महिलाओं ने एक उत्पादक कंपनी का गठन किया और इसके माध्यम से उन्हें शरीफा/कस्टर्ड एप्पल के उच्च मूल्य प्राप्त हो रहे हैं।

किसान उत्पादक संगठन :

एफपीओ (FPO) का फुल फॉर्म है – फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन(Farmer Producer Organization).यह किसानों का एक स्वैच्छिक संगठन होता है, जिसे किसान-सदस्य ही नियंत्रित करते हैं.किसान उत्पादक संगठन 11 लोग मिलकर बनाते हैं FPO के सदस्य संगठन की नीतियों और फ़ैसलों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं.
भारत सरकार, छोटे और सीमांत किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, FPO को बढ़ावा दे रही है. FPO से जुड़ने से किसानों की आर्थिक शक्ति बढ़ती है और बाज़ार से उनका जुड़ाव भी बेहतर होता है. इससे किसानों की आमदनी में भी सुधार होता है

FPO से जुड़ने के फ़ायदे :

औसत जोत आकार की चुनौती का समाधान: भारत में औसत जोत का आकार वर्ष 1970-71 के 2.3 हेक्टेयर (हेक्टेयर) से घटकर वर्ष 2015-16 में 1.08 हेक्टेयर रह गया। साथ ही कृषि क्षेत्र में छोटे और सीमांत किसानों की हिस्सेदारी वर्ष 1980-81 के 70% से बढ़कर वर्ष 2015-16 में 86% हो गई।
FPOs किसानों को सामूहिक खेती के लिये प्रोत्साहित कर सकते हैं और जोत के छोटे आकार से उत्पन्न उत्पादन से उत्पादकता संबंधी चुनौतियों को संबोधित कर सकते हैं।
इसके अलावा कृषि नवोन्मेष और उत्पादकता में वृद्धि से अतिरिक्त रोज़गार सृजन में भी सहयता प्राप्त होगी।
कॉर्पोरेट्स के साथ बातचीत: FPO किसानों को मोलभाव के दौरान बड़े कॉर्पोरेट उद्यमों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह सदस्यों को एक समूह के रूप में बातचीत एवं समझौता करने में सक्षम बनाता है। साथ ही यह आगत और उत्पाद बाज़ार में किसानों की सहायता कर सकता है।
एकत्रीकरण: FPO सदस्य किसानों को कम लागत और गुणवत्तापूर्ण इनपुट उपलब्ध करा सकता है। उदाहरण के रूप में फसलों के लिये ऋण, मशीनरी की खरीद, कृषि-इनपुट (उर्वरक, कीटनाशक आदि) और कृषि उपज का प्रत्यक्ष विपणन के संदर्भ में।
इससे सदस्य समय, लेन-देन की लागत, डिस्ट्रेस सेल, मूल्य में उतार-चढ़ाव, परिवहन, गुणवत्ता रखरखाव आदि के रूप में बचत कर सकेंगे।
सामाजिक प्रभाव: FPO के रूप में एक सामाजिक पूंजी का विकास होगा, क्योंकि इससे FPO में लैंगिक भेदभाव को दूर करने और संगठन के निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिला किसानों की भागीदारी में सुधार हो सकता है।
यह सामाजिक संघर्षों को कम करने के साथ ही समुदाय में बेहतर भोजन एवं पोषण को बढ़ाने में सहायता कर सकता है।
इसके साथ साथ-

  • किसानों का मनोबल बढ़ता है
  • खेती-किसानी में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है
  • एकजुटता से खेती-किसानी से जुड़ी चुनौतियों को हल किया जा सकता है
  • सामाजिक और आर्थिक सहयोग की मिसाल बनती है
  • संसाधनों, जानकारी, और बाज़ार से जुड़ने में मदद मिलती है
  • फ़सलों की विशेषज्ञता हासिल होती है
  • प्रोसेसिंग और वैल्यू ऐडिशन में मदद मिलती है
  • बड़े पैमाने पर काम करने में आसानी होती है
  • बेहतर मोलभाव करने की ताकत मिलती है

एफपीओ की चिंताएं

एफपीओ से जुड़ी कई समस्याएं अभी भी अनसुलझी हैं, जिनमें से कुछ का उल्लेख नीचे किया गया है-
संस्थागत वित्त प्राप्त करने में कठिनाई। बैंक आमतौर पर एफपीओ को ऋण देने से कतराते हैं क्योंकि उनके पास संपार्श्विक के रूप में काम करने के लिए अपनी खुद की संपत्ति नहीं होती है। नतीजतन, एफपीओ को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों या माइक्रो-फाइनेंस कंपनियों से ऋण पर निर्भर रहना पड़ता है।
उन्हें बहुत ऊंची ब्याज दरों पर अपनी कार्यशील पूंजी जुटाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
नियमित कृषि बाजारों में काम करने में असमर्थता। किसान उत्पादक संगठनों को लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों द्वारा किए गए प्रतिरोध के कारण विनियमित मंडियों में काम करने में आमतौर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन व्यापारियों की बाजारों पर महत्वपूर्ण पकड़ होती है।
अनुबंध कृषि विनियमों के अंतर्गत कानूनी मान्यता का अभाव।
यहां तक ​​कि सरकार द्वारा उदार ब्याज अनुदान के साथ सस्ते बैंक ऋण की सुविधा भी, जो व्यक्तिगत किसानों को उपलब्ध है, एफपीओ को नहीं दी जाती है।
इसके अलावा, सहकारी समितियों, स्टार्टअप्स आदि को दी जाने वाली कई अन्य रियायतें, कर छूट, सब्सिडी और लाभ एफपीओ को नहीं दिए गए हैं।

FPOs के संवर्द्धन हेतु सरकार के प्रयास :

वर्ष 2011 से सरकार द्वारा ‘लघु कृषक कृषि व्यापार संघ’ (Small Farmers’ Agri-Business Consortium- SFAC), नाबार्ड, राज्य सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों के तहत FPOs को सक्रियता के साथ बढ़ावा दिया जा रहा है।
केंद्रीय बजट 2018-19 में FPOs के लिये पाँच वर्ष की कर छूट सहित कई सहायक उपायों की घोषणा की गई, जबकि केंद्रीय बजट 2019-20 के तहत अगले पाँच वर्षों में 10,000 नए FPOs की स्थापना करने की बात की गई थी।
एक जनपद एक उत्पाद क्लस्टर: हाल ही में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा FPOs के महत्त्व को रेखांकित किया गया, जिन्हें उत्पादन क्लस्टर में विकसित किया जाना है। उत्पादन क्लस्टर में आकारिक मितव्ययिता का लाभ उठाने और सदस्यों के लिये बाज़ार पहुँच में सुधार हेतु कृषि और बागवानी उत्पादों की खेती की जाती है।
एक जनपद एक उत्पाद क्लस्टर फसलों के उत्पादन में विशेषज्ञता और कृषि उत्पादों के बेहतर प्रसंस्करण, विपणन, ब्रांडिंग तथा निर्यात को बढ़ावा देगा।
सामूहिक कृषि: FPOs के माध्यम से एक ही क्षेत्र में उपस्थित अलग-अलग किसानों के छोटी जोत वाले खेतों का उपयोग करते हुए सामूहिक कृषि को बढ़ावा दिया जा सकता है।
इसके साथ ही आपूर्ति शृंखला को मज़बूत करने और नए बाज़ारों को खोजने पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिये। सामूहिक खेती में महिला किसान प्रमुख भूमिका निभाएंगी।
प्रारंभ में, एफपीओ बनाने और बढ़ावा देने के लिए तीन कार्यान्वयन एजेंसियां ​​होंगी, अर्थात्

    • लघु कृषक कृषि-व्यवसाय संघ (एसएफएसी)
    • राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी)
    • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक ( नाबार्ड )।
    • यदि राज्य चाहें तो वे डी.ए.सी.एंड.एफ.डब्लू. के परामर्श से अपनी कार्यान्वयन एजेंसी भी नामित कर सकते हैं।

कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग (डीएसीएंडएफडब्ल्यू) कार्यान्वयन एजेंसियों को क्लस्टर/राज्य आवंटित करेगा, जो बदले में राज्यों में क्लस्टर-आधारित व्यवसाय संगठन का गठन करेंगे।

आगे की राह :

FPOs की संख्या में वृद्धि: कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि भारत जैसे बड़े देश के लिये हमें एक लाख से अधिक FPOs की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में देश में सक्रिय कुल FPOs की संख्या 10,000 से भी कम है।
इस संदर्भ में सरकार ने FPOs को बढ़ावा देने के लिये कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
संरचनात्मक मुद्दों को संबोधित करना: कई FPOs को अपर्याप्त तकनीकी कौशल, अपर्याप्त पेशेवर प्रबंधन, कमज़ोर वित्तीय व्यवस्था, ऋण की अपर्याप्त पहुँच, जोखिम शमन तंत्र की कमी और बाज़ार तथा बुनियादी ढाँचे का अभाव जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
FPOs के विस्तार के साथ कार्यशील पूंजी, विपणन, बुनियादी ढाँचे आदि से संबंधित अन्य उपरोक्त मुद्दों को संबोधित करना होगा।
क्रेडिट प्राप्त करना FPOs के लिये सबसे बड़ी समस्या रही है। ऐसे में FPOs को ऋण देने हेतु बैंकों में विशेष योजनाओं/उत्पादों को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।
FPOs को अधिक प्रभावी बनाने के लिये उन्हें इनपुट कंपनियों, तकनीकी सेवा प्रदाताओं, विपणन/प्रसंस्करण कंपनियों, खुदरा विक्रेताओं, आदि के साथ जोड़ना होगा।
उन्हें बाज़ारों, कीमतों और अन्य जानकारियों के साथ सूचना प्रौद्योगिकी में दक्षता प्रदान करने की आवश्यकता है।


Click here

Read More

Free Borewell Yojana 2024

 

Table of Contents

निःशुल्क बोरवेल योजना 2024 (Free Borewell Yojana 2024) :

निःशुल्क बोरवेल योजना 2024 (Free Borewell Yojana 2024) : हरियाणा सरकार द्वारा किसानों के लिए फ्री बोरवेल योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत राज्य के किसान अपने खेतों में मुफ्त में बोरवेल लगवा सकते हैं।
अधिक वर्षा के कारण खेतों में पानी जमा हो जाता है जिससे किसानों की फसलें खराब हो जाती हैं। इन सभी समस्याओं को देखते हुए खेतों में बारिश का पानी जमा न हो इसके लिए हरियाणा सरकार ने वाटर रिचार्ज बोरवेल योजना शुरू की है।

Free Borewell Yojana 2024 क्या है?

हरियाणा फ्री बोरवेल योजना के तहत किसान अपने खेतों में फ्री में वाटर रिचार्ज बोरवेल लगवा सकते हैं। इससे वर्षा जल को वाटर रिचार्ज बोरवेल में एकत्रित किया जा सकेगा। इससे खेतों में अत्यधिक जल जमाव की समस्या से छुटकारा मिलेगा और भूमि में जल स्तर भी बढ़ेगा।
इस योजना की खास बात यह है कि इस योजना के तहत वाटर रिचार्ज बोर्ड में लगाने के लिए किसानों को कोई खर्च नहीं देना होगा। हरियाणा फ्री बोरवेल योजना के तहत किसानों के खेतों में बोरवेल बिल्कुल मुफ्त में लगाए जाएंगे।

Free Borewell Yojana के लाभ और विशेषताएं

इस योजना के द्वारा किसानों के खेतों में मुफ्त बोरवेल लगाए जाएंगे।
जल स्तर में गिरावट को रोकने तथा भारी बारिश के दौरान किसानों के खेतों में जल भराव की समस्या के समाधान के लिए “वाटर रिचार्ज बोरवेल योजना” शुरू की गई है।
इस योजना से राज्य के किसानों को पानी की समस्या से राहत मिलेगी।
अतिवृष्टि से फसल की बर्बादी से राहत मिलेगी।
राज्य के जो भी किसान अपने खेतों में बोरवेल लगवाना चाहते हैं उन्हें ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
इस योजना से जल स्तर बढ़ेगा।

Free Borewell Yojana आवेदन कैसे करें?

सबसे पहले सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, हरियाणा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
होम पेज पर महत्वपूर्ण लिंक में वाटर रिचार्ज बोरवेल के लिए पंजीकरण पर क्लिक करें।
इसके बाद आपके सामने वाटर रिचार्ज रजिस्ट्रेशन फॉर्म आ जाएगा।
इसके बाद  फॉर्म में मांगी गई जानकारी दर्ज करें।
इसके बाद आपको जमीन के विवरण के साथ शपथ पत्र अपलोड करना होगा।
अब अंत में आपको सेव इंफॉर्मेशन पर क्लिक करना होगा।
क्लिक करते ही आपका रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा।
अब आपको फॉर्म की एक रसीद मिलेगी जिसे आपको अपने पास सुरक्षित रखना होगा।
इसके बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा किसानों के खेतों का निरीक्षण किया जाएगा।
इसके बाद आवेदन पत्र स्वीकृत होने के बाद दो-चार दिन बाद बोरवेल लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

Free Borewell Yojana के दस्तावेज़ एवं पात्रता

जो किसान हरियाणा राज्य के मूल निवासी हैं वे इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
बोरवेल लगने के बाद आवेदक किसान को उसका रखरखाव स्वयं करना होगा।
परिवार पहचान पत्र (पीपीपी)।
आधार कार्ड।
किसान भूमि विवरण जैसे फर्द/जमाबंदी।
शपत पत्र।
रिचार्ज बोरवेल के निर्माण के लिए (5m * 5m) भूमि क्षेत्र फ्री देना।

निःशुल्क बोरवेल योजना के लिए (Free Borewell Yojana ) महत्वपूर्ण लिंक

Online Apply Click Here
Official Website
Click Here
Read More

PM Kisan FPO Yojana

देश में किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। आज हम आपको ऐसी ही एक योजना से संबंधित जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं जिसका नाम पीएम किसान एफपीओ योजना है। इस लेख को पढ़कर आपको पीएम किसान FPO योजना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। जैसे कि पीएम किसान FPO योजना क्या है?, इसका उद्देश्य, लाभ, विशेषताएं, पात्रता, महत्वपूर्ण दस्तावेज, आवेदन प्रक्रिया आदि। तो दोस्तो यदि आप PM Kisan FPO Yojana से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप से निवेदन है कि आप हमारे इस लेख को अंत तक पढ़े।

 

पीएम किसान एफपीओ योजना

इस योजना के तहत अगर संगठन मैदानी क्षेत्र में काम करता है तो उसमें कम से कम 300 किसान जुड़े होने चाहिए। इसी तरह यह संगठन पहाड़ी क्षेत्र में काम करता है तो 100 किसानो को इससे जुड़े होने चाहिए। तभी वह इस योजना का लाभ उठा सकते है।  इस PM Kisan FPO Yojana 2023 का लाभ उठाने के लिए देश के किसानो को इस योजना के अंतर्गत आवेदन करना होगा। इस योजना के तहत देश के किसान अन्य प्रकार के भी फायदे होंगे जैसे बने संगठनों से जुड़े किसानों को अपनी उपज के लिए बाजार मिलेगा। साथ ही उनके लिए खाद, बीज, दवाई और कृषि उपकरण जैसा जरूरी सामान खरीदना बेहद आसान होगा। एक और बड़ा फायदा होगा कि किसान बिचौलियों से मुक्ति हो जाएंगे। एफपीओ सिस्टम में किसानों को अपनी फसल के लिए अच्छा रेट मिलेगा।

FPO क्या होता है

FPO एक प्रकार का किसान उत्पादक संगठन है जो किसानों के हित में कार्य करता है और कंपनी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड होता है। पीएम किसान FPO योजना के अंतर्गत ऐसे संगठनों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना के माध्यम से संगठनों को 15 लाख रुपए की आर्थिक सहायता सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। अब देश के किसान को खेती में भी कारोबार की तरह लाभ मिलेगा। पीएम किसान एफपीओ योजना का लाभ उठाने के लिए कम से कम 11 किसानों को संगठित होकर अपनी कृषि कंपनी बनानी होगी। एफपीओ संगठनों को सरकार द्वारा वह सभी फायदे भी प्रदान किए जाएंगे जो एक कंपनी को प्रदान किए जाते हैं। इस योजना के अंतर्गत दी जाने वाली राशि 3 सालों मैं प्रदान की जाएगी। इस योजना के माध्यम से देश के 10000 नए किसानो का संगठन बनाया जाएगा।

पीएम किसान एफपीओ योजना विवरण

योजना का नाम पीएम किसान FPO योजना
इनके द्वारा शुरू की गयी केंद्र सरकार द्वारा
लाभार्थी देश के किसान उत्पादक संगठन
उद्देश्य आर्थिक सहायता प्रदान करना

पीएम किसान एफपीओ योजना का उद्देश्य

जैसे की आप सभी लोग जानते है देश के बहुत से ऐसे किसान है जिनकी आर्थिक स्थिति सही नहीं है खेती करने से उन्हें ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा है इन किसानो को आर्थिक राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने इस पीएम किसान एफपीओ योजना 2023 को शुरू की गयी है इस योजना के ज़रिये किसान उत्पादक संगठनों यानी FPO को केंद्र सरकार द्वारा 15 -15 लाख रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान  करना। इस योजना का मुख्य उद्देश्य  कृषि सेक्टर को आगे बढ़ाना। इस योजना के ज़रिये किसानो की आय में वृद्धि करना और किसानो के हित में कार्य करना। इस Pradhanmantri Kisan FPO Scheme 2023 के ज़रिये देश के किसानो को उसी तरह फायदा होगा जैसे कारोबार में होता है।

पीएम किसान एफपीओ योजना के मुख्य तथ्य

  • पीएम किसान FPO योजना को केंद्र सरकार द्वारा आरंभ किया गया है।
  • एफपीओ की फुल फॉर्म फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन होती है।
  • यह संगठन होता है जिसके सदस्य किसान होते हैं।
  • एसपीओ के माध्यम से किसानों को तकनीकी, मार्केटिंग, ऋण, प्रोसेसिंग, सिंचाई आदि जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती है।
  • इस योजना के माध्यम से किसान 15 लाख रुपए तक का ऋण भी ले सकते हैं।
  • एफपीओ को इंडियन कंपनीज एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर करवाया जा सकता है।
  • इसके अलावा इस संगठन के माध्यम से किसानों को बीज, खाद, मशीनरी, मार्केट लिंकेज, ट्रेनिंग, नेटवर्किंग, वित्तीय सहायता आदि जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाती है।
  • इस संगठन का लक्ष्य किसानों को हर कार्य संभव मदद प्रदान करना होता है।
  • यह संगठन किसानों को उत्पादन बढ़ाने में भी सहायता प्रदान करता है।
  • इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले के ब्लॉक में एक एफपीओ होना चाहिए।
  • यह संगठन उन जिलों में प्राथमिकता पर संगठित किया जाएगा जो एस्पिरेशनल होते हैं।
  • एफपीओ के माध्यम से पर्याप्त प्रशिक्षण और हैंड हैंडलिंग प्रदान की जाती है इसके अलावा सीबीओ के स्तर से प्राथमिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
  • नॉर्थईस्ट एवं पहाड़ी इलाकों में एक एफपीओ में कम से कम 100 सदस्य होने चाहिए और मैदानी इलाकों में एक एफपीओ में कम से कम 300 सदस्य होने चाहिए।

  किसान एफपीओ योजना की विशेषताएं

  • केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि मोदी सरकार 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन बनाएगी।
  • साल 2024 तक इस पर 6865 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार हर FPO किसानो को 5 साल के लिए सरकारी समर्थन दिया जायेगा।
  • केंद्र सरकार संगठन के काम को देखने के बाद 15 लाख रुपए की सहायता देगी। इस सहायता की पूरी राशि तीन वर्षों में मिलेगी।
  • इसमें वही सारे फायदे मिलेंगे जो एक कंपनी को मिलते हैं. इससे कुल 30 लाख किसान लाभान्वित होंगे।
  • इस योजना का मकसद किसी उद्योग के बराबर ही खेती से मुनाफा हासिल करना है।
  • देश में कृषि का विस्तार होगा और किसानों के आर्थिक हालात भी बेहतर होंगे।
  • इस योजना के अंतर्गत देश के किसानों को दी जाने वाली धनराशि नकद दी जाएगी । इस योजना में छोटे और सीमांत किसानों के समूह बनेंगे, जिससे उन्हें लाभ मिलेगा।

किसान एफपीओ योजना के लाभ

  • इस योजना का लाभ देश के किसानो को प्रदान किया जायेगा।
  • इस योजना के अंतर्गत देश किसान उत्पादक संगठनो को केंद्र सरकार द्वारा 15 लाख रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी सरकार द्वारा यह धनराशि तीन साल के भीतर प्रदान की जाएगी।
  • पीएम किसान FPO योजना 2023 के तहत अगर संगठन मैदानी क्षेत्र में काम करता है तो उसमें कम से कम 300 किसान जुड़े होने चाहिए। इसी तरह यह संगठन पहाड़ी क्षेत्र में काम करता है तो 100 किसानो को इससे जुड़े होने चाहिए। तभी वह इस योजना का लाभ उठा सकते है।
  • इस योजना के तहत देश के किसान अन्य प्रकार के भी फायदे होंगे जैसे बने संगठनों से जुड़े किसानों को अपनी उपज के लिए बाजार मिलेगा। साथ ही उनके लिए खाद, बीज, दवाई और कृषि उपकरण जैसा जरूरी सामान खरीदना बेहद आसान होगा।
  • देश के जो  इच्छुक लाभार्थी इस योजना का लाभ उठाना चाहते है तो उन्हें इस योजना के अंतर्गत आवेदन करना होगा।

किसान एफपीओ योजना की पात्रता

  • आवेदक पेशे से किसान होना चाहिए।
  • आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए।
  • प्लेन क्षेत्र में एक एफपीओ में कम से कम 300 सदस्य होने चाहिए।
  • पहाड़ी क्षेत्र में एक एसपीओ में कम से कम 100 सदस्य होने चाहिए।
  • एफपीओ के पास स्वयं की कृषि योग्य भूमि होनी अनिवार्य है एवं उसे समूह का हिस्सा होना भी अनिवार्य है।

महत्वपूर्ण दस्तावेज

  • आधार कार्ड
  • निवास प्रमाण पत्र
  • जमीन के कागजात
  • राशन कार्ड
  • आय प्रमाण पत्र
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
  • बैंक खाता विवरण
  • मोबाइल नंबर

पीएम किसान FPO योजना के अंतर्गत आवेदन करने की प्रक्रिया

    • अब आपके सामने होम पेज खुलकर आएगा।
    • होम पेज पर आपको एफपीओ के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
    • इसके पश्चात आपको रजिस्ट्रेशन के विकल्प पर क्लिक करना होग
      • अब आपके सामने रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुल कर आएगा।
      • आपको फॉर्म में निम्नलिखित जानकारी दर्ज करनी होगी।
        • रजिस्ट्रेशन टाइप
        • रजिस्ट्रेशन लेवल
        • फुल नेम
        • जेंडर
        • एड्रेस
        • डेट ऑफ बर्थ
        • पिन कोड
        • डिस्ट्रिक्ट
        • फोटो आईडी टाइप
        • मोबाइल नंबर
        • ईमेल आईडी
        • कंपनी नेम
        • स्टेट
        • तहसील
        • फोटो आईडी नंबर
        • अल्टरनेट मोबाइल नंबर
        • लाइसेंस नंबर
        • कंपनी रजिस्ट्रेशन
        • बैंक नेम
        • अकाउंट होल्डर नेम
        • बैंक अकाउंट नंबर
        • आईएफएससी कोड
      • इसके पश्चात आपको पासबुक या फिर कैंसिल चेक एवं आईडी प्रूफ को स्कैन करके अपलोड करना होगा।
      • अब आपको सबमिट के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
      • इस प्रकार आप एफपीओ योजना के अंतर्गत आवेदन कर पाएंगे।

पीएम किसान FPO योजना के अंतर्गत लॉगिन करने की प्रक्रिया

  • सर्वप्रथम आपको राष्ट्रीय कृषि बाजार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा
  • अब आपके सामने होम पेज खुलकर आएगा।
  • इसके बाद आपको एफपीओ (FPO) के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
  • अब आपको लॉगिन (Login) के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
  • इसके बाद आपके सामने लॉगइन (Login) फॉर्म को लेकर आएगा।
  • अब आपको यूजरनेम पासवर्ड तथा कैप्चा कोड दर्ज करना होगा।
  • इसके बाद आपको लॉगिन के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
  • इस प्रकार आप लॉगिन कर पाएंगे।

पीएम किसान FPO योजना के अंतर्गत ग्रीवेंस दर्ज करने की प्रक्रिया

    • सबसे पहले आपको राष्ट्रीय कृषि बाजार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा
    • अब आपके सामने होम पेज खुलकर आएगा।
    • होम पेज पर आपको कांटेक्ट अस(Contact Us)  के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
    • इसके बाद इफ यू हैव ग्रीवेंस क्लिक हियर (If you have grievance clickHere) के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
    • अब आपको ओपन न्यू टिकट (Open New Ticket) के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
    • इसके बाद आपको अपना यूजर नेम तथा पासवर्ड दर्ज करके साइन इन करना होगा।
    • अब आपके सामने ग्रीवेंस फॉर्म खुलकर आएगा।
    • आपको इस फॉर्म में पूछी गई सभी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज करनी होगी।
    • अब आपको सबमिट के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
    • इस प्रकार आप ग्रीवेंस दर्ज कर पाएंगे।

पीएम किसान FPO योजना के अंतर्गत ग्रीवेंस स्टेटस चेक करने की प्रक्रिया

      • सर्वप्रथम आपको राष्ट्रीय कृषि बाजार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा
      • अब आपके सामने होम पेज खुलकर आएगा।
      • इसके बाद आपको कांटेक्ट अस के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
      • अब आपको इफ यू हैव ग्रीवेंस क्लिक हियर के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
      • इसके पश्चात आपको चेक टिकट स्टेटस के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
      • अब आपको अपना ईमेल आईडी तथा टिकट नंबर दर्ज करना होगा।
      • इसके बाद आपको सर्च के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
      • ग्रीवेंस स्टेटस आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर होगा।
  • लिया गया लेख

Read More

Haryana Crop Diversification Scheme

Table of Contents

हरियाणा सरकार ने अपने राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की आय में बढ़ोतरी करने के लिए फसल विविधीकरण योजना को शुरू किया था। Haryana Crop Diversification Scheme के तहत धान की खेती को छोड़ने वाले किसानों को ₹7000 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है साथ ही उन्हें अन्य वैकल्पिक फसलों जैसे-मक्का की खेती करने पर ₹2400 प्रति एकड़ और दलहन (मूंग, उड़द, अरहर) की खेती करने पर ₹3600 प्रति एकड़ का अनुदान भी प्रदान किया जाता है। राज्य के एक किसान को 5 एकड़ तक ही यह प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।  प्रदेश सरकार का सन् 2022 में यह लक्ष्य है कि इस योजना को 10 जिलों में 50 हजार एकड़ में अपनाया जाएगा।

हरियाणा फसल विविधीकरण योजना

फसल विविधीकरण योजना को हरियाणा सरकार ने अपने राज्य के गिरते हुए भूजल स्तर को नियंत्रित करने के लिए मेरा पानी मेरी विरासत के तहत लॉन्च किया है। इस योजना के तहत धान की फसल को छोड़कर अन्य वैकल्पिक फसलें जैसे-कपास, मक्का, दलहन, जवार, अरंडी, मूंगफली, सब्जी एवं फल की खेती करने पर ₹7000 प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इन फसलों को सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी खरीदा जाता है‌। प्रदेश सरकार ने Haryana Crop Diversification Scheme को शुरू करने का निर्णय इसलिए लिया था। क्योंकि 1 किलो चावल उगाने में औसतन 300 लीटर पानी की आवश्यकता होती है जो एक बहुत बड़ी मात्रा है। इसलिए राज्य के किसानों को धान की खेती छोड़कर अन्य कम पानी वा कम लागत वाली फसलों की बुवाई करने के लिए प्रोत्साहन राशि देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है जिससे एक तरफ किसानों को फायदा हो और दूसरी तरफ राज्य के भूजल स्तर को नियंत्रित किया जा सके।

हरियाणा फसल विविधीकरण योजना के बारे में जानकारी

योजना का नाम Haryana Crop Diversification Scheme
शुरू की गई मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी के द्वारा
साल 2023
लाभार्थी राज्य के किसान
उद्देश्य भूजल स्तर को नियंत्रित करना एवं फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना
योजना की श्रेणी राज्य सरकारी योजना
आवेदन प्रक्रिया Online
अधिकारिक वेबसाइट https://agriharyana.gov.in/

हरियाणा फसल विविधीकरण योजना 2023 का उद्देश्य

इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य हरियाणा में बढ़ती हुई पानी की कमी की समस्या को दूर करना और किसानों को धान की खेती छोड़कर अन्य फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना है। क्योंकि धान की खेती में बहुत अधिक मात्रा में पानी का उपयोग होता है जिसके कारण हरियाणा के कई जिलों में जल स्तर नीचे गिरता जा रहा है। इसी समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री जी ने हरियाणा फसल विविधीकरण योजना को शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत धान की खेती छोड़कर अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। Haryana Crop Diversification Scheme के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ राज्य में अन्य फसलें जैसे-मक्का, दलहन एवं तिलहन की फसलों को बढ़ावा मिल रहा है। जिससे राज्य इन फसलों के क्षेत्र में विकसित होगा।

हरियाणा फसल विविधीकरण योजना 2023 के लाभ एवं विशेषताएं

  • हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी के द्वारा अपने राज्य के गिरते हुए जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए फसल विविधीकरण योजना हरियाणा को आरंभ किया गया है।
  • इस योजना के तहत धान की फसल की जगह अन्य वैकल्पिक फसलें जैसे-कपास, मक्का, दलहन, जवार, अरंडी, मूंगफली, सब्जी एवं फलों की खेती  करने पर ₹7000 प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
  • इसके अलावा मक्का की खेती करने पर 2400 रुपए प्रति एकड़ और दलहन की खेती करने पर ₹3600 प्रति एकड़ का अनुदान भी प्रदान किया जाता है।
  • लेकिन यह प्रोत्साहन और अनुदान राशि सरकार द्वारा केवल 5 एकड़ तक ही दी जाती है।
  • हरियाणा सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में सन् 2022 में इस योजना को 10 जिलों में 50 हजार एकड़ जमीन पर अपनाया जाएगा।
  • Haryana Crop Diversification Scheme के माध्यम से राज्य में विविध प्रकार की फसलों की बुवाई होगी। जिससे भूमि की उर्वरता शक्ति में विकास होगा।
  • यह योजना राज्य में जल की समस्या का समाधान करने के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि करने में भी कारगर साबित होगी।
  • फसल विविधीकरण योजना 2023 के माध्यम से सरकार द्वारा किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर भी अनुदान प्रदान किया जाएगा।

फसल विविधीकरण योजना के तहत आवेदन हेतु पात्रता

  • आवेदक किसान को हरियाणा राज्य का निवासी होना चाहिए।
  • किसान को अपने पिछले वर्ष की खेती वाले धान के कम से कम 50% हिस्से में विविध फसलों की बुवाई करनी अनिवार्य है।
  • आवेदक किसान का बैंक खाता होना चाहिए जो आधार कार्ड से लिंक हो।

फसल विविधीकरण योजना के लिये महत्वपूर्ण दस्तावेज

  • आधार कार्ड
  •  निवास प्रमाण पत्र
  • कृषि योग्य भूमि के दस्तावेज
  • पहचान पत्र
  • मोबाइल नंबर
  • बैंक खाता विवरण
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ

हरियाणा फसल विविधीकरण योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

  • सबसे पहले आवेदक को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना है।
  • इसके बाद आपके सामने वेबसाइट का होमपेज खुलकर आ जाएगा।
  • वेबसाइट के होमपेज पर आपको फसल विविधीकरण के लिए पंजीकरण करे के विकल्प पर क्लिक कर देना है।
  • अब आपके सामने एक नया पेज खुलकर आ जाएगा जिस पर आपको रजिस्ट्रेशन फॉर्म दिखाई देगा।
  • इस फॉर्म में आपको अपना आधार नंबर एवं अन्य विवरण दर्ज करना है और अगले भाग में किसान को अपनी सभी जानकारी दर्ज करनी है।
  • इस फॉर्म में आपको अपना आधार नंबर एवं अन्य विवरण दर्ज करना है और अगले भाग में किसान को अपनी सभी जानकारी दर्ज करनी है।
  • इसके बाद किसान को भूमि से संबंधित जानकारी दर्ज करनी है। इसके बाद फसल के विवरण की जानकारी दर्ज करनी है।
  • आप सभी जानकारियां दर्ज करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर दें।
  • इस प्रकार आपकी Haryana Crop Diversification Scheme 2023 के तहत आवेदन पूरी हो जाएगी।

आधिकारिक वेबसाइट

https://agriharyana.gov.in/Default

Read More