भूमि: उचित जल निकासी वाली भूमि तिल की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है | इसे किसी भी उपजाऊ मिट्टी में आसानी से उगाया जा सकता है, तथा भूमि सामान्य P.H. मान वाली होनी चाहिए|
तापमान: तिल की बिजाई के लिए मुख्यतया 35-40 डिग्री C तापमान होना चाहिए|
उचित समय: 25 जून से 15 जुलाई के बिच का समय बढ़िया माना जाता है|
भूमि की तेयारी: खेत की तैयारी के समय 80 से 100 कुंतल सड़ी हुई गोबर की खाद अंतिम जुताई के समय मिला देना चाहिए। इसके साथ ही साथ 30 किलोग्राम नत्रजन, 15 किलोग्राम फास्फोरस तथा 25 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए। नत्रजन की आधी मात्रा तथा फास्फोरस,पोटाश एवम गंधक की पूरी मात्रा बुवाई के समय आधार खाद के रूप में तथा नत्रजन की आधी मात्रा प्रथम निराई-गुडाई के समय खड़ी फसल में देना चाहिए |
उच्चतम वैरायटी: टी.के.जी. 308, जे.टी-11, जे.टी-12, वी आर आई- 1, पंजाब तिल 1, टी एम वी- 4, 5, 6, चिलक रामा, गुजरात तिल 4, हरियाणा तिल 1, सी ओ- 1, तरुण, सूर्या, बी- 67, प्यायूर- 1, शेखर और सोमा
बीज उपचार: बीज को 2 ग्राम थायरम+1 ग्रा. कार्बेन्डाजिम , 2:1 में मिलाकर 3 ग्राम/कि.ग्रा. फफूंदनाशी के मिश्रण से बीजोपचार करें। अगर उपचारित बीज का उपयोग कर रहे हो, तो उन्हें उपचारित न करें।
बिजाई का तरीका: गेहूं की बिजाई 2 तरीके से कार सकते है छिटा विधि और कतारों में | कतार से कतार और पौधे से पौधे के बीच की दूरी 30×10 सेमी रखते हुए लगभग 3 सेमी की गहराई पर बीजों की बुवाई करनी चाहिए
बिजाई: बिजाई के समय भूमि और पानी के अनुसार बीज का चयन करे | बिजाई के समय 1.25 से 1.5 Kg बीज की बिजाई करें|
पहली सिंचाई: बिजाई के 25 से 30 दिन के अंदर पहली सिंचाई करें और पहली सिंचाई के साथ 25-30 Kg प्रति एकड़ यूरिया खाद डालें|
नोट: पहली सिंचाई के बाद तिल के पौधों को खरपतवार से बचाने के लिए निराई – गुड़ाई की जाती है
दूसरी सिंचाई: बिजाई के 50 से 60 दिन के अंदर अथवा फलियाँ बनने की अवस्था में दूसरी सिंचाई करें |
नोट: कीटों की रोकथाम के लिए क्यूनालफास 25 ई.सी. 1.25 लीटर या मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के दर से छिडक़ाव करना चाहिए।
अब फसल पकने का इंतजार करें – तिल की पत्तियां जब पीली होकर गिरने लगे तथा पत्तियां हरा रंग लिए हुए पीली हो जाए तब समझना चाहिए की फसल पक कर तैयार हो गई है। इसके बाद कटाई पेड़ सहित नीचे से करनी चाहिए। कटाई के बाद बंडल बनाकर खेत में ही जगह जगह पर छोटे-छोटे ढेर में खड़े कर देना चाहिए। जब अच्छी तरह से पौधे सूख जाएं तब डंडे अथवा छड़ की सहायता से पौधों को पीटकर या हल्का झाडक़र बीज निकाल लेना चाहिए |

