PM Kisan FPO Yojana

देश में किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। आज हम आपको ऐसी ही एक योजना से संबंधित जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं जिसका नाम पीएम किसान एफपीओ योजना है। इस लेख को पढ़कर आपको पीएम किसान FPO योजना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। जैसे कि पीएम किसान FPO योजना क्या है?, इसका उद्देश्य, लाभ, विशेषताएं, पात्रता, महत्वपूर्ण दस्तावेज, आवेदन प्रक्रिया आदि। तो दोस्तो यदि आप PM Kisan FPO Yojana से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप से निवेदन है कि आप हमारे इस लेख को अंत तक पढ़े।

 

पीएम किसान एफपीओ योजना

इस योजना के तहत अगर संगठन मैदानी क्षेत्र में काम करता है तो उसमें कम से कम 300 किसान जुड़े होने चाहिए। इसी तरह यह संगठन पहाड़ी क्षेत्र में काम करता है तो 100 किसानो को इससे जुड़े होने चाहिए। तभी वह इस योजना का लाभ उठा सकते है।  इस PM Kisan FPO Yojana 2023 का लाभ उठाने के लिए देश के किसानो को इस योजना के अंतर्गत आवेदन करना होगा। इस योजना के तहत देश के किसान अन्य प्रकार के भी फायदे होंगे जैसे बने संगठनों से जुड़े किसानों को अपनी उपज के लिए बाजार मिलेगा। साथ ही उनके लिए खाद, बीज, दवाई और कृषि उपकरण जैसा जरूरी सामान खरीदना बेहद आसान होगा। एक और बड़ा फायदा होगा कि किसान बिचौलियों से मुक्ति हो जाएंगे। एफपीओ सिस्टम में किसानों को अपनी फसल के लिए अच्छा रेट मिलेगा।

FPO क्या होता है

FPO एक प्रकार का किसान उत्पादक संगठन है जो किसानों के हित में कार्य करता है और कंपनी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड होता है। पीएम किसान FPO योजना के अंतर्गत ऐसे संगठनों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना के माध्यम से संगठनों को 15 लाख रुपए की आर्थिक सहायता सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। अब देश के किसान को खेती में भी कारोबार की तरह लाभ मिलेगा। पीएम किसान एफपीओ योजना का लाभ उठाने के लिए कम से कम 11 किसानों को संगठित होकर अपनी कृषि कंपनी बनानी होगी। एफपीओ संगठनों को सरकार द्वारा वह सभी फायदे भी प्रदान किए जाएंगे जो एक कंपनी को प्रदान किए जाते हैं। इस योजना के अंतर्गत दी जाने वाली राशि 3 सालों मैं प्रदान की जाएगी। इस योजना के माध्यम से देश के 10000 नए किसानो का संगठन बनाया जाएगा।

पीएम किसान एफपीओ योजना विवरण

योजना का नाम पीएम किसान FPO योजना
इनके द्वारा शुरू की गयी केंद्र सरकार द्वारा
लाभार्थी देश के किसान उत्पादक संगठन
उद्देश्य आर्थिक सहायता प्रदान करना

पीएम किसान एफपीओ योजना का उद्देश्य

जैसे की आप सभी लोग जानते है देश के बहुत से ऐसे किसान है जिनकी आर्थिक स्थिति सही नहीं है खेती करने से उन्हें ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा है इन किसानो को आर्थिक राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने इस पीएम किसान एफपीओ योजना 2023 को शुरू की गयी है इस योजना के ज़रिये किसान उत्पादक संगठनों यानी FPO को केंद्र सरकार द्वारा 15 -15 लाख रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान  करना। इस योजना का मुख्य उद्देश्य  कृषि सेक्टर को आगे बढ़ाना। इस योजना के ज़रिये किसानो की आय में वृद्धि करना और किसानो के हित में कार्य करना। इस Pradhanmantri Kisan FPO Scheme 2023 के ज़रिये देश के किसानो को उसी तरह फायदा होगा जैसे कारोबार में होता है।

पीएम किसान एफपीओ योजना के मुख्य तथ्य

  • पीएम किसान FPO योजना को केंद्र सरकार द्वारा आरंभ किया गया है।
  • एफपीओ की फुल फॉर्म फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन होती है।
  • यह संगठन होता है जिसके सदस्य किसान होते हैं।
  • एसपीओ के माध्यम से किसानों को तकनीकी, मार्केटिंग, ऋण, प्रोसेसिंग, सिंचाई आदि जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती है।
  • इस योजना के माध्यम से किसान 15 लाख रुपए तक का ऋण भी ले सकते हैं।
  • एफपीओ को इंडियन कंपनीज एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर करवाया जा सकता है।
  • इसके अलावा इस संगठन के माध्यम से किसानों को बीज, खाद, मशीनरी, मार्केट लिंकेज, ट्रेनिंग, नेटवर्किंग, वित्तीय सहायता आदि जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाती है।
  • इस संगठन का लक्ष्य किसानों को हर कार्य संभव मदद प्रदान करना होता है।
  • यह संगठन किसानों को उत्पादन बढ़ाने में भी सहायता प्रदान करता है।
  • इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले के ब्लॉक में एक एफपीओ होना चाहिए।
  • यह संगठन उन जिलों में प्राथमिकता पर संगठित किया जाएगा जो एस्पिरेशनल होते हैं।
  • एफपीओ के माध्यम से पर्याप्त प्रशिक्षण और हैंड हैंडलिंग प्रदान की जाती है इसके अलावा सीबीओ के स्तर से प्राथमिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
  • नॉर्थईस्ट एवं पहाड़ी इलाकों में एक एफपीओ में कम से कम 100 सदस्य होने चाहिए और मैदानी इलाकों में एक एफपीओ में कम से कम 300 सदस्य होने चाहिए।

  किसान एफपीओ योजना की विशेषताएं

  • केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि मोदी सरकार 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन बनाएगी।
  • साल 2024 तक इस पर 6865 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार हर FPO किसानो को 5 साल के लिए सरकारी समर्थन दिया जायेगा।
  • केंद्र सरकार संगठन के काम को देखने के बाद 15 लाख रुपए की सहायता देगी। इस सहायता की पूरी राशि तीन वर्षों में मिलेगी।
  • इसमें वही सारे फायदे मिलेंगे जो एक कंपनी को मिलते हैं. इससे कुल 30 लाख किसान लाभान्वित होंगे।
  • इस योजना का मकसद किसी उद्योग के बराबर ही खेती से मुनाफा हासिल करना है।
  • देश में कृषि का विस्तार होगा और किसानों के आर्थिक हालात भी बेहतर होंगे।
  • इस योजना के अंतर्गत देश के किसानों को दी जाने वाली धनराशि नकद दी जाएगी । इस योजना में छोटे और सीमांत किसानों के समूह बनेंगे, जिससे उन्हें लाभ मिलेगा।

किसान एफपीओ योजना के लाभ

  • इस योजना का लाभ देश के किसानो को प्रदान किया जायेगा।
  • इस योजना के अंतर्गत देश किसान उत्पादक संगठनो को केंद्र सरकार द्वारा 15 लाख रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी सरकार द्वारा यह धनराशि तीन साल के भीतर प्रदान की जाएगी।
  • पीएम किसान FPO योजना 2023 के तहत अगर संगठन मैदानी क्षेत्र में काम करता है तो उसमें कम से कम 300 किसान जुड़े होने चाहिए। इसी तरह यह संगठन पहाड़ी क्षेत्र में काम करता है तो 100 किसानो को इससे जुड़े होने चाहिए। तभी वह इस योजना का लाभ उठा सकते है।
  • इस योजना के तहत देश के किसान अन्य प्रकार के भी फायदे होंगे जैसे बने संगठनों से जुड़े किसानों को अपनी उपज के लिए बाजार मिलेगा। साथ ही उनके लिए खाद, बीज, दवाई और कृषि उपकरण जैसा जरूरी सामान खरीदना बेहद आसान होगा।
  • देश के जो  इच्छुक लाभार्थी इस योजना का लाभ उठाना चाहते है तो उन्हें इस योजना के अंतर्गत आवेदन करना होगा।

किसान एफपीओ योजना की पात्रता

  • आवेदक पेशे से किसान होना चाहिए।
  • आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए।
  • प्लेन क्षेत्र में एक एफपीओ में कम से कम 300 सदस्य होने चाहिए।
  • पहाड़ी क्षेत्र में एक एसपीओ में कम से कम 100 सदस्य होने चाहिए।
  • एफपीओ के पास स्वयं की कृषि योग्य भूमि होनी अनिवार्य है एवं उसे समूह का हिस्सा होना भी अनिवार्य है।

महत्वपूर्ण दस्तावेज

  • आधार कार्ड
  • निवास प्रमाण पत्र
  • जमीन के कागजात
  • राशन कार्ड
  • आय प्रमाण पत्र
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
  • बैंक खाता विवरण
  • मोबाइल नंबर

पीएम किसान FPO योजना के अंतर्गत आवेदन करने की प्रक्रिया

    • अब आपके सामने होम पेज खुलकर आएगा।
    • होम पेज पर आपको एफपीओ के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
    • इसके पश्चात आपको रजिस्ट्रेशन के विकल्प पर क्लिक करना होग
      • अब आपके सामने रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुल कर आएगा।
      • आपको फॉर्म में निम्नलिखित जानकारी दर्ज करनी होगी।
        • रजिस्ट्रेशन टाइप
        • रजिस्ट्रेशन लेवल
        • फुल नेम
        • जेंडर
        • एड्रेस
        • डेट ऑफ बर्थ
        • पिन कोड
        • डिस्ट्रिक्ट
        • फोटो आईडी टाइप
        • मोबाइल नंबर
        • ईमेल आईडी
        • कंपनी नेम
        • स्टेट
        • तहसील
        • फोटो आईडी नंबर
        • अल्टरनेट मोबाइल नंबर
        • लाइसेंस नंबर
        • कंपनी रजिस्ट्रेशन
        • बैंक नेम
        • अकाउंट होल्डर नेम
        • बैंक अकाउंट नंबर
        • आईएफएससी कोड
      • इसके पश्चात आपको पासबुक या फिर कैंसिल चेक एवं आईडी प्रूफ को स्कैन करके अपलोड करना होगा।
      • अब आपको सबमिट के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
      • इस प्रकार आप एफपीओ योजना के अंतर्गत आवेदन कर पाएंगे।

पीएम किसान FPO योजना के अंतर्गत लॉगिन करने की प्रक्रिया

  • सर्वप्रथम आपको राष्ट्रीय कृषि बाजार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा
  • अब आपके सामने होम पेज खुलकर आएगा।
  • इसके बाद आपको एफपीओ (FPO) के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
  • अब आपको लॉगिन (Login) के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
  • इसके बाद आपके सामने लॉगइन (Login) फॉर्म को लेकर आएगा।
  • अब आपको यूजरनेम पासवर्ड तथा कैप्चा कोड दर्ज करना होगा।
  • इसके बाद आपको लॉगिन के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
  • इस प्रकार आप लॉगिन कर पाएंगे।

पीएम किसान FPO योजना के अंतर्गत ग्रीवेंस दर्ज करने की प्रक्रिया

    • सबसे पहले आपको राष्ट्रीय कृषि बाजार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा
    • अब आपके सामने होम पेज खुलकर आएगा।
    • होम पेज पर आपको कांटेक्ट अस(Contact Us)  के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
    • इसके बाद इफ यू हैव ग्रीवेंस क्लिक हियर (If you have grievance clickHere) के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
    • अब आपको ओपन न्यू टिकट (Open New Ticket) के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
    • इसके बाद आपको अपना यूजर नेम तथा पासवर्ड दर्ज करके साइन इन करना होगा।
    • अब आपके सामने ग्रीवेंस फॉर्म खुलकर आएगा।
    • आपको इस फॉर्म में पूछी गई सभी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज करनी होगी।
    • अब आपको सबमिट के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
    • इस प्रकार आप ग्रीवेंस दर्ज कर पाएंगे।

पीएम किसान FPO योजना के अंतर्गत ग्रीवेंस स्टेटस चेक करने की प्रक्रिया

      • सर्वप्रथम आपको राष्ट्रीय कृषि बाजार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा
      • अब आपके सामने होम पेज खुलकर आएगा।
      • इसके बाद आपको कांटेक्ट अस के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
      • अब आपको इफ यू हैव ग्रीवेंस क्लिक हियर के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
      • इसके पश्चात आपको चेक टिकट स्टेटस के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
      • अब आपको अपना ईमेल आईडी तथा टिकट नंबर दर्ज करना होगा।
      • इसके बाद आपको सर्च के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
      • ग्रीवेंस स्टेटस आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर होगा।
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Haryana Crop Diversification Scheme

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हरियाणा सरकार ने अपने राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की आय में बढ़ोतरी करने के लिए फसल विविधीकरण योजना को शुरू किया था। Haryana Crop Diversification Scheme के तहत धान की खेती को छोड़ने वाले किसानों को ₹7000 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है साथ ही उन्हें अन्य वैकल्पिक फसलों जैसे-मक्का की खेती करने पर ₹2400 प्रति एकड़ और दलहन (मूंग, उड़द, अरहर) की खेती करने पर ₹3600 प्रति एकड़ का अनुदान भी प्रदान किया जाता है। राज्य के एक किसान को 5 एकड़ तक ही यह प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।  प्रदेश सरकार का सन् 2022 में यह लक्ष्य है कि इस योजना को 10 जिलों में 50 हजार एकड़ में अपनाया जाएगा।

हरियाणा फसल विविधीकरण योजना

फसल विविधीकरण योजना को हरियाणा सरकार ने अपने राज्य के गिरते हुए भूजल स्तर को नियंत्रित करने के लिए मेरा पानी मेरी विरासत के तहत लॉन्च किया है। इस योजना के तहत धान की फसल को छोड़कर अन्य वैकल्पिक फसलें जैसे-कपास, मक्का, दलहन, जवार, अरंडी, मूंगफली, सब्जी एवं फल की खेती करने पर ₹7000 प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इन फसलों को सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी खरीदा जाता है‌। प्रदेश सरकार ने Haryana Crop Diversification Scheme को शुरू करने का निर्णय इसलिए लिया था। क्योंकि 1 किलो चावल उगाने में औसतन 300 लीटर पानी की आवश्यकता होती है जो एक बहुत बड़ी मात्रा है। इसलिए राज्य के किसानों को धान की खेती छोड़कर अन्य कम पानी वा कम लागत वाली फसलों की बुवाई करने के लिए प्रोत्साहन राशि देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है जिससे एक तरफ किसानों को फायदा हो और दूसरी तरफ राज्य के भूजल स्तर को नियंत्रित किया जा सके।

हरियाणा फसल विविधीकरण योजना के बारे में जानकारी

योजना का नाम Haryana Crop Diversification Scheme
शुरू की गई मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी के द्वारा
साल 2023
लाभार्थी राज्य के किसान
उद्देश्य भूजल स्तर को नियंत्रित करना एवं फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना
योजना की श्रेणी राज्य सरकारी योजना
आवेदन प्रक्रिया Online
अधिकारिक वेबसाइट https://agriharyana.gov.in/

हरियाणा फसल विविधीकरण योजना 2023 का उद्देश्य

इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य हरियाणा में बढ़ती हुई पानी की कमी की समस्या को दूर करना और किसानों को धान की खेती छोड़कर अन्य फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना है। क्योंकि धान की खेती में बहुत अधिक मात्रा में पानी का उपयोग होता है जिसके कारण हरियाणा के कई जिलों में जल स्तर नीचे गिरता जा रहा है। इसी समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री जी ने हरियाणा फसल विविधीकरण योजना को शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत धान की खेती छोड़कर अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। Haryana Crop Diversification Scheme के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ राज्य में अन्य फसलें जैसे-मक्का, दलहन एवं तिलहन की फसलों को बढ़ावा मिल रहा है। जिससे राज्य इन फसलों के क्षेत्र में विकसित होगा।

हरियाणा फसल विविधीकरण योजना 2023 के लाभ एवं विशेषताएं

  • हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी के द्वारा अपने राज्य के गिरते हुए जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए फसल विविधीकरण योजना हरियाणा को आरंभ किया गया है।
  • इस योजना के तहत धान की फसल की जगह अन्य वैकल्पिक फसलें जैसे-कपास, मक्का, दलहन, जवार, अरंडी, मूंगफली, सब्जी एवं फलों की खेती  करने पर ₹7000 प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
  • इसके अलावा मक्का की खेती करने पर 2400 रुपए प्रति एकड़ और दलहन की खेती करने पर ₹3600 प्रति एकड़ का अनुदान भी प्रदान किया जाता है।
  • लेकिन यह प्रोत्साहन और अनुदान राशि सरकार द्वारा केवल 5 एकड़ तक ही दी जाती है।
  • हरियाणा सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में सन् 2022 में इस योजना को 10 जिलों में 50 हजार एकड़ जमीन पर अपनाया जाएगा।
  • Haryana Crop Diversification Scheme के माध्यम से राज्य में विविध प्रकार की फसलों की बुवाई होगी। जिससे भूमि की उर्वरता शक्ति में विकास होगा।
  • यह योजना राज्य में जल की समस्या का समाधान करने के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि करने में भी कारगर साबित होगी।
  • फसल विविधीकरण योजना 2023 के माध्यम से सरकार द्वारा किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर भी अनुदान प्रदान किया जाएगा।

फसल विविधीकरण योजना के तहत आवेदन हेतु पात्रता

  • आवेदक किसान को हरियाणा राज्य का निवासी होना चाहिए।
  • किसान को अपने पिछले वर्ष की खेती वाले धान के कम से कम 50% हिस्से में विविध फसलों की बुवाई करनी अनिवार्य है।
  • आवेदक किसान का बैंक खाता होना चाहिए जो आधार कार्ड से लिंक हो।

फसल विविधीकरण योजना के लिये महत्वपूर्ण दस्तावेज

  • आधार कार्ड
  •  निवास प्रमाण पत्र
  • कृषि योग्य भूमि के दस्तावेज
  • पहचान पत्र
  • मोबाइल नंबर
  • बैंक खाता विवरण
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ

हरियाणा फसल विविधीकरण योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

  • सबसे पहले आवेदक को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना है।
  • इसके बाद आपके सामने वेबसाइट का होमपेज खुलकर आ जाएगा।
  • वेबसाइट के होमपेज पर आपको फसल विविधीकरण के लिए पंजीकरण करे के विकल्प पर क्लिक कर देना है।
  • अब आपके सामने एक नया पेज खुलकर आ जाएगा जिस पर आपको रजिस्ट्रेशन फॉर्म दिखाई देगा।
  • इस फॉर्म में आपको अपना आधार नंबर एवं अन्य विवरण दर्ज करना है और अगले भाग में किसान को अपनी सभी जानकारी दर्ज करनी है।
  • इस फॉर्म में आपको अपना आधार नंबर एवं अन्य विवरण दर्ज करना है और अगले भाग में किसान को अपनी सभी जानकारी दर्ज करनी है।
  • इसके बाद किसान को भूमि से संबंधित जानकारी दर्ज करनी है। इसके बाद फसल के विवरण की जानकारी दर्ज करनी है।
  • आप सभी जानकारियां दर्ज करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर दें।
  • इस प्रकार आपकी Haryana Crop Diversification Scheme 2023 के तहत आवेदन पूरी हो जाएगी।

आधिकारिक वेबसाइट

https://agriharyana.gov.in/Default

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sanai

 

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सनई

सनई एक तेजी से उगने वाली फलीदार फसल है जो रेशे और हरी खाद के लिए उगाई जाती है। जब इसे मिट्टी में मिलाया जाता है तो यह खारेपन और खनिजों के नुकसान को रोकता है और मिट्टी में नमी बनाई रखता है। यह भारत में उगाई जाने वाली मुख्य फसल है और इसके इलावा भारत में यह महांराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार,  राज्यस्थान, उड़ीसा और यू पी राज्यों में हरी खाद के लिए उगाई जाती है।

जलवायु

Season

Temperature

20-35°C
Season

Rainfall

400-1000mm

Season

Sowing Temperature

25°C – 35°C
Season

Harvesting Temperature

22-30°C

मिट्टी

सनई की खेती के लिये नमी वाली रेतीली मिट्टी या चिकनी मिट्टी को सबसे अच्छा मानते हैं. इसकी खेती के लिये खेत में गहरी जुताई लगातर मिट्टी को भुरभुरा बनाते हैं. फिर पाटा लगाकर खेतों को ढंक दिया जाता है. खरीफ सीजन की फसलों से पहले सनई की बिजाई की जाती है और अप्रैल से जुलाई तक बीजों को खेत में छिड़क दिया जाता है.

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

Narendra sanai 1 : यह पकने के लिए 152 दिनों का समय लेती है। इसके पत्ते, हरे और फूल पीले और दाने मोटे काले रंग के होते हैं। बीजने से 45-60 दिनों के बाद यह ज़मीन में 4-6.5 टन खाद प्रति एकड़ छोड़ती है। इसके दानों की पैदावार 4.8 क्विंटल प्रति एकड़ है।
PAU 1691: यह 136 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके पत्ते चौड़े, हरे और फूल पीले और दाने मोटे काले रंग के होते हैं। बीजने से 45-60 दिनों के बाद यह ज़मीन में 4-6.5 टन खाद प्रति एकड़ छोड़ती है। इसके दानों की पैदावार 4.8 क्विंटल प्रति एकड़ है।
दूसरे राज्यों की किस्में
Ankur :  इसकी औसतन पैदावार 4.4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Swastik : इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
T 6 : यह किस्म हरी खाद के लिए बोयी जाती है।
K 12 : इसकी औसतन पैदावार 3.6-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।

ज़मीन की तैयारी

ज़मीन को अच्छी तरह जोतकर भुरभुरा कर लें। बीजने से पहले ज़मीन में अच्छी नमी होनी ज़रूरी है। अच्छी नमी बीज को अंकुरन में मदद करती है।

बिजाई

बिजाई का समय
हरी खाद के लिए फसल को बीजने का सही समय अप्रैल से जुलाई है। बीज के लिए तैयार की फसल को जून महीने में बोया जाता हैं।
फासला
जब फसल को हरी खाद के लिए बोया जाता है तब इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है। बीज के लिए फसल को बीजने के समय पंक्ति से पंक्ति का फासला 45 सैं.मी. रखें।
बीज की गहराई
बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. होनी चाहिए।
बिजाई का ढंग
हरी खाद बनाने के लिए छींटे से बिजाई की जाती है और बीज तैयार करने के लिए इसकी बिजाई, बिजाई वाली मशीन द्वारा की जाती है।

बीज

बीज की मात्रा
हरी खाद के लिए 20 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ के लिए काफी है और बीज के लिए 10 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ बोयें।
बीज का उपचार
बीज के अच्छे विकास के लिए बिजाई से पहले बीजों को एक रात के लिए पानी में भिगोकर रखें।

खाद

खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)

UREA SSP MURIATE OF POTASH
# 100 #

तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)

NITROGEN PHOSPHORUS POTASH
# 16 #

हरी खाद लेने के लिए फासफोरस 16 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डालें। इसमें नाइट्रोजन वाली खाद का प्रयोग नहीं किया जाता पर कईं बार शुरू वाला विकास करने के लिए 4-6 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डाली जाती है।

खरपतवार नियंत्रण

नदीनों की रोकथाम के लिए बिजाई से एक महीने बाद गोडाई करें।

सिंचाई

हरी खाद लेने के लिए दो-तीन पानी मौसम के आधार पर दिए जा सकते हैं। बीज उत्पादन के लिए फूल आने के समय और दाने बनने के समय पानी की कमी नहीं आनी चाहिए।

फसल की कटाई

बीज उत्पादन के लिए फसल को बीजने के 150 दिनों के बाद (मध्य अक्तूबर के नवंबर के शुरू में) काट लें और हरी खाद वाली फसल को बीजने के 45-60 दिनों के बाद मिट्टी में मिला दें।

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mesta

 

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मैस्टा

मैस्टा वार्षिक उगने वाली कपास और पटसन के बाद एक महत्वपूर्ण व्यापारिक फसल है| इस फसल का मूल स्थान एफ्रो-ऐशीआयी (Afro-Asian) देश है| इसका तना और छिलका रेशा बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है| हिबिसकस कैनाबिनस और हिबिसकस सबदारिफा नाम की दो प्रजातियों को आमतौर पर मैस्टा कहा जाता है| हिबिसकस सबदारिफा सूखे मौसम को सहने योग्य किस्म है और  हिबिसकस कैनाबिनस 50-90 मि.मी. बारिश वाले क्षेत्रों में उगाई जा सकती है,क्योंकि यह जल्दी पकने वाली फसल है| यह फसल उगाने वाले मुख्य राज्य महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, बिहार, उड़ीसा,मेघालय,कर्नाटक और त्रिपुरा आदि है|

जलवायु

Season

Temperature

25°C – 35°C
Season

Rainfall

60-90 cm

Season

Sowing Temperature

25°C – 28°C
Season

Harvesting Temperature

20°C – 25°C

मिट्टी

मैस्टा की फसल अलग-अलग तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है| बढ़िया चिकनी मिट्टी में यह बढ़िया पैदावार देती है| तेज़ाबी और जल जमाव वाली ज़मीन मैस्टा की खेती के लिए उचित नहीं है| इसके लिए मिट्टी का pH 4.5-7.8 होना चाहिए|

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

Hibiscus sabdariffa: AMV 1, AMV 2, AMV 3, 4, HS 4288, HS 7910 (आसाम,मेघालय,त्रिपुरा, पश्चिमी बंगाल में उगाने योग्य किस्में)

Hibbiscus cannabinus: HC 583 (पश्चिमी बंगाल में उगाने योग्य किस्में)

दूसरे राज्यों की किस्मे
Hibiscus Cannabinus
MT 150 (Nirmal): यह किस्म सारे मैस्टा उत्पादक राज्यों के लिए सहायक है| इसकी गुणवत्ता बहुत बढ़िया होती है और इस किस्म को मुख्य रूप से अख़बार बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है| इसकी औसतन पैदावार 13 क्विंटल प्रति एकड़ होती है|

JRM­3 (Sneha): यह पूरे देश में उगाने योग्य किस्म है| यह कीटों और बीमारीयों की रोधक किस्म है| इसकी औसतन पैदावार 10.5-15 क्विंटल प्रति एकड़ होती है|

JRM­5 (Shrestha): इसकी औसतन पैदावार 12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है|

Hibiscus Sabdariffa
AMV 7: यह किस्म 130-135 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है| यह नमी की कमी को सहने योग्य, कीटों और बीमारीयों की रोधक किस्म है| इसकी औसतन पैदावार 10.5-13 क्विंटल प्रति एकड़ होती है|

ज़मीन की तैयारी

मानसून आने से पहले खेत की अच्छी तरह से जोताई करके मिट्टी को भुरभुरा कर लें| जोताई के बाद मिट्टी को नदीनों और अन्य बचे-खुचे पदार्थो से मुक्त करें| फिर ज़मीन को अच्छी तरह से समतल करें|खेत की तैयारी के समय मिट्टी में 2-4 टन गली-सड़ी रूड़ी की खाद डालें|

बिजाई

बिजाई का समय
मैस्टा की बिजाई के लिए मई-जून महीने का समय उचित माना जाता है|
फासला
बढ़िया विकास और पैदावार के लिए फसल में 30×10 सैं.मी. का फासला रखने की सिफारिश की जाती है|
बीज की गहराई
बीजों की बिजाई 2.5-3 सैं.मी. गहराई पर करें|
बिजाई का ढंग
इसकी बिजाई आमतौर पर बुरकाव विधि द्वारा की जाती है पर पंक्तियों में बिजाई करना भी  लाभदायक सिद्ध होता है|

बीज

बीज का उपचार
बिजाई से पहले मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति किलो से बीज का उपचार करें|
बीज की मात्रा
हिबिसकस सबदारिफा के लिए 6 किलो प्रति एकड़ और हिबिसकस कैनाबिनस के लिए 5 किलो प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें|

खाद

खादें(किलोग्राम प्रति एकड़)

UREA SSP MOP
36 50 14

तत्व(किलोग्राम प्रति एकड़)

NITROGEN PHOSPHORUS POTASH
16 8 8

ज्यादा पैदावार लेने के लिए नाइट्रोजन 16 किलो (यूरिया 36 किलो), फासफोरस 8 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 50 किलो) और पोटाश 8 किलो (मिउरेट ऑफ़ पोटाश 14 किलो) प्रति एकड़ डालें|
फासफोरस और पोटाश का सारा हिस्सा और नाइट्रोजन का 1/3 हिस्सा बिजाई के समय डालें| बाकि बची नाइट्रोजन को दो बराबर हिस्सों में बांटे| पहला हिस्सा बिजाई से 21 दिन बाद और दूसरा हिस्सा बिजाई से 35 दिन बाद गोड़ाई करने के समय डालें|

खरपतवार नियंत्रण

खेत को साफ और नदीन-मुक्त करने के लिए गोड़ाई करें और पौधों को विरला करें| पहली गोड़ाई बिजाई से 21 दिन बाद और दूसरी गोड़ाई बिजाई से 35 दिन बाद करें और साथ-साथ कमज़ोर पौधों को बाहर निकाल दें| नदीनों को रायासनिक ढंग से रोकने के लिए बिजाई से 2-3 दिन पहले फ्लूक्लोरालिन 800 मि.ली. प्रति एकड़ डालें या बिउटाक्लोर 1200 मि.ली. प्रति एकड़  या पेंडीमैथालीन 1-1.25 लीटर प्रति एकड़ को बिजाई के तुरंत बाद डालें|

सिंचाई

सिंचित फसल होने के कारण इसे ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है| अगर जरूरत हो तो मौसम और मिट्टी की किस्म के अनुसार सिंचाई करें|

पौधे की देखभाल

कीट और रोकथाम

  • चेपा: 

अगर खेत में इसका नुकसान दिखाई दे तो डाईमैथोएट 2 मि.ली. या ऐमिडाक्लोप्रिड 0.25 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें या थाइओमैथोकसम 0.2 ग्राम या ऐसेटामिप्रिड 0.2 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें|

  • हरी सुंडी:

अगर इसका नुकसान दिखाई दे तो थाइओडीकार्ब 1 ग्राम या इंडोकसाकार्ब 1 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें|

  • मिली बग:

जब नुकसान कम हो तो इसकी प्रभावशाली रोकथाम के लिए नीम का तेल 5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें| अगर नुकसान ज्यादा हो तो प्रोफैनोफॉस 2 मि.ली. या ट्राईज़ोफोस 2 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें|

  • तेला:

इसकी रोकथाम के लिए ऐमिडाक्लोप्रिड 0.25 मि.ली. या थाइओमैथोकसम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें|

    • बीमारीयां और रोकथाम

जड़ और तना गलन: खेत में अच्छे निकास का प्रबंध करें और पानी को खड़ा न होने दें| बिजाई से पहले प्रति किलो बीजों का 3 ग्राम मैंकोजेब के साथ उपचार करें| अगर इसका हमला दिखी दें तो रिडोमिल 2 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें|

    • पत्तों का झुलस रोग: 

यदि इसका हमला दिखाई दे तो, 3 ग्राम मैंकोजेब या कॉपर आक्सीक्लोराइड 3 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें| जरूरत पड़ने पर 7 दिनों के फासले पर दोबारा स्प्रे करें|

    • नाड़ियों का पीला चितकबरा रोग:

यह रोह सफेद मक्खी से फैलता है| सफेद मक्खी के हमले की जांच करें| बिजाई से 50 दिन बाद थाइओमैथोकसम 0.1 ग्राम या ऐमिडाक्लोप्रिड 0.25 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें|

फसल की कटाई

फसल की कटाई समय पर करें, क्योंकि कटाई जल्दी करने से रेशे की पैदावार कम हो जाती  है और देरी से कटाई करने पर रेशे की गुणवत्ता खराब हो जाती है| 50% फूलों के खिलने पर कटाई का उचित समय होता है| कटाई के समय फसल को ज़मीन के नज़दीक से काटें|

कटाई के बाद

कटाई के बाद फसल को तने के आकार के अनुसार छांट लें| फिर तने को बांध कर खेत में पत्ते झड़ने के लिए रख दें|

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जंतर

यह हरी खाद के तौर पर ज्यादातर प्रयोग होने वाली फसल है। यह हर मौसम में बोयी जा सकती है जब मिट्टी में आवश्यक नमी हो। यह सिर्फ ज़मीन की हालत ही नहीं सुधारती बल्कि नाइट्रोजन की कमी को भी पूरा करती है।

 

जलवायु

Season

Temperature

22-35°C
Season

Sowing Temperature

22-28°C

Season

Harvesting Temperature

30-35°C

Season

Rainfall

750-800mm

मिट्टी

यह हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है, लेकिन रेतली दोमट से दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है।

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

Punjab Dhaincha 1: यह मोटे बीजों वाली किस्म है जिसकी वृद्धि तेजी से होती है। इसकी ज्यादातर गांठे होती हैं। इसकी औसत पैदावार 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह लगभग 150 दिनों में पक जाती है।
दूसरे राज्यों की किस्में
CSD 137: यह नमक वाली और सोखने वाली जमीनों में लगाई जाती है। यह 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसका औसतन पैदावार 133 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
CSD 123: यह उच्च स्तर के नमक वाली और पानी सोखने वाली ज़मीनों में लगाई जाती है। यह 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 112 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।

ज़मीन की तैयारी

मॉनसून के आने से पहले खेत की अच्छी तरह जोताई करें। जोताई के बाद खेत को नदीन और जड़ों से मुक्त करें। इसके बाद मिट्टी को समतल कर दें। खेत की तैयारी के समय 3-4 टन गली हुई रूड़ी की खाद प्रति एकड़ खेत में डालें।

बिजाई

बिजाई का समय
हरी खाद बनाने के लिए इसका सही समय अप्रैल से जुलाई का महीना है और बीज लेने के उद्देश्य से इसकी बिजाई का समय मध्य जून से मध्य जुलाई है।
फासला
खाद बनाने के लिए कतारों का फासला 20-22.5 से.मी. रखें और बीज प्राप्त करने के लिए 45×20 से.मी. पर बिजाई करें।
बीज की गहराई
बीज को 3-4 सैं.मी. की गहराई पर बोना चाहिए।
बिजाई का ढंग
बिजाई के लिए सीड ड्रिल ढंग का प्रयोग किया जाता है।

बीज

बीज की मात्रा
हरी खाद के लिए 20 किलो बीज प्रति एकड़ बोयें। बीज बनाने के लिए 8 से 10 किलो बीज प्रति एकड़ बोयें।

खाद

खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)

UREA SSP MURIATE OF POTASH
75 #

तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)

NITORGEN PHOSPHORUS POTASH
12 #

बिजाई के समय फसल में 12 किलो फासफोरस तत्व (75 किलो सुपरफासफेट) प्रति एकड़ डाल देनी चाहिए। यदि फासफोरस का प्रयोग पिछली फसल में किया गया हो तो फासफोरस ना डालें।

खरपतवार नियंत्रण

जब इसे बीज लेने के उद्देश्य से उगाया जाता है, तब बिजाई से एक महीना बाद गोडाई करें।

सिंचाई

हरी खाद के लिए बिजाई की गई फसल को गर्मी में आवश्यकता अनुसार 3 से 4 बार सिंचाई की जरूरत होती है। बीज के लिए बोयी फसल को फूल लगने और बीज बनने के समय पानी की कमी ना होने दें।

पौधे की देखभाल

    • हानिकारक कीट और रोकथाम

तंबाकू सुण्डी : इसकी सुण्डी शुरूआती फसल के पत्ते खाकर फसल को नष्ट कर देती हैं। इसकी रोकथाम के लिए नोवालयूरॉन 10 ई.सी. को 150 मि.ली. को 80-100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें।

फसल की कटाई

  • हरी खाद के लिए बोयी गई फसल को 40-60 दिन की होने पर मिट्टी में दबा दें । बीज लेने के लिए बोयी गई फसल बिजाई के समय अनुसार मध्य अक्तूबर से शुरूआती नवंबर तक कटाई के लिए तैयार हो जाती है।

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