ज्वार (Sorghum)

भूमि: ज्वार विश्व की एक मोटे अनाज वाली महत्वपूर्ण फसल है| ज्वार की फसल को किसी भी प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है | किन्तु अधिक मात्रा में उत्पादन प्राप्त करने के लिए खेती उचित जल निकासी वाली चिकनी मिट्टी में करे | इसकी खेती में भूमि का P.H. मान 5 से 7 के मध्य होना चाहिए | इसकी खेती खरीफ की फसल के साथ की जाती है | उस दौरान गर्मी का मौसम होता है, गर्मियों के मौसम में उचित मात्रा में सिंचाई कर अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है |

तापमान: ज्वार की बिजाई के लिए मुख्यतया 25-30 डिग्री C तापमान होना चाहिए |

उचित समय: 1 अप्रैल से 30 अप्रैल के बिच का समय बढ़िया माना जाता है |

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Locust (टिड्डी)

आजकल कपास, ग्वार इत्यादी में टिड्डी आने का खतरा बना रहता है | तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

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तोरिया/लाही (Toriya)

भूमि: तोरिया लगभग सभी प्रकार की कृषि योग्य भूमि में पैदा हो सकती है | लाही की खेती के लिए उचित जल निकासी वाली हल्की रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. इसके अलावा इसे और भी कई तरह की भूमि में उगा सकते हैं |

तापमान: सरसों की बिजाई के लिए मुख्यतया 25-35 डिग्री C तापमान होना चाहिए |

उचित समय: 1 सितम्बर से 30 सितम्बर के बिच का समय बढ़िया माना जाता है |

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लहसून (Garlic)

भूमि: लहसुन की खेती सभी प्रकार के जीवांशयुक्त भूमि में की जा सकती है लेकिन अधिक ऊपज  के लिये जीवांशयुक्त दोमट या फिर चिकनी मिट्टी का प्रयोग किया जाता है, ये दोनों मिट्टियां सर्वश्रेष्ठ होती हैं। धयान रहे दोनों ही मिट्टियों में जैविक पदार्थों की मात्रा अधिक होनी चाहिए, यह लहसुन की खेती के लिए लाभदायक साबित होगी और जिसमें जल निकास की व्यवस्था हो सबसे उपयुक्त होता है |

तापमान: लहसून के लिए मुख्यतया 10-30 डिग्री C तापमान होना चाहिए |

उचित समय: 20 अक्टूबर से 20 नवम्बर के बिच का समय बढ़िया माना जाता है |

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मक्का (Maize/Corn)

भूमि: मक्के के लिए सभी प्रक्रार की भूमि उपयुक्त होती है | बलुई, दोमट मिट्टी मक्का की खेती के लिये बेहतर समझी जाती है |

तापमान: मक्के की बिजाई के लिए मुख्यतया 25-35 डिग्री C तापमान होना चाहिए |

उचित समय: खरीफ : जून से जुलाई तक। रबी : अक्टूबर से नवम्बर तक। जायद : फरवरी से मार्च तक।

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