मैथी(Fenugreek)

भूमि: मेथी की खेती सभी तरह की मिट्टियों में की जा सकती है, लेकिन दोमट और बालू वाली मिट्टी इसके लिए ज्यादा उपयुक्त होती है| इसमें कार्बनिक पदार्थ पाया जाता है | इसकी पैदावार वहां ज्यादा होती है जहां पीएच मान 6-7 के बीच होता है तथा जहां पानी के निकास के बेहतर इंतजाम होते हैं|

तापमान: इसके लिए 15-28 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: इस फसल की बिजाई के लिए अक्तूबर का आखिरी सप्ताह और नवंबर का पहला सप्ताह अच्छा समय है।

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मूंगफली(Ground Nut)

भूमि:मूंगफली की खेती विभिन्न प्रकार की मृदाओं में की जा सकती है फिर भी इसकी अच्छी तैयारी हेतु जल निकास वाली कैल्शियम एवं जैव पदार्थो से युक्त बलुई दोमट मृदा उत्तम होती है। मृदा का पीएच मान 6.0 से 8.0 उपयुक्त रहता है। मई के महीने में खेत की एक जुताई मिट्टी पलटनें वाले हल से करके 2-3 बार हैरो चलावें जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जावें। इसके बाद पाटा चलाकर खेत को समतल करें जिससे नमी संचित रहें।

तापमान:इसके लिए 15-35 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: सामान्य रूप से 15 जून से 15 जुलाई के मध्य मूंगफली की बुवाई की जा सकती है।

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मिर्ची (Chili)

भूमि: हरी मिर्च की खेती लगभग हर तरह की मिट्टी में की जा सकती है। अच्छी पैदावार के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिस में नमी हो, इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है। मिर्च की अच्छी पैदावार के लिए ज़मीन की पीएच छह-सात के औसत में अनुकूल होती है। इसके अलावा मिर्च की खेती के लिए जीवांशयुक्त दोमट या बलुई मिट्टी उपुयक्त होती है, जिसमें कार्बनिक पदार्थ की मात्रा अधिक हो।

तापमान: इसके लिए 18-40 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: हरी मिर्च की खेती को साल में 3 बार उगाया जा सकता है। हालांकि देश के किसान ज्यादातर खरीब की फसल को महत्व देते है और इस ऋतु मे खेती का आंकड़ों मे रकबा भी काफी है। हरी मिर्च की खेती के लिए वर्षा ऋतु की फसल लेने के लिए सही समय जून-जुलाई का है। दूसरी फसल लेने के लिए सितम्बर-अक्टूबर में बुआई कर देनी चाहिए। वहीं गर्मी के मौसम की फसल के लिए फरवरी-मार्च में बुआई कर दी जानी चाहिए।

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भिण्डी (Ladyfinger)

भूमि: भिंडी की खेती किसान सभी प्रकार की मिट्टी में कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए हल्की दोमट मिट्टी काफी अच्छी मानी जाती है | क्योंकि इस मिट्टी में जल निकास काफी अच्छी तरह हो जाता है | इसके अलावा इसकी खेती के लिए भूमि में कार्बनिक तत्व का होना बेहद ज़रूरी है | इसके साथ ही इसका पी.एच.मान लगभग 6 से 6.8 तक होना चाहिए |

तापमान: इसके लिए 25-30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है। वर्षा वाले मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है।

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करेला (Bitter Gourd)

भूमि: करेले की खेती के लिए किसी खास तरह की मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती है, इसे किसी भी उपजाऊ मिट्टी में आसानी से उगाया जा सकता है, लेकिन बलुई दोमट मिट्टी को इसकी खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है | इसके अलावा भूमि उचित जल निकासी वाली होनी चाहिए | इसकी खेती में 6 से 8 P.H. मान वाली भूमि की आवश्यकता होती है | करेले की खेती में शुष्क और गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है, गर्मियों के मौसम में इसकी पैदावार अच्छी प्राप्त होती है |

तापमान: इसके लिए 25-40 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा माना जाता है।

उचित समय: भारत में अधिकांश किसान करेले की फसल का उत्पादन एक वर्ष में दो बार करते हैं। सर्दियों के समय में बोये जाने वाले करेले की किस्मों को जनवरी-फरवरी में बुआई कर मई-जून में इसका उत्पादन प्राप्त कर लेते हैं। जबकि गर्मियों के समय में करेले की किस्मों की बुआई जून और जुलाई में करने के पश्चात इसकी उपज दिसंबर तक मिल जाती है।

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