दीमक एक सामाजिक कीट है। दीमक हल्के पीले या भूरे रंग के कोमल कीट होते हैं।  चींटी की जाति का एक छोटा कीड़ा जो समूह में रहता है और कागज़, लकड़ी, पौधों आदि को खा जाता है। इसको सफेद चींटी भी कहा जाता है | दुनिया भर में लगभग 2,750 से अधिक प्रजातियां है, यह उष्णकटिबंधीय व शीतोष्ण क्षेत्रों सबसे ज्यादा पाये जाते है, कुछ प्रजाति ठंडे तापमान के लिए अनुकूलित होते है| दीमक मिट्टी के अन्दर या आस-पास तथा नमी वाले स्थान पर पाये जाते है| इसका अस्तित्व 120 मिलियन से अधिक वर्षों से है | दीमक भोजन में क्या खायेगी यह उसके विभिन्न प्रजातियों पर निर्भर करता है| यह सेल्यूलोज युक्त कार्बनिक पदार्थ को खाते हैं,यह आमतौर पर मृत पौधे, पत्ती, लकड़ी, कूड़े, मिट्टी तथा जानवरों के गोबर को ग्रहण करते है | तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

लक्षण

दीमक हल्के पीले या भूरे रंग के कोमल कीट होते हैं। दीमक चींटी की तरह होती है परंतु इनसे पूर्णतः भिन्न होती है। दीमक का रंग सफेद होता है। यह समूह में पाया जाने वाला कीट है जिससे यह सामाजिक प्राणी कहलाता है। चींटियों की भांति ग्रुप बनाकर दीमक रहता है। दीमक लाखों की संख्या में कॉलोनी में रहता है। दीमक कीट के पंख होते है। मादा और श्रमिक दीमक का रंग सफेद होता है। नर दीमक भूरे रंग का होता है। इसके सर पर एंटीना भी लगा होता है। आपकी जानकारी के लिए बता देते है कि टर्मिट अपने पूरे जीवनकाल में कभी भी नही सोते है। आपको जानकर हैरानी होगी कि चींटी की भांति दीमकों में भी राजा, रानी और श्रमिक होते है। रानी का आकार अन्य से बड़ा होता है। श्रमिकों की संख्या सबसे अधिक पायी जाती है। श्रमिकों में से ही कुछ सैनिक होते है जो रानी और कॉलोनी की सुरक्षा करते है। श्रमिक अंधे होते है जबकि रानी देख सकती है।

दीमक लगने के कारण

दीमक नम वातावरण में रहना पसंद करती है तथा इसका प्रिय भोजन सेल्युलोज है जो इसे पौधों से प्राप्त होता है, जिसके कारण दीमक मिट्टी तथा पौधों पर लगती है, लेकिन बरसात के बाद इसका प्रकोप बढ़ जाता है। पौधों में दीमक, भूमिगत तरीके से या पौधों के जरिये हमला करती है। पेड़-पौधों में दीमक लगने के निम्न कारण हो सकते हैं:

  • पौधों के आस-पास अत्याधिक नमी
  • मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार न होने वाली (कच्ची) गोबर खाद का प्रयोग
  • गार्डन के आस-पास का पौधों की लकड़ी का मलबा या मिट्टी में दबी हुयी पौधे की पत्तियां
  • मिट्टी में पानी की कमी होना
  • पौधे तथा मिट्टी को पर्याप्त धूप न मिलना इत्यादि।

जीवन चक्र

इसका जीवन चक्र रानी व नर (ड्रोन) दीमक के प्रेमालाप उड़ान से शुरू होता है, तथा निषेचन के बाद व नई कॉलोनियां बनने के पश्चात रानी के द्वारा अण्डे दिये जाते है|

दीमक अपने जीवन काल में अनेक प्रजनन (प्राथमिक, द्वितीय, तृतीय ) स्तरों से होकर गुजरता है, जिसमें प्राथमिक प्रजनन के अन्तर्गत रानी के द्वारा अण्डे दिये जाते है, जो लार्वा (निम्फ) अवस्था से होते हुए अंतिम वयस्क में विकसित हो जाते है| अण्डे देने के बाद कुछ पीढ़ियों की देखभाल रानी और ड्रोन द्वारा तब तक की जाती है, जब तक उसकी मदद करने के लिए पर्याप्त श्रमिक न हों जाये|

इसका जीवनकाल तीन प्रावस्था से होकर गुजरता है :-  1अण्ड  2.निम्फ  3.वयस्क

  1. निषेचन के बाद रानी द्वारा अण्डे दिये जाते है,जिसकी संख्या रानी दीमक की उम्र और प्रजातियों के आधार पर भिन्न-भिन्न हो सकती है| अंडे छोटे व अंडाकार तथा सफेद रंग के होते है, रानी कॉलोनी निर्माण के बाद प्रारंभिक चरणों में केवल 10-20 अंडे देती है, लेकिन जब कॉलोनी कई साल पुरानी हो जाती है,तो एक दिन में 1,000 अण्डे देने लगती है | परिपक्वता के समय प्राथमिक रानी में अंडे देने की बड़ी क्षमता होती है, कुछ प्रजातियों में परिपक्व रानी का पेट विकृत हो जाता है, जिससे वह एक दिन में 40,000 अंडे तक दे सकती है|
  2. अण्डे को सेने (incubate) के पश्चात यह दूसरे चरण में प्रवेश करता है, जिसे निम्फ (nymph) कहा जाता है,यह हल्के सफेद दिखाई देते है, तथा इसमें छोटे बाह्यकंकाल (exoskeleton) दिखाई प्रतीत होते है | निम्फ को वयस्कों की तरह सेल्यूलोज खिलाया जाता है | इस अवस्था में इसके छ: पैर का विकास होता है|
  3. यह अंतिम चरण है, इस अवस्था में निम्फ वयस्क में विकसित हो जाते है | और वो पुन: प्रजनन क्रिया में भाग लेते है |

इससे होने वाले नुकसान

दीमक पोलीफेगस कीट होता है ,यह सभी फसलो को बर्बाद करता है | भारत में फसलों को करीबन 45 % से ज्यादा नुकसान दीमक से होता है। वैज्ञनिकों के अनुसार दीमक कई प्रकार की होती हैं। दीमक भूमि के अंदर अंकुरित पौधों को चट कर जाती हैं। कीट जमीन में सुरंग बनाकर पौधों की जड़ों को खाते हैं। प्रकोप अधिक होने पर ये तने को भी खाते हैं। इस कीट की सूड़ियां मिटट्ी की बनी दरारों अथवा गिरी हुई पत्तियों के नीचे छिपी रहती हैं। रात के समय निकलकर पौधो की पत्तियों या मुलायम तनों को काटकर गिरा देती है। आलू के अलावा टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूल गोभी, पत्ता गोभी, सरसों, राई, मूली,गेहू आदि फसलो को सबसे ज्यादा नुकसान होता है।

  1. अचानक से पत्तियों का मुरझाना
  2. पौधे की ऊपरी शाखाओं का सूखना
  3. पेड़ की टहनियों या शाखाओं पर मिट्टी की नलियाँ दिखाई देना
  4. पॉटेड प्लांट्स में या ग्राउंड गार्डन में पेड़-पौधों के चारों ओर मिट्टी के छोटे-छोटे टीले
  5. अचानक पौधे का सूखना या नष्ट हो जाना, इत्यादि।

इसकी रोकथाम के उपाय

अगर घरेलु उपयोग वाली वस्तुओं में जैसे मेज, कुर्सी, सोफा आदि में दीमक का प्रकोप दिखाई देता है तो उन सभी चीजों पर दिए गए उत्पादों का प्रयोग करें

  1. नीम का तेल
  2. निम्बू का सिरका
  3. नमक और गरम पानी
  4. लाल मिर्च
  5. वस्तुओं को धुप में रखें

अगर फसलों में दीमक के लक्षण दिखाई देते है निम्न लिखित उपाय करें

  1. बीजों को बिवेरिया बेसियाना फफूंद नाशक से  उपचारित किया जाना चाहिए। एक किलो बीजों को 20 ग्राम बिवेरिया बेसियाना फफुद नाशक से उपचारित करके बोनी चाहिए |
  2. 2 किग्रा सुखी नीम की बीज को कूटकर बुआइ से पहले 1 एकड़ खेत में डालना चिहिए |
  3.  नीम केक 30 किग्रा /एकड़ में बुआइ से पहले खेत में डालना चिहिए |
  4.  1 किग्रा बिवेरिया बेसियाना फफूंद नासक और 25 किग्रा गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर बुआइ से पहले खेत में डालना चिहिए |
  5. 1 किग्रा/एकड़ बिवेरिया बेसियाना फफूंद नासक को आवश्यकतानुसार पानी में घोलकर मटके में भरकर ,निचले हिस्से में छिद्र करके सिचाई के समय देना चाहिए |

पौधों में दीमक की रोकथाम की रासायनिक उपाय

  1. लिंडेन पाउडर 1 किग्रा /10 लीटर पानी में घोलकर 1 एकड़ खेत में बुआइ से पहले करना चाहिए |
  2. एक किलो बीजों को चार मिलीलीटर क्लोरोपाइरीफास दवा से उपचारित किए जा सकते हैं |
  3. दीमक को नियंत्रित करने के लिए दो लीटर क्लोरोपाइरीफास दवा को 4 किलो रेत में मिलाकर प्रति हैक्टैयर बुवाई के समय खेत में डालना होता है |

सावधानियां

  1. तेज हवा या बारिश के टाइम स्प्रे न करें|
  2. स्प्रे के बाद अपना हाथ, पैर और चेहरा अच्छी तरह से धोएं |
  3. दीमक से बचाव के लिए खेत में कभी भी कच्ची गोबर नहीं डालनी चाहिए। कच्ची गोबर दीमक का प्रिय भोजन होता है |
  4. सुनिश्चित करें कि पौधों के आस-पास अत्याधिक नमी न हो।
  5. पौधों पर जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें। इसके लिए आप नीम तेल, 3 जी पेस्टीसाइड या अन्य होममेड पेस्टीसाइड का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  6. बुरी तरह दीमक संक्रमित पौधे को हटाकर नष्ट कर देना चाहिए, जिससे दीमक अन्य पौधों को नुकसान न पहुंचा सके।