मिलीबाग Pseudococcidae फैमिली का insect है , यह गरम और नमी वाले जलवायु में पाया जाता है । मिलीबग की 200 से भी ज्यादा प्रजातियाँ पायी जाती हैं पर ज़्यादातर एक जैसी ही दिखती हैं । मादा मिलीबग और नर मिलीबग की बनावट में पर्याप्त अंतर पाया जाता है । मादा जहां आकार में बड़ी होती है नर आकार में प्रायः छोटे ही होते हैं । मादा के पंख नही होते जबकि नर के पंख होते हैं , इसके अलावा मादा पैर होने के कारण Move कर सकती है जबकि नर के पैर नही होते हैं । कुछ प्रजातियाँ अंडे देती हैं जबकि कुछ Direct बच्चों को जन्म देती हैं । यह एक बार में सैकड़ों अंडे दे सकती हैं इसीलिए यदि इन पर control नहीं किया गया तो इनकी संख्या बहुत तेज़ी से फैलता है । लक्षण कीटों के समूह से बना सफ़ेद रुई जैसा गुच्छा पत्तियों, तनों, फूलों तथा फलों के निचले हिस्से पर दिखाई देता है। ये बहुत अधिक सक्रिय होते हैं। संक्रमण के कारण पत्तियों का पीला पड़ना तथा मुड़ना, पौधों में अवरुद्ध विकास तथा फलों का समय से पहले गिरना देखा गया है। | तो आइये जानते है इसके  लक्षण, जीवन चक्र, नुकसान और उसकी रोकथाम के बारे में:-

लक्षण

मीलीबग अंडाकार कर के होते है ,ये पंखहीन कीट होते हैं जो ऊष्ण तथा शीतोष्ण जलवायु में पाए जाते हैं। उनका शरीर एक पतले दानेदार मोम की परत से ढका होता है जिससे ये रुई जैसे दिखते हैं। यह कीटों के समूह से बना सफ़ेद रुई की तरह गुच्छों में पत्तियों, तनों, फूलों और फलों के नीचे के हिस्से पर दिखाई देता है। ये बहुत तेजी से फैलते हैं। हालांकि कम संख्या होने से इनका प्रभाव बहुत कम होता है, फिर भी संक्रमण से पत्तियों का पीला पड़ना तथा मुड़ना, पौधों में अवरुद्ध विकास तथा फलों का समय से पहले गिरना देखा गया है। पुरानी पत्तियों के आकार खराब होने की संभावना कम होती है। कीट रसों के अवशोषण के दौरान मधुरस का उत्सर्जन भी करते हैं तथा इससे ऊतक चिपचिपे हो जाते हैं और अवसरवादी जीवाणुओं तथा कवकों के समूह के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। फल आक्रमण के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं तथा ये विकृत हो सकते हैं अथवा पूर्ण रूप से मोम के उत्सर्जन की परत से ढक सकते हैं। मधुरस के प्रति चींटियाँ आकर्षित होती हैं तथा कीटों को अन्य पौधों तक फैला सकती हैं।  ये अपने लम्बे, छिद्र करने तथा चूसने में सक्षम मुँह के हिस्से (स्टाइलेट) को पौधों के ऊतकों में घुसा देते हैं और उनका रस पीते हैं। लक्षण उन विषैले पदार्थों की प्रतिक्रिया के कारण होते हैं जो ये खाते समय पौधों में डाल देते हैं।

जीवन चक्र

वयस्क मादा मिलीबग Cotton जैसी दिखने वाली मोम जैसी थैली में 200 से 500 या 600 तक भी अंडे देती हैं , इसमें खास बात यह भी होता है कि मादा सारे अंडे देने के बाद मर भी जाती है । ये अंडे से भरी थैलियाँ पौधों में ज़्यादातर पत्तियों के नीचे पाये जाते हैं । 2 से 3 सप्ताह के बीच ये अंडे तैयार हो जाते हैं और इनसे निकालने वाले नए बेबी मिलीबग उस पौधे या पेड़ के अन्य भागों या फिर आसपास के दूसरे पेड़ पौधों पर जाने लगते हैं । नयी जगह पर जैसे जैसे वो पौधे से पोषण खींचने लगते हैं उनके शरीर से एक प्रकार के Wax का स्राव होता है जिससे शरीर सफ़ेद आवरण से ढक जाता है ।

इससे होने वाले नुकसान

मिलीबग पौधों के तनों और पत्तियों से चिपक कर उसका रस चूसते रहते हैं। जिस वजह से पौधे को जरूरी मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता। उनका विकास सही तरीके से नहीं हो पाता। पत्तियां पीली होकर सूखने लगती हैं। मिली बग्स चिपचिपा पदार्थ छोडते चलते हैं। जिसकरी वजह से दूसरे कीड़े भी पौधे पर लगने लगते हैं। इससे फफूंद पैदा होने लगती है जो पौधों के लिए और भी ज्यादा नुकसानदायक होती है।

इसकी रोकथाम के उपाय

घरेलु उपचार :

  1. प्रभावित शाखाओं की कटाई कर दें |
  2. टूथब्रश से प्रभावित शाखाओं की सफाई कर सकते है |
  3. प्रभावित पौधों को बिच में उखाड़ कर जमीन में दबा दें |
  4. चींटियों का नियंत्रण करें |
  5. महीने में कम से कम 2 बार नीम तेल की स्प्रे करें |
  6. पौधों में लगे इन सफेद कीड़े से छुटकारा पाने के लिए आप हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए 2 ग्लास पानी में 1 कप हैंड सैनिटाइजर मिक्स कर दें। इन दोनों इंग्रेडिएंट्स को अच्छी तरह मिक्स करने के बाद आप इसे स्प्रे बॉटल में भर लें। अब स्प्रे बॉटल की मदद से पेड़-पौधों पर इसका छिड़काव करें। दो दिन बीच हमेशा इसका छिड़काव करें और चेक करते रहें कि सफेद कीड़े पूरी तरह गायब हुए या नहीं।

जैविक उपचार :

इस कीट की रोकथाम के लिए जैविक नियंत्राण एक सस्ता, सुरक्षित एवं प्रभावी उपाय है। जैविक नियंत्रण के लिए परजीवियों, परभक्षियों एवं प्राकृतिक शत्रुओं का उपयोग किया जाता है। ये लगातार इन पर आक्रमण करते रहते हैं, जिससे मिलीबग की संख्या आर्थिक क्षति स्तर के ऊपर कभी नही जाती। परजीवी कीटों में एनागाइनस कमाली, एनागाइनस स्यूडोकोक्सी, ग्रेनू सोडिया इण्डिका प्रमुख रूप से उपयोग में लाए जाते हैं। परजीवी कीटों की मादाएं मिलीबग के शरीर पर अंडे देती हैं एवं इनके अंडे पफूटने पर मिलीबग को खाना शुरू कर देती हैं। परभक्षी एवं प्राकृतिक शत्रुओं में क्रिस्टोकोकस मोन्टाजेरी, लेडी बर्ड बीटल, सिरपिफड फ्रलाई व क्रायसोपर्ला प्रमुख रूप से आते हैं। इनको लगभग 10 कीट प्रति पौधा या 5000 कीट प्रति हैक्टर की दर

से छोड़ना चाहिए। मादा परभक्षी अपने अंडे मिलीबग के अंड समूहों के बीच में देती हैं। इन कीटों की सूंडी मिलीबग के अंडे एवं क्रालर को खाती हैं। मिलीबग के नियंत्राण के लिए फफूंद जैवनाशी एजेंट ; बायो कंट्रोलद्ध जैसे वर्टीसिलियम लिकेनी को 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर पफसलों पर छिड़काव करना चाहिए।

रासायनिक उपचार : रासायनिक नियंत्रण के लिये पर्यावरण एवं मिली बग के प्राकृतिक शत्रुओ के अनुकूल कीटनाशियो का छिड़काव करना चाहिये। इन कीटनाशको को मिली बग के परजीवियो, परभक्षियो या प्राकृतिक शत्रुओ को छोड़ने के 15-20 दिन बाद छिड़काव करे।

  • डाइक्लोरवास 25 ग्राम/ली. व 2 चम्मच सर्फ (डिटरजेंट) को मिलाकर छिड़काव करना चाहिये।
  • मिथाइल डेमेटान, क्लोरपायरीफास, मेलाथियान या इमिडाक्लोप्रिड की 2 मि.ली. मात्रा प्रति लीटर पानी मे घोलकर उसमे 2 चम्मच सर्फ पाउडर/ टंकी मिलाकर 15-20 दिनो के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करना चाहिये।
  • सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपायरीफास 1 ली/हेक्टेयर की दर से उपयोग करना चाहिये।
  • नीम उत्पाद जैसे एजाडायरेक्टीन 5 मि.ली./लीटर एवं 2-3 चम्मच सर्फ पाउडर/टंकी मिलाकर छिड़काव करना चाहिये।

सावधानियां

  1. तेज हवा या बारिश के टाइम स्प्रे न करें|
  2. आँखों की सुरक्षा करें |
  3. स्प्रे के बाद अपना हाथ, पैर और चेहरा अच्छी तरह से धोएं |
  4. बच्चों की पहुच से दूर रखें |