भूमि: मक्के के लिए सभी प्रक्रार की भूमि उपयुक्त होती है | बलुई, दोमट मिट्टी मक्का की खेती के लिये बेहतर समझी जाती है |

तापमान: मक्के की बिजाई के लिए मुख्यतया 25-35 डिग्री C तापमान होना चाहिए |

उचित समय: खरीफ : जून से जुलाई तक। रबी : अक्टूबर से नवम्बर तक। जायद : फरवरी से मार्च तक।

भूमि की तेयारी: क्के की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी को पर्याप्त मात्रा में उवर्रक देना आवश्यक होता है | इसके लिए 6 से 8 टन पुरानी गोबर की खाद को खेत में डाल देना चाहिए। भूमि में जस्ते की कमी होने पर बारिश के मौसम से पहले 25 किलो जिंक सल्फेट की मात्रा को खेत में डाल देना चाहिए | खाद और उवर्रक को चुनी गई उन्नत किस्मो के आधार पर देना चाहिए | इसके बाद बीजो की रोपाई के समय नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा को देना चाहिए, और इसके दूसरे भाग को बीज रोपाई के एक माह बाद दे, और अंतिम भाग को पौधों में फूलो के लगने के दौरान देना चाहिए l

उच्चतम वैरायटी: गंगा-5 , डेक्कन-101 , गंगा सफेद-2 , गंगा-11, डेक्कन-103 |

बीज उपचार: इसके लिए सबसे पहले बीजो को थायरम या कार्बेन्डाजिम 3 ग्राम की मात्रा को प्रति 1 किलो बीज को उपचारित कर ले | इस उपचार से बीजो को फफूंद से बचाया जाता है | इसके बाद बीजो को मिट्टी में रहने वाले कीड़ो से बचाने के लिए प्रति किलो की दर से थायोमेथोक्जाम या इमिडाक्लोप्रिड 1 से 2 ग्राम की मात्रा से उपचारित कर लेना चाहिए  l

बिजाई का तरीका: पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60-70 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20-25 सेंटीमीटर रखी जाती है|

खरपतवार नियंत्रण: बोने के 15-20 दिन बाद डोरा चलाकर निंदाई-गुड़ाई करनी चाहिए या रासायनिक निंदानाशक मे एट्राजीन नामक निंदानाशक का प्रयोग करना चाहिए। एट्राजीन का उपयोग हेतु अंकुरण पूर्व 600-800 ग्रा./एकड़ की दर से छिड़काव करें। इसके उपरांत लगभग 25-30 दिन बाद मिट्टी चढावें |

रोग व उनके उपचार

तना सडन: 150 ग्रा. केप्टान को 100 ली. पानी मे घोलकर जड़ों पर डालना चाहिये.

डाउनी मिल्डयू :  डायथेन एम-45 दवा आवश्यक पानी में घोलकर 3-4 स्प्रे करना चाहिए

बिजाई: बिजाई के समय भूमि और पानी के अनुसार बीज का चयन करे | बिजाई के समय 16 से 20 Kg बाजरे के बीज की बिजाई करें|

पहली सिंचाई: बिजाई के 30 से 40 दिन के अंदर पहली सिंचाई करें और पहली सिंचाई के साथ 25-30 Kg प्रति एकड़ यूरिया खाद डालें|

इसके बाद की सिंचाई पुष्प और दाना बंनने की स्थिती में की जाती है | ध्यान रहे की फसल में पानी नहीं रुकना चाहिए |

अब फसल पकने का इंतजार करें – वैरायटी के हिसाब से जब फसल कटाई के लिए तैयार हो जाये तो दरांती से कटाई करें|