farmer honor conference(kisan samman sammelan)

नम: पार्वती पतये!

हर हर महादेव!

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी शिवराज सिंह चौहान, भागीरथ चौधरी जी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, विधान परिषद के सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र चौधरी जी, प्रदेश सरकार के अन्य मंत्रीगण, जनप्रतिनिधिगण और विशाल संख्या में आए हुए मेरे किसान भाई-बहन, काशी के मेरे परिवारजनों,

चुनाव जीते के बाद आज हम पहली बार बनारस आयल हई। काशी के जनता जनार्दन के हमार प्रणाम।

बाबा विश्वनाथ और मां गंगा के आशीर्वाद से, काशीवासियों के असीम स्नेह से, मुझे तीसरी बार देश का प्रधान सेवक बनने का सौभाग्य मिला है। काशी के लोगों ने मुझे लगातार तीसरी बार अपना प्रतिनिधि चुनकर धन्य कर दिया है। अब तो मां गंगा ने भी जैसे मुझे गोद ले लिया है, मैं यहीं का हो गया हूं। इतनी गर्मी के बावजूद, आप सभी यहां बड़ी संख्या में आशीर्वाद देने आए और आपकी ये तपस्या देख करके सूर्य देवता भी थोड़ा ठंडक बरसाने लग गए। मैं आपका आभारी हूं, मैं आपका ऋणी हूं।

 

साथियों,

भारत में 18वीं लोकसभा के लिए हुआ ये चुनाव, भारत के लोकतंत्र की विशालता को, भारत के लोकतंत्र के सामर्थ्य को, भारत के लोकतंत्र की व्यापकता को, भारत के लोकतंत्र के जड़ों की गहराई को दुनिया के सामने पूरे सामर्थ्य के साथ प्रस्तुत करता है। इस चुनाव में देश के 64 करोड़ से ज्यादा लोगों ने मतदान किया है। पूरी दुनिया में इससे बड़ा चुनाव कहीं और नहीं होता है, जहां इतनी बड़ी संख्या में लोग वोटिंग में हिस्सा लेते हैं। अभी मैं जी-7 की बैठक में हिस्सा लेने के लिए इटली गया था। जी-7 के सारे देशों के सारे मतदाताओं को मिला दें, तो भी भारत के वोटर्स की संख्या उनसे डेढ़ गुना ज्यादा है। यूरोप के तमाम देशों को जोड़ दें, यूरोपियन यूनियन के सारे मतदाताओं को जोड़ दें, तो भी भारत के वोटर्स की संख्या उनसे ढाई गुना ज्यादा है। इस चुनाव में 31 करोड़ से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया है। ये एक देश में महिला वोटर्स की संख्या के हिसाब से पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। ये संख्या अमेरिका की पूरी आबादी के आसपास है। भारत के लोकतंत्र की यही खूबसूरती, यही ताकत पूरी दुनिया को आकर्षित भी करती है, प्रभावित भी करती है। मैं बनारस के हर मतदाता का भी लोकतंत्र के इस उत्सव को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त करता हूँ। ये बनारस के लोगों के लिए भी गर्व की बात है। काशी के लोगों ने तो सिर्फ MP नहीं, बल्कि तीसरी बार PM भी चुना है। इसलिए आप लोगों को तो डबल बधाई।

साथियों,

इस चुनाव में देश के लोगों ने जो जनादेश दिया है, वो वाकई अभूतपूर्व है। इस जनादेश ने एक नया इतिहास रचा है। दुनिया के लोकतांत्रिक देशों में ऐसा बहुत कम ही देखा गया है कि कोई चुनी हुई सरकार लगातार तीसरी बार वापसी करे। लेकिन इस बार भारत की जनता ने ये भी करके दिखाया है। ऐसा भारत में 60 साल पहले हुआ था, तब से भारत में किसी सरकार ने इस तरह हैट्रिक नहीं लगाई थी। आपने ये सौभाग्य हमें दिया, अपने सेवक मोदी को दिया। भारत जैसे देश में जहां युवा आकांक्षा इतनी बड़ी है, जहां जनता के अथाह सपने हैं, वहां लोग अगर किसी सरकार को 10 साल के काम के बाद फिर सेवा का अवसर देते हैं, तो ये बहुत बड़ी Victory है, बहुत बड़ा विजय है और बहुत बड़ा विश्वास है। आपका ये विश्वास, मेरी बहुत बड़ी पूंजी है। आपका ये विश्वास मुझे लगातार आपकी सेवा के लिए, देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देता है। मैं दिन रात ऐसे ही मेहनत करूंगा, आपके सपनों को पूरा करने के लिए आपके संकल्पों को पूरा करने के लिए मैं हर प्रयास करूंगा।

साथियों,

मैंने किसान, नौजवान, नारी शक्ति और गरीब, इन्हें विकसित भारत का मजबूत स्तंभ माना है। अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत मैंने इन्हीं के सशक्तिकरण से की है। सरकार बनते ही सबसे पहला फैसला, किसान और गरीब परिवारों से जुड़ा फैसला लिया गया है। देशभर में गरीब परिवारों के लिए 3 करोड़ नए घर बनाने हों, या फिर पीएम किसान सम्मान निधि को आगे बढ़ाना हो, ये फैसले करोड़ों-करोड़ों लोगों की मदद करेंगे। आज का ये कार्यक्रम भी विकसित भारत के इसी रास्ते को सशक्त करने वाला है। आज इस खास कार्यक्रम में काशी के साथ-साथ काशी से ही देश के गांव के लोग जुड़े हैं, करोड़ों किसान हमारे साथ जुड़े हुए हैं और ये सारे हमारे किसान, माताएं, भाई-बहनें आज इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहे हैं। मैं, अपनी काशी से हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने में, गांव-गांव में, आज टेक्‍नॉलोजी से जुड़े हुए सभी किसान भाई-बहनों का, देश के नागरिकों का अभिवादन करता हूं। थोड़ी देर पहले ही देशभर के करोड़ों किसानों के बैंक खाते में पीएम किसान सम्मान निधि के 20 हज़ार करोड़ रुपए पहुंचे हैं। आज 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने की तरफ भी बड़ा कदम उठाया गया है। कृषि सखी के रूप में बहनों की नई भूमिका, उन्हें सम्मान और आय के नए साधन, दोनों सुनिश्चित करेंगे। मैं अपने सभी किसान परिवारों को, माताओं-बहनों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

पीएम किसान सम्मान निधि, आज दुनिया की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम बन चुका है। अभी तक देश के करोड़ों किसान परिवारों के बैंक खाते में सवा 3 लाख करोड़ रुपए जमा हो चुके हैं। यहां वाराणसी जिले के किसानों के खाते में भी 700 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। मुझे खुशी है कि पीएम किसान सम्मान निधि में सही लाभार्थी तक लाभ पहुंचाने के लिए टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल हुआ है। कुछ महीने पहले ही विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान भी एक करोड़ से अधिक किसान इस योजना से जुड़े हैं। सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ पाने के लिए कई नियमों को भी सरल किया है। जब सही नीयत होती है, सेवा की भावना होती है, तो ऐसे ही तेजी से किसान हित के, जनहित के काम होते हैं।

भाइयों और बहनों,

21वीं सदी के भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनाने में पूरी कृषि व्यवस्था की बड़ी भूमिका है। हमें वैश्विक रूप से सोचना होगा, ग्लोबल मार्केट को ध्यान में रखना होगा। हमें दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भर बनना है। और कृषि निर्यात में अग्रणी बनना है। अब देखिए, बनारस का लंगड़ा आम, जौनपुर की मूली, गाजीपुर की भिंडी, ऐसे अनेक उत्पाद आज विदेशी मार्केट में पहुंच रहे हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट और जिला स्तर पर एक्सपोर्ट हब बनने से एक्सपोर्ट बढ़ रहा है और उत्पादन भी एक्सपोर्ट क्वालिटी का होने लगा है। अब हमें पैकेज्ड फूड के ग्लोबल मार्केट में देश को नई ऊंचाई पर ले जाना है और मेरा तो सपना है कि दुनिया की हर डायनिंग टेबल पर भारत का कोई न कोई खाद्यान्न या फूड प्रॉडक्ट होना ही चाहिए। इसलिए हमें खेती में भी ज़ीरो इफेक्ट, ज़ीरो डिफेक्ट वाले मंत्र को बढ़ावा देना है। मोटे अनाज-श्री अन्न का उत्पादन हो, औषधीय गुण वाली फसल हो, या फिर प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ना हो, पीएम किसान समृद्धि केंद्रों के माध्यम से किसानों के लिए एक बड़ा सपोर्ट सिस्टम विकसित किया जा रहा है।

भाइयों और बहनों,

यहां इतनी बड़ी संख्या में हमारी माताएं-बहनें उपस्थित हैं। माताओं-बहनों के बिना खेती की कल्पना भी असंभव है। इसलिए, अब खेती को नई दिशा देने में भी माताओं-बहनों की भूमिका का विस्तार किया जा रहा है। नमो ड्रोन दीदी की तरह ही कृषि सखी कार्यक्रम ऐसा ही एक प्रयास है। हमने आशा कार्यकर्ता के रूप में बहनों का काम देखा है। हमने बैंक सखियों के रूप में डिजिटल इंडिया बनाने में बहनों की भूमिका देखी है। अब हम कृषि सखी के रूप में खेती को नई ताकत मिलते हुए देखेंगे। आज 30 हज़ार से अधिक सहायता समूहों को कृषि सखी के रूप में प्रमाणपत्र दिए गए हैं। अभी 12 राज्यों में ये योजना शुरू हुई है। आने वाले समय में पूरे देश में हज़ारों समूहों को इससे जोड़ा जाएगा। ये अभियान 3 करोड़ लखपति दीदियां बनाने में भी मदद करेगा।

भाइयों और बहनों,

पिछले 10 वर्षों में काशी के किसानों के लिए केंद्र सरकार ने और राज्‍य सरकार ने पिछले 7 साल से राज्‍य सरकार को मौका मिला है। पूरे समर्पण भाव से काम किया है। काशी में बनास डेरी संकुल की स्थापना हो, किसानों के लिए बना पेरिशेबल कार्गो सेंटर हो, विभिन्न कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र हों, या इंटीग्रेटेड पैक हाउस हो, आज इन सब के कारण काशी और पूर्वांचल के किसान बहुत मजबूत हुए हैं, उनकी कमाई बढ़ी है। बनास डेय़री ने तो बनारस और आसपास के किसानों और पशुपालकों का भाग्य बदलने का काम किया है। आज ये डेयरी हर रोज करीब 3 लाख लीटर दूध जमा कर रही है। अकेले बनारस के ही 14 हजार से ज्यादा पशुपालक, ये हमारे परिवार इस डेयरी के साथ रजिस्टर्ड हो चुके हैं। अब बनास डेयरी अगले एक डेढ़ साल में काशी के ही 16 हजार और पशुपालकों को अपने साथ जोड़ने जा रही है। बनास डेयरी आने के बाद बनारस के अनेकों दूध उत्पादकों की कमाई में भी 5 लाख रुपए तक की वृद्धि हुई है। हर साल किसानों को बोनस भी दिया जा रहा है। पिछले साल भी 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का बोनस पशुपालकों के बैंक खाते में भेजा गया था। बनास डेयरी अच्छी नस्ल की गिर और साहीवाल गायों को भी किसानों को दे रही है। इससे भी उनकी आमदनी बढ़ी है।

साथियों,

बनारस में मछलीपालकों की आय बढ़ाने के लिए भी हमारी सरकार लगातार काम कर रही है। पीएम मत्स्य संपदा योजना से सैकड़ों किसानों को लाभ हो रहा है। उन्हें अब किसान क्रेडिट कार्ड की भी सुविधा मिल रही है। यहां पास में चंदौली में करीब 70 करोड़ की लागत से आधुनिक फिश मार्केट का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे भी बनारस के मछली पालन से जुड़े किसानों को मदद मिलेगी।

साथियों,

मुझे खुशी है कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को भी बनारस में जबरदस्त सफलता मिल रही है। यहां के करीब-करीब 40 हजार लोग इस योजना के तहत रजिस्टर हुए हैं। बनारस के 2100 से ज्यादा घरों में सोलर पैनल लग चुका है। अभी 3 हजार से ज्यादा घरों में सोलर पैनल लगाने का काम चल रहा है। जो घर पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं उनमें से ज्यादातर को डबल फायदा हुआ है। उनका बिजली बिल तो जीरो हो ही गया है, 2-3 हजार रुपए की कमाई भी होने लगी है।

साथियों,

बीते 10 सालों में बनारस शहर और आसपास के गांवों में कनेक्टिविटी का जो काम हुआ है, उससे भी बहुत मदद हुई है। आज काशी में देश के सबसे पहले सिटी रोप वे प्रोजेक्ट का काम अपने आखिरी पड़ाव तक पहुंच रहा है। गाजीपुर, आजमगढ़ और जौनपुर के रास्तों को जोड़ती रिंग रोड विकास का रास्ता बन गई है। फुलवरिया और चौकाघाट के फ्लाईओवर बनने से जाम से जूझने वाले बनारस के आप लोगों को बहुत राहत हुई है। काशी, बनारस और कैंट के रेलवे स्टेशन अब एक नए रूप में पर्यटकों और बनारसी लोगों का स्वागत कर रहे हैं। बाबतपुर एयरपोर्ट का नया रूप ना सिर्फ यातायात बल्कि व्यापार को भी बहुत सहूलियत दे रहा है। गंगा घाटों पर होता विकास, बीएचयू में बनती नई स्वास्थ्य सुविधाएं, शहर के कुंडों का नवीन रूप, और वाराणसी में जगह-जगह विकसित होती नई व्यवस्था काशी वासियों को गौरव की अनुभूति कराती हैं। काशी में स्पोर्ट्स को लेकर जो काम हो रहा है, नए स्टेडियम का जो काम हो रहा है, वो भी युवाओं के लिए नए मौके बना रहा है।

साथियों,

हमारी काशी संस्कृति की राजधानी रही है, हमारी काशी ज्ञान की राजधानी रही है, हमारी काशी सर्वविद्या की राजधानी रही है। लेकिन इन सब के साथ-साथ काशी एक ऐसी नगरी बनी है, जिसने सारी दुनिया को ये दिखाया है कि ये हेरिटेज सिटी भी अर्बन डेवलपमेंट का नया अध्याय लिख सकती है। विकास भी और विरासत भी का मंत्र काशी में हर तरफ दिखाई देता है। और इस विकास से सिर्फ काशी का लाभ नहीं हो रहा है। पूरे पूर्वांचल के जो परिवार काशी में अपने कामकाज और जरूरतों के लिए आते हैं। उन सभी को भी इन सारे कामों से बहुत मदद मिलती है।

साथियों,

बाबा विश्वनाथ की कृपा से काशी के विकास की ये नई गाथा, अनवरत चलती रहेगी। मैं एक बार फिर, देशभर से जुड़े सभी किसान साथियों का, सभी किसान भाई-बहनों का हृदय से अभिवादन करता हूं, बधाई देता हूं। काशीवासियों का भी मैं फिर से, हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

नम: पार्वती पतये!

हर हर महादेव!

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 “पीएम किसान की 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की 17वीं किस्त जारी की”

“पीएम किसान सम्मान निधि दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना बनकर उभरी है”“मुझे खुशी है कि पीएम किसान सम्मान निधि में सही लाभार्थी तक पहुंचने के लिए प्रौद्योगिकी का सही इस्तेमाल किया गया है”“मेरा सपना है कि दुनिया भर में हर खाने की मेज पर भारत का कोई न कोई खाद्यान्न या खाद्य उत्पाद हो”“माताओं और बहनों के बिना खेती की कल्पना करना असंभव है”“बनास डेयरी के आने के बाद बनारस के कई दूध उत्पादकों की आय में 5 लाख रुपये तक की वृद्धि हुई है”“काशी ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि यह हेरिटेज (विरासत) शहर शहरी विकास की नई इबारत भी लिख सकता है”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वाराणसी, उत्तर प्रदेश में किसान सम्मान सम्मेलन को संबोधित किया और लगभग 9.26 करोड़ लाभार्थी किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 17वीं किस्त जारी की, जिसकी राशि 20,000 करोड़ रुपये से अधिक है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की 30,000 से अधिक महिलाओं को कृषि सखी के रूप में प्रमाण पत्र भी प्रदान किए। इस कार्यक्रम से देशभर के किसान तकनीक के माध्यम से जुड़े थे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने संसदीय चुनाव जीतने के बाद पहली बार संसदीय क्षेत्र में आने पर काशी के लोगों को बधाई दी। उन्होंने लगातार तीसरी बार उन्हें चुनने के लिए लोगों का आभार जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “अब तो लगता है कि मां गंगा ने भी मुझे अपना लिया है और मैं काशी के लिए स्थानीय हो गया हूं।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि 18वीं लोकसभा के लिए हाल ही में संपन्न हुए आम चुनाव भारत के लोकतंत्र की विशालता, क्षमताओं, व्यापकता और जड़ों का प्रतीक हैं और हमारा देश इसे दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है। इन चुनावों में 64 करोड़ से अधिक लोगों के मतदान किए जाने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कहीं और नहीं होते हैं, जिसमें नागरिकों की इतनी बड़ी भागीदारी होती है। इटली में जी-7 शिखर सम्मेलन में अपनी हालिया यात्रा को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में मतदाताओं की संख्या सभी जी-7 देशों के मतदाताओं की संख्या से डेढ़ गुना अधिक है, तथा यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों के मतदाताओं की संख्या से ढाई गुना अधिक है। प्रधानमंत्री मोदी ने 31 करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं की भारी भागीदारी पर प्रकाश डाला और कहा कि यह दुनिया में किसी एक देश में महिला मतदाताओं की सबसे अधिक संख्या है। उन्होंने कहा कि यह संख्या अमेरिका की पूरी आबादी के आसपास है। श्री मोदी ने कहा, “भारत के लोकतंत्र की ताकत और सुंदरता न केवल पूरी दुनिया को आकर्षित करती है, बल्कि अपना प्रभाव भी छोड़ती है।” प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लोकतंत्र के उत्सव में भाग लेने और इसे एक बड़ी सफलता बनाने के लिए वाराणसी के लोगों को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, “वाराणसी के लोगों ने न केवल एक सांसद, बल्कि खुद प्रधानमंत्री को भी चुना है।”

प्रधानमंत्री ने चुनावी जनादेश को ‘अभूतपूर्व’ बताते हुए कहा कि इससे तीसरी बार निर्वाचित सरकार का चुनाव हुआ है और यह दुनिया के लोकतंत्रों में एक दुर्लभ उपलब्धि है। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत में ऐसी हैट्रिक 60 साल पहले हुई थी। भारत जैसे देश में, जहां युवाओं की आकांक्षाएं इतनी ऊंची हों, अगर कोई सरकार 10 साल के शासन के बाद फिर से सत्ता में आती है, तो यह बहुत बड़ी जीत होती है, बहुत बड़ा विश्वास होता है। और, आपका यह विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुझे ऊर्जा देता है।”

प्रधानमंत्री ने दोहराया कि वे किसानों, नारी शक्ति, युवाओं और गरीबों को विकसित भारत के स्तंभों के रूप में अहमियत देते हैं और याद दिलाया कि सरकार बनने के बाद उसका पहला फैसला किसानों और गरीब परिवारों से जुड़ा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम आवास योजना के तहत 3 करोड़ अतिरिक्त परिवारों या पीएम किसान सम्मान निधि की किस्तों से जुड़े इन फैसलों से करोड़ों लोगों को मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित और प्रौद्योगिकी के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े किसानों का अभिवादन किया। उन्होंने बताया कि करोड़ों किसानों के खाते में 20,000 करोड़ रुपये जमा हो गए हैं। उन्होंने कृषि सखी पहल के बारे में भी बात की, जो 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहल लाभार्थी महिलाओं के लिए आय का गरिमापूर्ण स्रोत सुनिश्चित करेगा और भरोसा दिलाएगा।

प्रधानमंत्री ने करोड़ों किसानों के बैंक खातों में 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक के हस्तांतरण का उल्लेख करते हुए कहा, “पीएम किसान सम्मान निधि दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना के रूप में उभरी है।” इस धनराशि में से अकेले वाराणसी के परिवारों को 700 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने पात्र लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने में प्रौद्योगिकी के उपयोग की सराहना की और विकसित भारत संकल्प यात्रा का भी श्रेय दिया, जिसके कारण 1 करोड़ से अधिक किसानों ने पीएम किसान योजना के तहत खुद को पंजीकृत कराया। उन्होंने कहा कि पहुंच बढ़ाने के लिए नियमों और विनियमों को सरल बनाया गया है। श्री मोदी ने कहा, “जब इरादे और विश्वास सही हों तो किसान कल्याण से संबंधित कार्य तेजी से होते हैं।”

21वीं सदी में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने और दालों और तिलहनों में आत्मनिर्भरता की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने एक प्रमुख कृषि-निर्यातक देश बनने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार मिल रहा है और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (एक जिला एक उत्पाद) योजना तथा हर जिले में निर्यात केंद्रों के माध्यम से निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कृषि में भी जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट के मंत्र पर जोर देते हुए कहा, “मेरा सपना है कि दुनिया भर में हर खाने की मेज पर कम से कम एक भारतीय खाद्य उत्पाद अवश्य हो।” उन्होंने यह भी कहा कि किसान समृद्धि केंद्रों के माध्यम से मोटे अनाज, हर्बल उत्पादों और प्राकृतिक खेती को समर्थन देने के लिए एक विशाल नेटवर्क बनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कृषि में महिलाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी को देखते हुए उनके महत्व और समर्थन को रेखांकित किया और उनके योगदान को बढ़ाने के लिए कृषि के दायरे का विस्तार करने का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि सखी कार्यक्रम ड्रोन दीदी कार्यक्रम की तरह ही इस दिशा में एक कदम है। आशा कार्यकर्ताओं और बैंक सखियों के रूप में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र अब कृषि सखियों के रूप में उनकी क्षमताओं को देखेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि सखियों के रूप में स्वयं सहायता समूहों को 30,000 से अधिक प्रमाण पत्र प्रदान करने का उल्लेख किया और बताया कि वर्तमान में 11 राज्यों में चल रही यह योजना देश भर के हजारों स्वयं सहायता समूहों से जुड़ेगी और 3 करोड़ लखपति दीदियों को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रधानमंत्री ने काशी और पूर्वांचल के किसानों के प्रति केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और साथ ही, बनास डेयरी संकुल, पेरिशेबल कार्गो सेंटर और इंटीग्रेटेड पैकेजिंग हाउस का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “बनास डेयरी ने बनारस और उसके आसपास के किसानों और पशुपालकों की किस्मत बदल दी है। आज ये डेयरी हर दिन करीब 3 लाख लीटर दूध इकट्ठा कर रही है। अकेले बनारस के 14 हजार से ज्यादा पशुपालक परिवार इस डेयरी से पंजीकृत हैं। अब बनास डेयरी अगले डेढ़ साल में काशी के 16 हजार और पशुपालकों को जोड़ने जा रही है। बनास डेयरी के आने के बाद बनारस के कई दुग्ध उत्पादकों की आय में 5 लाख रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है।”

मछली पालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने पीएम मत्स्य संपदा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड के लाभों का उल्लेख किया। उन्होंने वाराणसी में मछली पालन से जुड़े लोगों की सहायता के लिए चंदौली में लगभग 70 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक मछली बाजार के निर्माण की भी जानकारी दी।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना वाराणसी में खूब फल-फूल रही है। उन्होंने बताया कि इस योजना में करीब 40 हज़ार स्थानीय लोगों ने पंजीकरण कराया है और 2,500 घरों में सोलर पैनल लग चुके हैं और 3,000 घरों पर काम चल रहा है। इससे लाभार्थी परिवारों को शून्य बिजली बिल और अतिरिक्त आय का दोहरा लाभ मिल रहा है।

वाराणसी और उसके निकटवर्ती गांवों में कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में पिछले 10 वर्षों में किए गए कार्यों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने वाराणसी में देश की पहली सिटी रोपवे परियोजना के अंतिम चरण में पहुंचने, गाजीपुर, आजमगढ़ और जौनपुर शहरों को जोड़ने वाली रिंग रोड, फुलवरिया और चौकाघाट में फ्लाईओवर के निर्माण का काम पूरा होने, काशी, वाराणसी और कैंट रेलवे स्टेशनों को नया रूप देने, बाबतपुर हवाई अड्डे से हवाई यातायात और व्यापार को आसान बनाने, गंगा घाटों के किनारे विकास, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में नई सुविधाएं, शहर के पुनर्निर्मित कुंड और वाराणसी में विभिन्न स्थानों पर विकसित की जा रही नई प्रणालियों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी में खेलों से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास और नए स्टेडियम से युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

ज्ञान की राजधानी के रूप में काशी की प्रतिष्ठा को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने इस प्राचीन शहर की प्रशंसा की और कहा कि यह एक ऐसा शहर बन गया है, जिसने पूरी दुनिया को सिखाया कि कैसे एक विरासत शहर शहरी विकास की नई कहानी लिख सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “काशी में चहुंओर विकास के साथ-साथ विरासत का मंत्र भी नजर आता है। और, इस विकास का लाभ सिर्फ काशी को ही नहीं हो रहा है। पूरे पूर्वांचल से जो परिवार अपने काम-काज के लिए, अपनी जरूरतों के लिए काशी आते हैं, उनको भी इन सारे कार्यों से बहुत मदद मिल रही है।” श्री मोदी ने कहा, “बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से काशी के विकास की ये नई गाथा निरंतर जारी रहेगी।”

इस अवसर पर, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य एवं श्री ब्रजेश पाठक तथा उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रीगण के साथ-साथ कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम किसान निधि की 17वीं किस्त जारी करने की अपनी पहली फाइल पर हस्ताक्षर किए, जो किसान कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसी प्रतिबद्धता को जारी रखते हुए प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत लगभग 9.26 करोड़ लाभार्थी किसानों को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की 17वीं किस्त जारी की। अब तक, पीएम-किसान के तहत 11 करोड़ से अधिक पात्र किसान परिवारों को 3.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ मिल चुका है।

प्रधानमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की 30,000 से अधिक महिलाओं को कृषि सखी के रूप में प्रमाण पत्र भी प्रदान किए। कृषि सखी कन्वर्जेंस कार्यक्रम (केएससीपी) का उद्देश्य कृषि सखी के रूप में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के माध्यम से ग्रामीण भारत को बदलना है, जिसमें कृषि सखियों को पैरा-एक्सटेंशन वर्कर के रूप में प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करना शामिल है। यह प्रमाणन पाठ्यक्रम ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम के उद्देश्यों के अनुरूप भी है।


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