Avian influenza

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हाल ही में वर्ल्ड ऑर्गनाइज़ेशन फॉर एनिमल हेल्‍थ (World Organization for Animal Health-OIE) ने घोषणा की है कि भारत बर्ड फ्लू के नाम से पहचाने जाने वाले खतरनाक एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian Influenza) यानि H5N1 वायरस से मुक्त हो गया है।

  • यह घोषणा कुछ समय पहले झारखंड, बिहार और ओडिशा में इस बीमारी के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिये किये गए उपायों का एक परिणाम है।
  • यह स्थिति केवल तब तक जारी रहेगी जब तक एवियन इन्फ्लूएंजा के एक और प्रकोप की सूचना जारी नहीं कर दी जाती है। इससे पहले वर्ष 2017 में भी भारत को इस बीमारी से मुक्त घोषित किया गया था।
  • यह घोषणा न केवल पोल्ट्री उद्योग के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि इसलिये भी अहम् है क्योंकि मनुष्य के भी इस बीमारी से संक्रमित होने की संभावना रहती है। हालाँकि इस बिमारी के रोगजनक मानव-से-मानव में संचरित होने में सक्षम नहीं होते है, यह केवल जानवरों से मनुष्यों में ही फ़ैल सकते हैं।
  • एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian influenza-AI) एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो खाद्य-उत्पादन करने वाले पक्षियों (मुर्गियों, टर्की, बटेर, गिनी फाउल, आदि) सहित पालतू पक्षियों और जंगली पक्षियों की कई प्रजातियों को प्रभावित करती है।
  • यह विषाणु जिसे इन्फ्लूएंजा ए (Influenza- A) या टाइप ए (Type- A) विषाणु कहते है, सामान्यतः पक्षियों में पाया जाता है, लेकिन कभी-कभी यह मानव सहित अन्य कई स्तनधारियों को भी संक्रमित कर सकता है। जब यह मानव को संक्रमित करता है तो इसे इन्फ्लूएंजा (श्लेष्मिक ज्वर) कहा जाता है।
    • ‘विषाणु’ एक सूक्ष्मजीव है, जो जीवित कोशिकाओं के भीतर ही अपना विकास एवं प्रजनन करता है।
    • ‘विषाणु’ खुद को जीवित रखने एवं अपनी प्रतिकृति तैयार करने हेतु जीवित कोशिकाओं पर आक्रमण करते हैं तथा उनकी रासायनिक मशीनरी का उपयोग करते हैं।
    • ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं- DNA वायरस व RNA वायरस।
    • विषाणुओं के वर्गीकरण में ‘इन्फ्लूएंजा विषाणु’ RNA प्रकार के विषाणु होते हैं तथा ये ‘ऑर्थोमिक्सोविरिदे’ (Orthomyxoviridae) वर्ग से संबंधित होते हैं। इन्फ्लूएंजा विषाणु के तीन वर्ग निम्नलिखित हैं:-
    1. इन्फ्लूएंजा विषाणु A: यह एक संक्रामक बीमारी है। ‘जंगली जलीय पशु-पक्षी’ इसके प्राकृतिक धारक होते हैं। मानव में संचरित होने पर यह काफी घातक सिद्ध हो सकती है।
    2. इन्फ्लूएंजा विषाणु B: यह विशेष रूप से मनुष्यों को प्रभावित करता है तथा इन्फ्लुएन्ज़ा-ए से कम सामान्य तथा कम घातक होता है।
    3. इन्फ्लूएंजा विषाणु C: यह सामान्यतः मनुष्यों, कुत्तों एवं सूअरों को प्रभावित करता है। यह अन्य इन्फ्लूएंजा प्रकारों से कम सामान्य होता है तथा आमतौर पर केवल बच्चों में हल्के रोग का कारण बनता है।
    • इन्फ्लूएंजा A वायरस को दो प्रकार के प्रोटीन HA (Hemagglutinin) और NA (Neuraminidase) के आधार पर उप-प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
      • उदाहरण के लिये, एक वायरस जिसमें HA 7 प्रोटीन और NA 9 प्रोटीन पाया जाता है, उसे उप-प्रकार H7N9 के रूप में नामित किया जाता है।
      • एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के उप-प्रकार में A(H5N1), A(H7N9), और A(H9N2) शामिल हैं।
      • HPAI A (H5N1) वायरस मुख्य रूप से पक्षियों में होता है और उनके बीच अत्यधिक संक्रामक भी है।
      • HPAI एशियन H5N1 मुर्गी पालन के लिये विशेष रूप से घातक है।
    • एवियन इन्फ्लूएंजा के प्रकोप से पोल्ट्री उद्योग को (विशेष रूप से) विनाशकारी परिणामों का सामना करना पड़ता हैं।
  • बीमारी के प्रकोप से बचाने के लिये सख्त जैव-सुरक्षा (Biosecurity) उपाय अपनाने और अच्छी स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता होती है।
  • यदि जानवरों में इसके संक्रमण का पता चलता है, तो वायरस से संक्रमित और संपर्क वाले जानवरों को चुनकर अलग करने की नीति का अनुपालन किया जाना चाहिये ताकि वायरस के तेज़ी से प्रसार को नियंत्रित किया जा सकें और इसे नष्ट करने के प्रभावी उपाय अपनाए जा सकें।
  • यह दुनिया भर में पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हेतु उत्तरदाई एक अंतर सरकारी संगठन (Iintergovernmental Organisation) है।
  • इसे विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organizatio-(WTO) द्वारा संदर्भित संगठन (Reference Organisation) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • वर्ष 2018 में कुल 182 देश इसके सदस्य थे।
  • इसका मुख्यालय पेरिस, फ्राँस में है।

स्रोत : लिया गया लेख

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