भूमि: सरसों लगभग सभी प्रकार की कृषि योग्य भूमि में पैदा हो सकती है | इसके लिए बलुई मिट्टी या रेतीली मिट्टी अच्छी मानी जाती है |

तापमान: सरसों की बिजाई के लिए मुख्यतया 18-25 डिग्री C तापमान होना चाहिए |

उचित समय: 25 सितम्बर से 25 अक्टूबर के बिच का समय बढ़िया माना जाता है |

भूमि की तेयारी: खरीफ की कटाई के बाद भूमि की अच्छे से गहरी बुवाई करके उसमे पानी दे | पानी देने के 7-10 दिन (मौसम के अनुसार) भूमि में 50-70 क्विंटल रूढ़ी की खाद डालकर या 200 Kg जिप्सम और 50 की पोटाश डालकर दोबारा से बुवाई करे | बुवाई के लिए कुल्तिवेटर – तोई – हेरो इत्यादी का इस्तेमाल करें |

उच्चतम वैरायटी: Pioneer, Luxmi, Shriram 1666, Pussa-00, RH-30

बीज उपचार: बीज का रासायनिक विधि से उपचार के लिए 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम + 2 ग्राम थिरम से 1 किलो बीज के हिसाब से उपचारित करे। बीज को कार्बोक्सिन 17.5% + थायरम 17.5% की 3 ग्राम मात्रा से 1 किलो बीज के हिसाब से उपचारित करें। जैविक तरीके से उपचार के लिए 5 ग्राम ट्रायकोडर्मा विरिडी + 2 ग्राम PSB की मात्रा से 1 किलो बीज़ को उपचारित करे। अगर उपचारित बीज का उपयोग कर रहे हो, तो उन्हें उपचारित न करें।

बिजाई का तरीका: सरसों की बिजाई 2 तरीके से कार सकते है छिटा विधि और कतारों में | ज्यादातर सरसों की बिजाई कतारों में की जाती है | कतारों के बीच की दुरी लगभग 1 से 1.5 फीट होती है |

बिजाई: बिजाई के समय भूमि और पानी के अनुसार बीज का चयन करे | बिजाई के समय 1 से 1.5 Kg सरसों के बीज की बिजाई करें|

नोट: बिजाई के 30-35 दिन के बाद सरसों में से निराई गुड़ाई करके खरपतवार निकाले|

पहली सिंचाई: बिजाई के 40 से 50 दिन के अंदर पहली सिंचाई करें और पहली सिंचाई के साथ 40-45 Kg प्रति एकड़ यूरिया खाद डालें|

पहली सिचाई के बाद फसल में गुड़ाई अवश्य करें इससे पोधे की ग्रोथ अच्च्छी होती है |

दूसरी सिंचाई: बिजाई के 70 से 80 दिन के अंदर दूसरी सिंचाई करें और अगर बारिश हो जाये तो दूसरी सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती|

नोट: सरसों में तेला का विशेष ध्यान रखे अगर तेला रोग आता है तो Mono या Confidor का छिढ़काव करें|

नोट: फसल पकते टाइम जडगलन रोग की समस्या आ सकती है|

अब फसल पकने का इंतजार करें – फसल के पनके का समय 5 मार्च से 25 के लगभग मन जाता है | फसल पकने पर इसकी फलियाँ पिली पद जाती है और दाने सख्त हो जाते है | फसल पकने के बाद अपने सुविधाजनक साधनों से फसल की कटाई और कढ़ाई करे |